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भारत के कानून पर अमेरिका में क्यों मचा हंगामा? ट्रंप के सांसद बोले- यह चर्च, ईसाइयों पर सीधा हमला

आखिर भारत के संसद में विदेशी चंदा लेने वाले NGO, ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों से जुड़े कानून यानी FCRA में क्या बदलाव करने की तैयारी है? यहां आसान शब्दों में जानिए.

भारत के कानून पर अमेरिका में क्यों मचा हंगामा? ट्रंप के सांसद बोले- यह चर्च, ईसाइयों पर सीधा हमला
US वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने उठाया सवाल (फोटो- AFP)
  • ट्रंप की पार्टी के सांसद ने भारत में विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून में प्रस्तावित बदलावों पर चिंता जताई है
  • राइली मूर ने इसे ईसाइयों पर हमला बताते हुए कह दिया कि बदलावों का असर भारत और अमेरिका के रिश्तों पर पड़ सकता है
  • राइली मूर अमेरिका के वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद हैं और वह पहली बार सांसद बने हैं

कानून भारत में बन रहा है और मिर्ची अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की पार्टी के सांसद को लग रही है. अमेरिका के इस सांसद ने मंगलवार, 4 अगस्त को भारत में विदेशी फंडिंग से जुड़े कानून में प्रस्तावित बदलावों पर चिंता जताई. उन्होंने तो इसे ईसाइयों पर हमला बताते हुए कह दिया कि इन बदलावों का असर भारत और अमेरिका के रिश्तों पर पड़ सकता है. इस अमेरिकी सांसद का नाम राइली मूर है.

राइली मूर ने कहा कि विदेशी चंदा लेने वाले NGO, ट्रस्ट, शैक्षणिक संस्थानों और धार्मिक संगठनों से जुड़े कानून, यानी FCRA (फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट), में किए जा रहे बदलावों से भारतीय सरकार को चर्चों और धार्मिक संस्थाओं का नियंत्रण अपने हाथ में लेने का अधिकार मिल सकता है. उन्होंने इसे ईसाइयों पर सीधा हमला बताया.

वेस्ट वर्जीनिया से रिपब्लिकन पार्टी के सांसद राइली मूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "ईसा मसीह के पुनर्जीवित होने के कुछ दशक बाद ही संत थॉमस भारत के मालाबार तट पर पहुंचे थे. तभी से भारत में ईसाई समुदाय मौजूद है. लेकिन इतने लंबे इतिहास के बावजूद भारत की संसद FCRA नियमों में बदलाव पर विचार कर रही है, जिससे सरकार चर्चों और धार्मिक चैरिटी संस्थाओं का कंट्रोल अपने हाथ में ले सकेगी."

उन्होंने आगे कहा कि यह ईसाइयों के खिलाफ साफ हमला है. अगर यह बिल इसी रूप में आगे बढ़ता है, तो यह भारत और अमेरिका के द्विपक्षीय संबंधों के लिए बड़ी चिंता का विषय होगा. बता दें कि राइली मूर पहली बार सांसद बने हैं.

भारत सरकार क्या बदलाव करने जा रही है?

फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट बिल, 2026 के तहत सरकार को एक डिजिग्नेटेड अथॉरिटी यानी विशेष प्राधिकरण बनाने का अधिकार मिलेगा. अगर किसी संगठन का FCRA रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, वह खुद उसे वापस कर देता है, या समय पर रिन्यू नहीं होने की वजह से खत्म हो जाता है, तो यह प्राधिकरण उस संगठन के विदेशी फंड और उससे बनाई गई संपत्तियों का मैनेजमेंट संभाल सकेगा.

पीटीआई की रिपोर्ट के अनुसार बिल में यह भी कहा गया है कि अगर ऐसी संपत्ति किसी धार्मिक स्थल, जैसे मंदिर, मस्जिद या चर्च, से जुड़ी है, तो उसका धार्मिक स्वरूप बनाए रखना इस प्राधिकरण की जिम्मेदारी होगी. प्रस्तावित कानून में नियमों के उल्लंघन पर अधिकतम सजा भी कम करने का प्रावधान है. अभी इसके लिए पांच साल तक की जेल हो सकती है, लेकिन नए बिल में इसे घटाकर एक साल करने का प्रस्ताव है. गृह मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, 2019 से 2022 के बीच 13,520 संगठनों को विदेशों से 55,741 करोड़ रुपये की फंडिंग मिली थी.

FCRA पोर्टल के अनुसार, 15 जुलाई 2026 तक 14,449 संगठनों के FCRA सर्टिफिकेट एक्टिव थे. वहीं, 22,498 सर्टिफिकेट रद्द किए जा चुके हैं और 15,212 सर्टिफिकेट की अवधि खत्म हो चुकी है.

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