- यमन के हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइल हमलों के जरिए दूसरा सैन्य अभियान शुरू किया है
- हूती विद्रोहियों का समर्थन ईरान करता है और वे दक्षिणी इजरायल के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बना रहे हैं
- इजरायल ने दावा किया है कि उसने हूतियों द्वारा दागी गई मिसाइलों में से कम से कम एक को नाकाम कर दिया है
अमेरिका-इजरायल और ईरान की जंग में अब यमन के हूती विद्रोहियों की भी एंट्री हो गई है. ईरान, हूती विद्रोहियों का समर्थन करता है. हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर ड्रोन और मिसाइलों से हमला किया है. हूती विद्रोहियों ने रविवार को कहा कि उसने इजरायल के खिलाफ दूसरा 'मिलिट्री ऑपरेशन' शुरू किया है. इस ऑपरेशन के दौरान उसने इजरायल में क्रूज मिसाइलों और ड्रोन से भारी तबाही मचाई है.
यमन के हूती विद्रोहियों की एंट्री ऐसे वक्त हुई है, जब ईरान जंग को एक महीना हो गया है. इसने जंग को और भड़का दिया है. हूती विद्रोहियों ने इजरायल पर दो मिसाइलें दागने का दावा किया है.
हूती ब्रिगेडियर जनरल याह्या सारी ने अल-मसीरा सैटेलाइट टीवी चैनल पर कहा कि उन्होंने दक्षिण में इजरायल के सैन्य ठिकानों की ओर मिसाइलें दागीं. हालांकि, इजरायल का दावा है कि उसने इन मिसाइल हमलों को नाकाम कर दिया.
यह भी पढ़ेंः जंग के बीच ईरान सरकार में पड़ी फूट! राष्ट्रपति और IRGC चीफ किस बात पर भिड़ गए?
इजरायल पर दागी गईं दो मिसाइलें
हूती विद्रोहियों ने दावा किया है कि उसने शनिवार को दक्षिणी इजरायल पर दो मिसाइलें दागी हैं. याह्या सारी ने दावा किया किया हूती विद्रोहियों ने ईरान और हिज्बुल्लाह के साथ ही उसने भी दक्षिणी इजरायल में कई जगहों को निशाना बनाया. हालांकि, उन्होंने उन ठिकानों की जानकारी नहीं दी.
इजरायल ने दावा किया कि उसने पहली मिसाइल को बीच में ही रोक दिया था. हालांकि, उसने दूसरी मिसाइल अटैक को लेकर कोई जानकारी नहीं दी. इजरायली सेना के प्रवक्ता ब्रिगेडियर जनरल एफी डेफ्रिन ने कहा कि 'हम शुरू से ही इस बात के लिए तैयार थे कि हूती भी इस लड़ाई में शामिल हो सकते हैं.'
यह भी पढ़ेंः 'ताज उतार दो', ईरान युद्ध के बीच US में ट्रंप के खिलाफ 'No Kings Protest'; 90 लाख लोगों के शामिल होने का दावा
हूतियों का शामिल होना कितना खतरनाक?
हूती विद्रोहियों का इस जंग में शामिल होना इसे और खतरनाक बना सकता है. हूतियों के शामिल होने से अब रेड सी (लाल सागर) के पास बाब अल-मंडेब स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर फिर बड़ा खतरा खड़ा हो गया है. जानकारों का मानना है कि हूतियों के शामिल होने से बाब अल-मंडेब से गुजरने वाले जहाजों पर फिर से हमले हो सकते हैं. बाब अल-मंडेब से 12% जहाज गुजरते हैं.
इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के यमन मामलों के सीनियर एनालिस्ट अहमद नागी ने कहा, 'अगर हूती विद्रोही जहाजों पर हमले बढ़ाते हैं, जैसा कि उन्होंने पहले भी किया है, तो इससे तेल की कीमतें और बढ़ जाएंगी और पूरी समुद्री सुरक्षा अस्थिर हो जाएगी. इसका असर सिर्फ ऊर्जा बाजार तक ही सीमित नहीं रहेगा.'
अरब प्रायद्वीप के दक्षिणी छोर पर स्थित बाब अल-मंडेब स्ट्रेट लाल सागर के रास्ते स्वेज नहर की ओर जाने वाले जहाजों के लिए बेहद अहम है. सऊदी अरब इस रास्ते से हर दिन लाखों बैरल कच्चा तेल भेजता है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट बंद पड़ा है.
नवंबर 2023 से जनवरी 2025 के बीच, हूती विद्रोहियों ने 100 से ज्यादा जहाजों पर मिसाइलों और ड्रोन से हमला किया था, जिसमें दो जहाज डूब गए थे.
यह भी पढ़ेंः ईरान में खतरनाक मोड़ पर पहुंची जंग? 3,500 मरीन और पहुंचे, 20 साल में मिडिल ईस्ट में US की सबसे बड़ी तैनाती
यह भी पढ़ेंः ईरान की केवल एक तिहाई मिसाइलें तबाह कर पाया अमेरिका!
यह भी पढ़ेंः होर्मुज से हाहाकार, 'बाब अल-मंदेब' स्ट्रेट बंद हुआ तो क्या होगा? समझें- ईरान का गेमप्लान
यह भी पढ़ेंः युद्ध के बीच बेमानी है 'अर्थ ऑवर', युद्ध से पर्यावरण को होने वाले नुकसान को जानकर हिल जाएंगे आप
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं