- ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और IRGC के चीफ कमांडर अहमद वाहिदी के बीच युद्ध को लेकर गहरे मतभेद हैं
- राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने युद्ध को रोकने और सीजफायर की मांग की है, जबकि IRGC युद्ध को जारी रखना चाहती है
- पेजेश्कियान ने IRGC की रणनीति की आलोचना की है और सरकार को युद्ध के प्रबंधन की जिम्मेदारी देने की मांग की है
अमेरिका और इजरायल के साथ एक महीने से ईरान जंग लड़ रहा है. अब तक जंग किसी नतीजे पर पहुंची नहीं है. इस बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) के चीफ कमांडर अहमद वाहिदी के बीच इस बात को लेकर गंभीर मतभेद सामने आए हैं कि युद्ध को कैसे संभाला जाए और बदहाल होती अर्थव्यवस्था से कैसे निपटा जाए? 'ईरान इंटरनेशनल' ने सूत्रों के हवाले से दोनों के बीच इस मनमुटाव की जानकारी दी है.
'ईरान इंटरनेशनल' ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने बढ़ते तनाव और पड़ोसी देशों पर लगातार हो रहे हमलों के संबंध में IRGC के रवैये की आलोचना की है और इस जंग के अंजामों को लेकर आगाह किया है. सूत्रों ने बताया कि उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बिना सीजफायर के, ईरान की अर्थव्यवस्था तीन हफ्ते या एक महीने के भीतर पूरी तरह से तबाह हो सकती है.
इससे ऐसा संकेत मिल रहा है कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान सीजफायर करना चाहते हैं लेकिन IRGC जंग को खींचना चाहती है.
इससे पहले भी ऐसी खबरें थीं कि जंग को लेकर ईरान की सरकार और IRGC के बीच मतभेद चल रहे हैं. दावा किया जा रहा था कि अमेरिका-इजरायल से जंग शुरू होने के बाद जिस तरह ईरान ने खाड़ी देशों को निशाना बनाया, उससे राष्ट्रपति पेजेश्कियान नाखुश थे. उन्होंने 7 मार्च को एक वीडियो मैसेज जारी कर इन हमलों के लिए माफी भी मांगी थी और ऐसे हमले रोकने के निर्देश दिए थे. हालांकि, इसके बाद भी खाड़ी देशों पर ईरान के हमले जारी हैं.
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किस बात को लेकर है मतभेद?
'ईरान इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, सूत्रों का कहना है कि पेजेश्कियान ने मांग की है कि एग्जीक्यूटिव पावर सरकार को सौंप दी जाएं. हालांकि, IRGC के चीफ कमांडर अहमद वाहिदी ने इस पूरी तरह से खारिज कर दिया है.
राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने IRGC की आलोचना भी की है. इसके जवाब में IRGC ने मौजूदा हालात के लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराया है. IRGC ने आरोप लगाया कि संघर्ष शुरू होने से पहले सरकार ने सुधारों को ठीक तरह से लागू नहीं किया था.
हाल के दिनों में इजरायली मीडिया ने भी ईरान की सरकार के भीतर दरार के संकेत मिलने की खबरें दी हैं. 'द टाइम्स ऑफ इजरायल' ने एक सीनियर इजरायली अफसर का हवाला देते हुए लिखा कि ईरानी शासन में ददरार के संकेत मिल रहे हैं. हम अब इसे उखाड़ फेंकने की तैयारी कर रहे हैं लेकिन आखिरकार ये सबकुछ ईरानी लोगों पर ही निर्भर करता है.
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बर्बाद हो रही है ईरान की अर्थव्यवस्था
जंग शुरू होने से पहले ही ईरान की अर्थव्यवस्था की हालत बहुत खराब हो चली थी. उसकी करंसी गिर चुकी थी. अब युद्ध ने इस अर्थव्यवस्था को बद से बदतर कर दिया है.
'ईरान इंटरनेशनल' की रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे-जैसे जंग बढ़ती जा रही है, वैसे-वैसे इसके आर्थिक प्रभाव और भी दिखाई देने लगे हैं. कई शहरों में ATM में नकदी खत्म हो गई है. ईरान के कई बैंकों की ऑनलाइन सर्विसेस भी बाधित हो रही हैं.
सरकारी कर्मचारियों ने दावा किया है कि पिछले तीन महीनों से उनकी तनख्वाह भी नहीं मिल रही है. फरवरी में युद्ध शुरू होने से पहले ही ईरान की महंगाई दर 115% तक पहुंच गई थी.
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