
जी20 शिखर सम्मेलन में भारत को बड़ी सफलता मिली है। समूह के देशों ने कालेधन के मुद्दे पर भारत के रुख का समर्थन करते हुए कर सूचनाएं देने और पारदर्शिता की जरूरत का अनुमोदन किया है।
इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कालेधन की समस्या से निपटने के लिए ने वैश्विक मानक और सूचनाओं के स्वत: आदान प्रदान पर समर्थन का आह्वान किया था।
शिखर सम्मेलन के दौरान अपने संबोधन में मोदी ने कालेधन की समस्या से पैदा चुनौतियों से निपटने में दुनियाभर के देशों के बीच नजदीकी समन्वय की जोरदार वकालत की। दो दिन के इस सम्मेलन में अमेरिका के राष्ट्रपति बराक ओबामा, चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरन सहित दुनिया के 20 प्रमुख विकसित और विकासशील देशों के शीर्ष नेताओं ने भाग लिया।
मोदी ने कहा कि कर सूचनाएं देने के नए मानकों से विदेशों में छुपाकर रखे गए कालेधन से जुड़ी जानकारी पाने में मदद मिलेगी और इसे देश में वापस लाया जा सकेगा। जी20 देश दुनिया की सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 85 प्रतिशत हिस्सेदारी रखते हैं।
मोदी ने इस मुद्दे पर भारत के पूर्ण समर्थन का वादा करते हुए दुनिया के सभी देशों विशेषतौर पर कर चोरों की पनाहगाह माने जाने वाले देशों से संधि से जुड़े दायित्वों को निभाते हुए कर संबंधी सूचनायें देने का आग्रह किया।
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