ईरान (Iran) ने इजरायल (Israel) पर मंगलवार की शाम मिसाइलों से हमला किया. इस हमले के बाद दोनों देशों के बीच टकराव बढ़ गए हैं. इस मुद्दे पर विदेश मामलों के जानकार कमर आगा के साथ एनडीटीवी ने बात की पढ़िए उन्होंने क्या कहा?
ईरान इजरायल के बीच युद्ध में मुझे नहीं लगता है कि कोई और देश की एंट्री होगी. खाड़ी देश हमास की विचारधारा से सहमत नहीं हैं. सऊदी अरब और अन्य देश मुस्लिम ब्रदरहुड को अपने लिए खतरा मानते हैं. एक जमाने से इन लोगों के बीच तनाव रहा है. जब सद्दाम हुसैन ने ईरान पर हमला किया था तो अरब देशों ने अपरोक्ष तौर पर इराक को साथ दिया था. पैसे से लेकर हर तरह का सहयोग उस दौर में ईरान के खिलाफ सद्दाम हुसैन को मिला था. साथ ही अरब देश कभी नहीं चाहेंगे कि ईरान जो कि अरब देश नहीं है वो इस क्षेत्र में कोई बड़ी भूमिका निभाए. अब तक अरब देशों ने जो भी सहायता की है वो सिर्फ मानवीय सहयोग रहा है.
-
NDTV WORLD SUMMIT 2026 : कृति सेनन को बिकिनी सीन करने में क्यों लगे 12 साल? -
ब्रिटेन के हरियाणवी मेयर तुषार कुमार ने बताया कैसे गरीबों की मदद ने जिताया चुनाव -
टैक्स सिर्फ कमाई पर लगे, पूरी रकम पर नहीं..."F&O ट्रेडर्स के नुकसान पर बोले Zerodha को-फाउंडर निखिल कामत -
जिस शशि थरूर को सुनती है पूरी दुनिया, संसद में वह किसे सुनना पसंद करते हैं? खुद खोला राज -
रुपये की गिरती कीमत पर RBI गवर्नर का बड़ा बयान, कोई फिक्स लेवल नहीं, जानिए क्या है रिजर्व बैंक का एक्शन प्लान -
टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग अनिवार्य? RBI गवर्नर ने NDTV समिट में बताया ये क्यों है जरूरी -
AI से बुलेट ट्रेन तक... अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत का फ्यूचर प्लान -
NDTV World Summit 2026: वेजिटेरियन खिलाड़ियों को कौन सी दिक्कतें होती हैं? Savita, Neeru ने बताया -
NDTV World Summit 2026 के मंच पर भारत की 'गोल्डन गर्ल्स' ने बताया जीत का मंत्रा! | Asian Games 2026 -
NDTV World Summit 2026: Lovlina Borgohain ने बताया जीवन का सबसे बड़ा चैलेंज! क्यों लगने लगे ठहाके?
इसके साथ ही जितने भी इस्लामिक मिलिटेंट ग्रुप हैं अलकायदा से लेकर ISIS तक किसी ने कभी भी इजरायल पर हमला नहीं किया है. जो भी धार्मिक ग्रुप रहे हैं जैसे पाकिस्तान और बांग्लादेश में जमात ए इस्लामी है उसने भी कभी भी फलिस्तीन को कोई सपोर्ट नहीं किया. किसी भी अरब देश ने कभी खुलकर फिलिस्तीन की हिमायत नहीं की.
मुझे नहीं लगता है कि इस हालत में कोई भी देश इस युद्ध में खुलकर सामने आएंगे. इन देशों की कोशिश होगी कि वो किस तरह से इस युद्ध से अपने आपको बचाएंगे. इन देशों को अपने तेल के व्यापार पर भी खतरा दिख रहा है. जंग से हम किसी भी नतीजे पर नहीं पहुंच सकते हैं. अमेरिका और इजरायल के पास बहुत अधिक ताकत है, लेकिन क्या वो मिसाइल हमले को रोक पाए?
जंग से समस्या का समाधान संभव नहीं है, बातचीत ही एकमात्र रास्ता है. हालांकि अमेरिका और इजरायल को लेकर भी अरब के लोगों में कोई सहानुभूति नहीं है. डर इस बात की है कि अगर यह जंग बहुत दिनों तक चलती है तो फिलिस्तीन को लेकर अरब की जनता में आक्रोश बढ़ न जाए.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं