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मेक्सिको में मछली की रहस्यमयी प्रजाति, एक लाख साल से बिना नर के पैदा कर रहीं बच्चे, वो भी सिर्फ मादा

अमेजन मौली एक ऐसी अनोखी मछली है जो बिना नर के ‘गाइनेजेनेसिस’ प्रक्रिया से केवल मादा क्लोन पैदा करती है और 1 लाख साल से जीवित है.

मेक्सिको में मछली की रहस्यमयी प्रजाति, एक लाख साल से बिना नर के पैदा कर रहीं बच्चे, वो भी सिर्फ मादा

मेक्सिको और दक्षिणी टेक्सास की नदियों में एक ऐसी मछली तैर रही है, जिसे विज्ञान के नियमों के मुताबिक बहुत पहले ही विलुप्त हो जाना चाहिए था. 'अमेजन मौली' नाम की यह मछली पिछले 1 लाख साल से बिना किसी नर के अपना अस्तित्व बचाए हुए है.

इस अनोखी प्रजाति में सिर्फ मादाएं ही पैदा होती हैं. जीवविज्ञानी हमेशा से मानते आए हैं कि बिना लैंगिक प्रजनन के कोई भी प्रजाति लंबे समय तक जिंदा नहीं रह सकती, क्योंकि समय के साथ उनके डीएनए में खतरनाक बीमारियां और म्यूटेशन्स होने लगती हैं. लेकिन अमेजन मौली ने इस स्थापित थ्योरी को पूरी तरह चुनौती दे दी है.

क्या है 'गाइनेजेनेसिस' का खेल?

यह मछली संतान पैदा करने के लिए एक बेहद अनोखी और शातिर जैविक तरकीब अपनाती है, जिसे गाइनेजेनेसिस (Gynogenesis) कहा जाता है. अमेजन मौली दूसरी मिलती-जुलती प्रजातियों के नर मछलियों के पास जाती जरूर है, लेकिन वह उनके स्पर्म का इस्तेमाल सिर्फ अपने अंडे को एक्टिवेट यानी विकसित करने के लिए करती है.

जैसे ही अंडा एक्टिवेट होता है, वह नर के डीएनए को तुरंत बाहर फेंक देती है. इसका मतलब यह है कि होने वाले बच्चे में पिता का कोई गुण नहीं जाता. पैदा होने वाली सभी संतानें सिर्फ मादाएं होती हैं, जो हूबहू अपनी मां की कार्बन कॉपी यानी 'क्लोन' होती हैं.
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Photo Credit: Pixabay

जीन कन्वर्जन का इस्तेमाल कर हो रहा ये मुमकिन

बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार,  म्यूनिख की लुडविग मैक्सिमिलियन यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने रिसर्च में पाया कि यह मछली खुद को बचाने के लिए 'जीन कन्वर्जन'का इस्तेमाल करती है. इंसानों में भी जब धूप या रेडिएशन से डीएनए खराब होता है, तो कोशिकाएं उसे ठीक करती हैं.

लेकिन अमेजन मौली में यह सिस्टम बहुत एडवांस है. इसके शरीर की कोशिकाएं खराब हो चुके जीनोम वाले हिस्से को पहचानकर, उसकी जगह सही वाले हिस्से को कॉपी-पेस्ट कर देती हैं. खासकर डीएनए के जिन हिस्सों में सबसे खतरनाक बीमारियां होने का खतरा होता है, वहां यह मछली सबसे ज्यादा सुधार करती है.

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1 लाख साल का सफर

वैज्ञानिकों के अनुसार, अमेजन मौली की शुरुआत करीब 1 लाख साल पहले एक अटलांटिक मौली (मादा) और सेलफिन मौली (नर) के बीच अचानक हुए मिलन से हुई थी. इस क्रॉस-ब्रीडिंग से जो हाइब्रिड प्रजाति बनी, उसे शुरुआत से ही दोनों प्रजातियों की मजबूत जेनेटिक विविधता विरासत में मिल गई.

यही वजह है कि बिना नर के भी इसका जीनोम आज तक पूरी तरह स्वस्थ और मजबूत बना हुआ है. वैज्ञानिकों का मानना है कि इस मछली के 'जीन कन्वर्जन' को समझकर भविष्य में इंसानों में होने वाले कैंसर जैसी घातक म्यूटेशन वाली बीमारियों के इलाज में बड़ी मदद मिल सकती है.

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