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अयातुल्लाह या ग्रैंड अयातुल्लाह कैसे बनते हैं और ज्यादातर ईरान और इराक के दो शहरों से ही क्यों?

हुज्जतुल इस्लाम से लेकर ग्रैंड अयातुल्लाह बनने तक की प्रक्रिया कैसी है. दशकों की तालीम, गहन हदीस‑कुरआन अध्ययन और असाधारण मेमोरी की कसौटी पर खरा उतरना होता है. साथ ही, क्यों दुनिया के ज़्यादातर शीर्ष शिया आलिम ईरान के क़ुम और इराक के नजफ़ जैसे सेमिनरी केंद्रों से उभरते हैं, जानिए-

अयातुल्लाह या ग्रैंड अयातुल्लाह कैसे बनते हैं और ज्यादातर ईरान और इराक के दो शहरों से ही क्यों?
इजरायल-अमेरिका के हमले में खामेनेई की मौत
  • ईरान में अयातुल्लाह बनने के लिए करीब 25 से 45 साल की इस्लामी शिक्षा और अध्ययन आवश्यक होता है
  • ग्रैंड अयातुल्लाह बनने के लिए क़ुरान और पैगंबर की हदीसों पर गहरी पकड़ और समझ होना अनिवार्य माना जाता है
  • अयातुल्लाह और ग्रैंड अयातुल्लाह दोनों विवाह कर सकते हैं, इस्लामी नेतृत्व में विवाह पर कोई प्रतिबंध नहीं है
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ईरान में अयातुल्लाह अली खामेनेई की मौत के बाद यह सवाल और ज्यादा अहम हो गया है कि अब सुप्रीम लीडर की कमान कौन संभालेगा? इसी संदर्भ में यह जानना जरूरी है कि अयातुल्लाह और ग्रैंड अयातुल्लाह कौन होते हैं, वे कैसे बनते हैं, क्या हर कोई शिया बन सकता है, और क्या अयातुल्लाह विवाह कर सकते हैं. इन तमाम सवालों पर अली अब्बास नक़वी ने ईरान के अल‑मुस्तफा यूनिवर्सिटी के पूर्व स्कॉलर मौलाना असलम रिजवी से खास बातचीत की. इस बातचीत के दौरान उन्होंने उन कई सवालों के जवाब दिए, जिससे अयातुल्लाह के ओहदे तक पहुंचने के मुश्किल सफर के बारे में पता चलता है.

NDTV का सवाल: कैसे बनते हैं आयतुल्लाह?

मौलाना असलम रिजवी: हमारे यहां तीन मरहले (पड़ाव) होते हैं. पहले मरहले में जो आलिम होता है, वह हुज्जतुल इस्लाम बनता है. यानी कोई जब मदरसे या इस्लामिक इंस्टीट्यूट में तकरीबन 10 साल तक पढ़ता है, तब उसे हुज्जतुल इस्लाम (मौलाना) कहते हैं. इसके बाद 10–15 साल और पढ़ने के बाद अयातुल्लाह बन पाते हैं. अयातुल्लाह के बाद तकरीबन 20 साल और यानी कुल मिलाकर 40–50 साल की पढ़ाई के बाद ग्रैंड अयातुल्लाह बनते हैं.

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NDTV का सवाल: कैसे पता चलता है कि कोई ग्रैंड आयतुल्लाह बन सकता है?

मौलाना असलम रिजवी: ग्रैंड अयातुल्लाह कोई भी बन सकता है, लेकिन उसकी मेमोरी बहुत ही शार्प होनी चाहिए, क्योंकि उसे पूरे क़ुरान का ज्ञान और पैगंबर मोहम्मद साहब व उनके अहल‑ए‑बैत की तकरीबन 36,000 हदीसों पर पकड़ होनी चाहिए. मैं यह नहीं कह रहा कि 36,000 हदीसें जरूर याद हों, लेकिन उन पर गहरी नजर और समझ होना चाहिए. यही वजह है कि लाखों में से दो‑चार ही ग्रैंड अयातुल्लाह के ओहदे तक पहुंच हैं. यह वाकई बहुत मुश्किल काम है.

NDTV का सवाल: क्या आयतुल्लाह या ग्रैंड आयतुल्लाह शादी कर सकते हैं?

मौलाना असलम रिजवी: जो भी आयतुल्लाह‑उल‑उज़्मा यानी ग्रैंड आयतुल्लाह बनता है, वह शादी कर सकता है. बहुत से धर्मों में जब कोई धार्मिक नेतृत्व के उच्च स्तर तक पहुंचता है, तो वह विवाह नहीं करता; लेकिन इस्लाम में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है.

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NDTV का सवाल: क्या किसी भी देश में रहकर आयतुल्लाह बन सकते हैं?

मौलाना असलम रिजवी: ग्रैंड अयातुल्लाह किसी भी मुल्क में रहकर बन सकता है, लेकिन कई देशों में शिक्षा‑संस्थान और सुविधाएं उस स्तर की नहीं मिलतीं. इसलिए ज़्यादातर ग्रैंड आयतुल्लाह ईरान के शहर कुम या इराक के शहर नजफ में मिलेंगे. ग्रैंड अयातुल्लाह असल में किसी तरह की कोई सरकारी पोस्ट नहीं है, बल्कि मेहनत से हासिल किया गया मुकाम है, उसे कोई भी शिया कड़ी मेहनत से पा सकता है।

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