- ब्रिटेन ने 40 से अधिक देशों को आमंत्रित किया है, जो नौवहन की स्वतंत्रता बहाल करने के लक्ष्य को साझा करते हैं
- फ्रांस और ब्रिटेन ने स्पष्ट किया है कि वे अमेरिकी नाकाबंदी योजना का हिस्सा नहीं होंगे और अलग रणनीति बनाएंगे
- अमेरिका को उम्मीद के विपरीत नाटो देशों का समर्थन नहीं मिला, जिससे ईरान को दबाव कम होने का मौका मिला है
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टारमर ने सोमवार को कहा कि फ्रांस और ब्रिटेन इस सप्ताह होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजरानी की सुरक्षा के लिए एक "समन्वित, स्वतंत्र, बहुराष्ट्रीय योजना" पर चर्चा करने के लिए संयुक्त रूप से एक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेंगे. स्टारमर ने कहा कि ब्रिटेन ने "40 से अधिक देशों को आमंत्रित किया है जो नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के हमारे लक्ष्य को साझा करते हैं" और शिखर सम्मेलन में "संघर्ष समाप्त होने के बाद" जहाजरानी की सुरक्षा के तरीकों पर चर्चा की जाएगी. साथ ही ब्रिटेन ने ये भी साफ कर दिया है कि वो
आज से अमेरिका कर रहा नाकाबंदी
संडे को ईरान से वार्ता बेनतीजा रहने के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार से होर्मुज जलडमरूमध्य की नाकाबंदी शुरू करने का आदेश दिया था. ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर यह भी कहा कि "अन्य देश भी इस नाकाबंदी में शामिल होंगे", लेकिन उन्होंने यह नहीं बताया कि किन देशों के साथ. इसके बाद अमेरिकी सेना ने कहा कि ट्रंप द्वारा आदेशित जलडमरूमध्य की नाकाबंदी दोपहर 2 बजे (GMT) से शुरू होगी और इस महत्वपूर्ण जलमार्ग के दोनों ओर स्थित ईरानी बंदरगाहों से निकलने वाले या वहां डॉक करने की कोशिश करने वाले सभी जहाजों पर लागू होगी.
Aucun effort ne doit être ménagé pour parvenir rapidement à un règlement solide et durable du conflit au Moyen-Orient par la voie de la diplomatie.
— Emmanuel Macron (@EmmanuelMacron) April 13, 2026
Un règlement qui permette de doter la région d'un cadre robuste permettant à chacun de vivre en paix et en sécurité.…
फ्रांस-ब्रिटेन अलग रास्ते पर
मगर मैक्रों और स्टारमर द्वारा 'एक्स' पर घोषित ब्रिटेन-फ्रांस की पहल, ट्रंप द्वारा घोषित नाकाबंदी से अलग है. मैक्रों ने लिखा, "आने वाले दिनों में, यूनाइटेड किंगडम के साथ मिलकर, हम उन देशों के साथ एक सम्मेलन आयोजित करेंगे जो जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता को बहाल करने के उद्देश्य से एक शांतिपूर्ण बहुराष्ट्रीय मिशन में हमारे साथ योगदान देने के लिए तैयार हैं." उन्होंने आगे कहा कि यह मिशन "पूरी तरह से रक्षात्मक" होगा और "परिस्थितियां अनुकूल होते ही" तैनात होने के लिए तैयार होगा.
अमेरिका-ईरान में किसका फायदा
फ्रांस-ब्रिटेन का ये क्लियर करना कि वो ट्रंप के नाकाबंदी वाले प्लान का हिस्सा नहीं होंगे साबित करता है कि नाटो भी अमेरिका के साथ इसमें शामिल नहीं होगा. जाहिर है इससे अमेरिका को झटका लगा है. अमेरिका को उम्मीद थी कि वो होर्मुज खुलवाने के नाम पर सभी देशों का समर्थन हासिल कर लेगा और इसके खुलते ही ईरान का बनाया प्रेशर कमजोर हो जाएगा. अब ब्रिटेन और फ्रांस के अलग रणनीति बनाने और होर्मुज नाकाबंदी फ्री कराने की डेट भी नहीं बताने से ये साफ है कि अभी कुछ दिन और ईरान को अमेरिका पर दबाव बनाने की मोहलत मिल जाएगी. अमेरिका अकेले ईरान से होर्मुज नाकाबंदी खुलवाने की स्थिति में नहीं है. अगर वो रहता है तो अब तक ऐसा कर चुका होता. दूसरी बात ये भी है कि ट्रंप ने दावा किया था कि अब अमेरिका होर्मुज की नाकाबंदी करेगा और ईरान को टोल देकर पार करने वाले जहाजों को बर्बाद कर देगा. तो ये भी अब अमेरिका के लिए करना बहुत मुश्किल है. कारण ये है कि अमेरिका अभी ये कतई नहीं चाहेगा कि वो ईरान के अलावा किसी अन्य देश के साथ उलझे. ये दोनों बातें ईरान के लिए फायदे का सौदा ही हैं. ईरान को टोल के जरिए अच्छी कमाई हो रही है और अगर ये रुकती तो उसके लिए अमेरिका से जंग लड़ना मुश्किल हो जाता.
ये भी पढ़ें-
मुझे डर नहीं लगता... पोप लियो XIV ने दिया ट्रंप की बातों का जवाब, जानिए कैसे बढ़ी इतनी बात
तुर्किए को 'नया दुश्मन' घोषित करने की कोशिश कर रहा है इजराइल: विदेश मंत्री हाकान फिदान
ईरान युद्ध में यूरोप क्या हो गया अलग-थलग? जानिए क्यों आगे होगी बहुत ज्यादा मुश्किल
डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान-अमेरिका शांति वार्ता की बताई एक-एक बात, आगे का प्लान भी बताया
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं