- सीजफायर के बावजूद हॉर्मुज से होकर आवाजाही बेहद कम, सिर्फ 8 से 11 जहाज गुजरे.
- 800 से 1400 जहाज अब भी फंसे, कंपनियां नया जोखिम नहीं ले रहीं.
- टोल, प्रतिबंध, माइंस और सुरक्षा खतरे ने वैश्विक व्यापार को अनिश्चितता में डाला.
मिडिल-ईस्ट में पिछले पांच हफ्तों से ईरान के साथ इजरायल और अमेरिका के चल रहे टकराव ने वैश्विक व्यापार की धुरी कहे जाने वाले हॉर्मुज स्ट्रेट को संकट के केंद्र में ला दिया. यहां से दुनिया भर में सप्लाई किए जाने वाले तेल का हर पांचवां हिस्सा, गैस, जरूरी केमिकल्स और अन्य वस्तुएं गुजरती हैं. माइक्रोचिप से लेकर दवाइयों और खाद तक की सप्लाई इस एक पतले समुद्री रास्ते पर बहुत हद तक निर्भर है.
बीते मंगलवार को अमेरिका की तरफ से हो हफ्ते के लिए सीजफायर का एलान किया गया तो उसमें स्पष्ट तौर पर यह कहा गया कि हॉर्मुज से होकर जहाजों को गुजरने के लिए सुरक्षित रास्ता मिलेगा. लेकिन बीते तीन दिनों के दरम्यान ग्राउंड पर स्थिति इसके उलट नजर आ रही है.
हॉर्मुज पर अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के अपडेट
अंतरराष्ट्रीय मीडिया एजेंसियां और संस्थान लगातार इस संकट को कवर कर रही हैं. और फिर BBC, AFP, The Guardian, Wall Street Journal हो या अन्य मीडिया संस्थान, लगभग एक जैसी तस्वीरें ही सामने आ रही हैं.
हॉर्मुज पर ताजा हालात को लेकर बीबीसी ने जो जानकारी दी है उसके मुताबिक जहाजों को अब भी ऐसे संदेश मिल रहे हैं कि बिना अनुमति हॉर्मुज स्ट्रेट को पार करने पर उन्हें निशाना बनाया जा सकता है. यही कारण है कि कई शिपिंग कंपनियां अब भी इंजतार की स्थिति में हैं.
हॉर्मुज से जुड़े ताजा आंकड़े बताते हैं कि वहां सीजफायर के बाद भी जहाजों की आवाजाही को लेकर हालात सामान्य नहीं हुए हैं. बीते दिन केवल 8 से 11 जहाज ही हॉर्मुज से गुजर सके हैं. इसमें 3 ऑयल टैंकर, 1 कंटेनर शिप और बाकी बल्क कैरियर हैं. जबकि इस संघर्ष के शुरू होने से पहले हॉर्मुज से औसतन 130 से 140 जहाज गुजरते थे. मैरिन ट्रैफिक के डेटा के आधार पर ये आंकड़े सामने आए हैं, इसकी BBC ने भी पुष्टि की है. यहां शिपिंग एनालिस्ट लॉर्स जेन्सन ने बताया कि कंपनियां अभी स्पष्ट गाइडलाइन का इंतजार कर रही हैं.

क्या ईरान के नियंत्रण में है हॉर्मुज?
Wall Street Journal और अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट्स के मुताबिक इस समय हॉर्मुज पर ईरान का प्रभाव साफ दिख रहा है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स Islamic Revolutionary Guard Corps की भूमिका यहां सबसे अहम मानी जा रही है. इन रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि कई जहाजों को गुजरने के लिए अनुमति लेनी पड़ रही है और कुछ मामलों में सिर्फ वही जहाज आगे बढ़ पाए हैं जिनका कार्गो ईरान से जुड़ा है.
एक और बड़ा बदलाव यह देखा गया है कि जो जहाज पहले हॉर्मुज के बीच से गुजरा करते थे अब वो ईरान के तट के पास नॉर्थ का रास्ता ले रहे हैं. यानी जहाज सुरक्षा के लिहाज से अपनी रणनीति बदल रहे हैं.

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800 से 1400 जहाज फंसे
ये आंकड़े बताते हैं कि सीजफायर के बाद हॉर्मुज से जहाज धीमी रफ्तार से तो गुजर ही रहे हैं, आगे अनिश्चितता भी बनी हुई है. इस वक्त वहां करीब 800 जहाज अभी भी फंसे हुए हैं. वहीं कुछ अन्य रिपोर्ट्स के मुताबिक यह संख्या 1000 से 1400 तक हो सकती है. मार्केटवाच और द गार्जियन जैसे समाचारों ने भी इस बड़े जाम की पुष्टि की है. यह बताया गया है कि इनमें से अधिकांश जहाज पर पूरी तरह माल लदे हुए हैं. ऐसे में इन्हें पहले हॉर्मुज से बाहर निकालने की प्राथमिकता होगी.

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जहाजों को क्या है जोखिम?
शिप मालिकों का प्रतिनिधित्व करने वाले सबसे बड़े अंतरराष्ट्रीय शिपिंग संघों में से एक बाल्टिक ऐंड इंटरनैशनल मैरिटाइम काउंसिल के समुद्री सुरक्षा प्रमुख जैकब लारसेन ने सीएनन से कहा कि सीजफायर केवल दो हफ्ते के लिए है इसलिए नए जहाज इस इलाके में आने से बच रहे हैं. वे कहते हैं कि कंपनियों को डर है कि अगर सीजफायर खत्म हुआ तो वे भी फंस सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ जहाज ओमान का रास्ता भी चुन रहे हैं.
समुद्र में माइंस का खतरा
इंटरनैशनल चेंबर ऑफ शिपिंग ने चेतावनी दी है कि समुद्र में माइंस का खतरा भी बना हुआ है. शिपिंग इंडस्ट्री इसे गंभीर खतरे के रूप में देख रही है. ऐसा मानना है कि जब तक यह साफ नहीं हो जाता कि रास्ता पूरी तरह सुरक्षित है, जहाजों की आवाजाही सामान्य नहीं होगी.

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टोल वसूली का विवाद
एक और बड़ा मुद्दा तेजी से उभर रहा है. अंतरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी की रिपोर्ट बताती है कि ईरान हॉर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से टोल वसूलने की बात कर रहा है, पर यहां मामला और भी उलझ जाता है.
जहाजों को टोल देना सुरक्षा पाने के लिए जरूरी हो सकता है. लेकिन यह अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन भी हो सकता है. जानकारों का कहना है कि ऐसे में अगर भुगतान किसी प्रतिबंधित संस्था या कंपनी को किया जाता है तो उस पर कार्रवाई हो सकती है.
अमेरिकी राष्ट्रपति ईरान के टोल वसूलने वाली बात पर 7 अप्रैल 2026 (मंगलवार) को ही अपने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बोले थे कि "क्यों न हम टोल वसूलें? मैं यह करना पसंद करूंगा बजाय कि उन्हें टोल मिले. हमें टोल क्यों नहीं वसूलना चाहिए? हम विजेता हैं. हमने जीत हासिल की है." हालांकि उन्होंने इस पर स्पष्ट नहीं किया था कि अमेरिका हॉर्मुज में टोल वसूलेगा या नहीं.
तेल की कीमतों में हलचल
सीजफायर की खबर के बाद तेल की कीमतों में गिरावट आई थी लेकिन अब दाम फिर बढ़ने लगे हैं क्योंकि बाजार को भरोसा नहीं है कि यह शांति टिके रहेगी. ऐसे में आने वाले दिन बेहद अहम होंगे. अगर स्पष्ट नियम, सुरक्षा गारंटी और राजनीतिक स्थिरता मिलती है, तो ट्रैफिक धीरे-धीरे बढ़ सकता है.
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