- गाजा पर बनी डॉक्यूमेंट्री 'NAZA' पर बवाल मचा हुआ है.
- पीएम नेतन्याहू ने इसे यहूदियों के खिलाफ नफरत बताया औ कहा कि यह बर्दाश्त से बाहर है.
- गौर करने वाली बात है कि यह डॉक्यूमेंट्री इजरायल के ही दो पत्रकारों ने बनाई है.
फिलिस्तीन के गाजा पर बनी डॉक्यूमंट्री फिल्म 'NAZA' को लेकर बवाल मचा हुआ है. फिल्म में गाजा में इजरायली सेना की कार्रवाई से जुड़े पहलू शामिल किए गए हैं. अब इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भी इस पर आपत्ति जताई है. उन्होंने कहा है कि यह यहूदियों के खिलाफ दुनिया भर में भड़काई जा रही नफरत की लहर का ही एक हिस्सा है. इजरायली अधिकारियों ने फिल्म बनाने वालों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है. 'NAZA' ने शनिवार को वेनिस फिल्म फेस्टिवल में 'स्पेशल जूरी प्राइज' जीता. गुरुवार को इसकी स्क्रीनिंग के दौरान दर्शकों ने खड़े होकर 25 मिनट तक तालियां बजाकर इसका सम्मान किया.

Photo Credit: AFP
'यह बर्दाश्त के बाहर...'
नेतन्याहू ने टेलीग्राम पर पोस्ट किए गए एक वीडियो में कहा, "यह चौंकाने वाली बात है. हम दुनिया भर में यहूदियों के खिलाफ नफरत फैलाने वाली बातों से लड़ रहे हैं और जब ऐसी बातें हमारे अपने लोगों की तरफ से आती हैं, तो यह बर्दाश्त के बाहर है."
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'NAZA' में क्या है?
गाजा पर बनी इस डॉक्यूमेंट्री का नाम इजरायली सेना के उस शब्द से लिया गया है, जिसका इस्तेमाल जंग में होने वाली संभावित 'अतिरिक्त मौतों' के लिए किया जाता है. यह फिल्म युद्ध में शामिल इंटेलिजेंस अफसरों और सैनिकों के गुमनाम इंटरव्यू पर आधारित है.
जिन लोगों का इंटरव्यू लिया गया, उन्होंने बताया कि गाजा पट्टी में टारगेट कैसे चुने जाते थे और हमलों में आम नागरिकों की मौतों को किस तरह ध्यान में रखा जाता था.
इसमें इजरायली सेना और इंटेलिजेंस के 24 ऐसे अज्ञात अधिकारियों की बात की गई है, जिन्होंने उन AI-पावर्ड टारगेटिंग सिस्टम के बारे में बताया है, जिनका इस्तेमाल इजरायली सेना ने 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद शुरू हुई जंग में गाजा पर बमबारी के लिए किया था.
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डॉक्यूमेंट्री बनाने वाले पत्रकारों की नागरिकता पर सवाल
इजरायल के कल्चर मिनिस्टर मिकी जोहर ने कहा कि उन्होंने अधिकारियों से कहा है कि वे इस बात की जांच करें कि ये कंटेंट कैसे हासिल किया गया. इसके पीछे कौन है और क्या इन्हें हासिल करने या पब्लिश करने के प्रोसेस ऐसी कोई कार्रवाई की गई, जो युद्ध के समय दुश्मन की मदद करने के बराबर हो.
इजरायल के गृह मंत्रालय को लिखे एक पत्र में उन्होंने कहा, "फिल्म में किए गए दावे झूठे और तोड़-मरोड़कर पेश किए गए हैं. मैं IDF सैनिकों और इजरायल राज्य को जानबूझकर अपराध करने वालों के तौर पर दिखाने की कोशिश को पूरी तरह से खारिज करता हूं."
बता दें कि गाजा के स्वास्थ्य अधिकारियों के मुताबिक, इजरायल के विनाशकारी युद्ध में 73,700 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं, जिनमें से ज्यादातर आम नागरिक थे. इस जंग ने घेराबंदी वाले इस इलाके के बड़े हिस्से को खंडहर में बदल दिया है.
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