Viral Video: आप किसी ट्रेन में चढ़ें और आपको इंसान कम और बकरियां, सूअर, बत्तखें और मुर्गियां ज्यादा दिखें. कहीं आपको यह तो नहीं लग रहा कि भारत के किसी गांव की बात हो रही है? नहीं यकीन मानिए यह मंजर दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था यानी चीन का है. लंदन में रहने वाली सोलो ट्रैवलर और यूट्यूबर विंसी लाउ ने जब चीन की ट्रेनों के अंदर यह सब देखा तो वह भी हैरत में पड़ गईं.
मूल रूप से हांगकांग की कंटेंट क्रिएटर विंसी लाऊ ने जब ट्रेन में एक पैसेंजर को पीठ पर टोकरी में बकरी ले जाते देखा तो वह उसके पीछे-पीछे चलने लगीं. उन्होंने अपने इंस्टाग्राम रील में बताया कि वह चीन के सिचुआन के ग्रामीण इलाकों से गुजरने वाली एक धीमी रफ्तार वाली चीनी ट्रेन में सफर कर रही थी. तभी एक आदमी ट्रेन में चढ़ा. उसने अपनी पीठ पर एक बकरी और हाथ में एक मुर्गी ले रखी थी. विंसी ने कहा, "ऐसा नजारा मैंने अपनी किसी भी ट्रेन जर्नी में पहले कभी नहीं देखा था. उस आदमी के बेटे ने मुझे बताया कि ये चीजें यी बिमो नाम की एक रस्म के लिए थीं, जिसका मकसद बुरी आत्माओं को भगाना था, क्योंकि उसकी बहन बीमार पड़ गई थी... सच कहूं तो, यह मेरी जिंदगी की सबसे यादगार और अनोखी 5 घंटे की ट्रेन यात्रा थी."
क्यों खास हैं चीन की पब्लिक वेलफेयर ट्रेनें?
सूअर, बकरियों, बत्तखों, मुर्गियों या ढेर सारी सब्जियों के साथ ट्रेन में सफर करने की बात सुनने में भले अजीब लग सकती है, लेकिन चीन के कई हिस्सों में यह कोई अनोखी बात नहीं है. चीन अपने गांवों के किसानों के लिए खास ट्रेन चलाता है. इन ट्रेनों का नाम पब्लिक वेलफेयर ट्रेनें हैं जिसका सिंपल ट्रांसलेशन होता है जनकल्याण की ट्रेनें. यह पब्लिक वेलफेयर ट्रेनें चीन के छोटे गांवों को बड़े शहरों से जोड़ती हैं. कमाल की बात है कि इन ट्रेनों की टिकटों में चीनी सरकार सब्सिडी देती है. बेहद सस्ती टिकटों की वजह से बहुत कम खर्च में इन ट्रेनों में सफर करना मुमकिन होता है.
दशकों पहले शुरू, टिकट अभी भी 30 रुपए से कम
इन पब्लिक वेलफेयर ट्रेनों की शुरुआत दशकों पहले हुई थी, लेकिन कई रूट आज भी चालू हैं. कई ट्रेनों के टिकट की कीमतें आज भी उतनी ही कम हैं जितनी शुरुआत में थीं- कुछ टिकट तो सिर्फ 2 युआन के हैं. भारतीय करेंसी में यह रकम 28 रुपए के आसपास बैठती है. ये ट्रेनें अलग-अलग तरह के इलाकों और अलग-अलग टाइमटेबल के साथ चलती हैं.
चीन की सरकारी मीडिया CGTN की एक रिपोर्ट के अनुसार एक ऐसी ही ट्रेन है जिसका नंबर 8821 है. यह ट्रेन चीन के शांक्सी प्रांत में शिनझोउ से हेबियन तक चलती है और एक घंटे से भी कम समय में 40 किलोमीटर की दूरी तय करती है. दूसरी ट्रेन नंबर 5633 है जो सिचुआन प्रांत में पुक्सियांग से पंजिहुआ साउथ स्टेशन तक लगभग 9 घंटे में 350 किलोमीटर से ज्यादा की दूरी तय करती है.
✨🇨🇳China's public welfare slow trains: fares from 28 cents, unchanged for decades. Farmers bring goats, chickens, and vegetables to market. Villagers ride to towns for work, shopping, and medical care. Not fast—but a lifeline. 🚂 https://t.co/WinRS0kwYn
— 🇨🇳XuZhenqing徐祯卿 (@XueJia24682) October 7, 2026
इन ट्रेनों को क्यों शुरू किया गया?
इन वेलफेयर ट्रेनों का मकसद एक ही है- पूरे चीन में कनेक्टिविटी बढ़ाना और यह पक्का करना कि आप चाहे कहीं भी रहते हों या इलाका कितना भी मुश्किल क्यों न हो, आप हमेशा नजदीकी बाजार या बड़े शहर से अच्छी तरह जुड़े रहें. जहां डिमांड है, वहां स्पलाई आसानी से पहुंच जाए.
यह तो हुई गांवों के किसानों की हितों की बात. दूसरी तरफ देखिए कि चीन के पास दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे फैला हुआ हाई-स्पीड रेल नेटवर्क है. CR 450 ट्रेनें, जिनकी टॉप टेस्ट स्पीड 450 kmph है, अभी ट्रायल के दौर से गुजर रही हैं. यानी चीन एक तरफ अपने रेलवे नेटवर्क में जबरदस्त तरक्की कर रहा है, तो दूसरी तरफ पब्लिक वेलफेयर ट्रेनें इस बात का उदाहरण हैं कि चीन विकास के सफर में किसी को भी पीछे नहीं छोड़ना चाहता.
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