प्रशांत महासागर के 'रिंग ऑफ फायर' क्षेत्र में स्थित इंडोनेशिया भूकंप की आपदा को लेकर बहुत संवेदनशील है. ऐसे में वैज्ञानिक वहां के लिए एक अर्ली वॉर्निंग सिस्टम पर काम कर रहे हैं. यानी ऐसा सिस्टम बनाने की तैयारी है जो समय से पहले चेतावनी दे दे. अब उन्होंने इसके लिए अलार्म का एक ऐसा नेटवर्क बनाने का धार्मिक तरीका अपनाया है जो सबसे दूर-दराज के इलाकों तक भी पहुंच सके. यहां बात हो रही है मस्जिदों की जिसका एक सिस्टम पहले से मौजूद है. द गार्डियन की रिपोर्ट के अनुसार पांच साल के एक ट्रायल में यह पता लगाया जा रहा है कि क्या अजान देने वाले लाउडस्पीकरों का इस्तेमाल भूकंप की चेतावनी देने वाले सायरन के तौर पर भी किया जा सकता है.
इंडोनेशिया की आपदा प्रबंधन एजेंसी को बहुत ज्यादा दूरी और मुश्किल से पहुंचने वाले इलाकों से निपटना पड़ता है. लेकिन उन्हें लाउडस्पीकर के पहले से बने-बनाए नेटवर्क का फायदा मिल सकता है, जिनकी रेगुलर रूप से सर्विसिंग होती रहती हैय ऐसी सुविधा कई दूसरे देशों में नहीं है. बता दें कि दुनिया में सबसे ज्यादा मुस्लिम आबादी वाले देश इंडोनेशिया में लाखों मस्जिदें हैं, जहां से दिन में पांच बार नमाज के लिए अजान दी जाती है. इस पायलट स्कीम के तहत कई मस्जिदों को पहले ही भूकंप का पता लगाने वाले सेंसर नेटवर्क से जोड़ दिया गया है.
2030 तक चलने वाले इस प्रोजेक्ट में स्कूलों के लाउडस्पीकर में अलार्म सिस्टम लगाने और रेडियो व टेलीविजन प्रसारण का इस्तेमाल करने पर भी विचार किया जा रहा है. गौरतलब है कि इंडोनेशिया और जापान, दोनों ही 'पैसिफिक रिंग ऑफ फायर' पर स्थित हैं और अक्सर यहां भूकंप आते रहते हैं. रिसर्चर इस बात का अध्ययन कर रहे हैं कि जापान और इंडोनेशिया में लोगों के व्यवहार और बचाव के तरीकों में क्या अंतर है. जापान में आपदा से निपटने के लिए आधिकारिक दिशा-निर्देशों में 'ड्रॉप एंड कवर' की रणनीति पर ज़ोर दिया जाता है- यानी तुरंत किसी सुरक्षित जगह, जैसे कि मेज के नीचे छिपना और घर के अंदर ही रहना.
कई देशों में मस्जिदों का होता है ऐसा इस्तेमाल
मुस्लिम दुनिया के दूसरे देशों ने भी ऐसे ही सिस्टम पर विचार किया है. जब संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की सरकार ने अपना 'बराकाह' न्यूक्लियर पावर प्लांट शुरू करने की योजना बनाई, तो इस प्रोजेक्ट से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि रेडिएशन लीक होने की स्थिति में मस्जिद के लाउडस्पीकर अलार्म के एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा होंगे.
इसी तरह उज्बेकिस्तान में मस्जिदों में लाउडस्पीकर लगाने का एक बहुत बड़ा प्रोजेक्ट चल रहा है. वहां इमरजेंसी सिचुएशन मिनिस्ट्री ने इस साल 272 मस्जिदों में डिवाइस लगाने के लिए एक पायलट प्रोजेक्ट का ऐलान किया है. ये अलार्म लोगों को बाढ़, कीचड़ के बहाव, ज़मीन खिसकने और बर्फीले तूफान (एवलांच) के बारे में चेतावनी देंगे.
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