- होर्मुज को खोलने के लिए ब्रिटेन की अगुवाई में 30 से अधिक देशों की सैन्य बैठक लंदन में होगी.
- यह जलडमरूमध्य विश्व की बड़े हिस्से की तेल और गैस आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है.
- लंदन बैठक में सैन्य क्षमताओं, कमांड नियंत्रण और बल तैनाती की रणनीति जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा की जाएगी.
दुनिया के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री मार्गों में शामिल होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा सुरक्षित और सुचारू रूप से खोलने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हलचल तेज हो गई है. इसी कड़ी में 30 से अधिक देशों के सैन्य योजनाकार आज से लंदन में दो दिवसीय अहम बैठक कर रहे हैं. बैठक का नेतृत्व ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय की ओर से किया जा रहा है.
ब्रिटिश सरकार के अनुसार, इस बैठक का मकसद होर्मुज़ जलडमरूमध्य में जहाज़रानी की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए ठोस सैन्य योजना तैयार करना है. यह वही मार्ग है, जहां से दुनिया के बड़े हिस्से की तेल और गैस आपूर्ति गुजरती है और हाल के महीनों में यहां तनाव लगातार बढ़ा है.
50 से ज्यादा देशों की वर्चुअल बैठक हो चुकी
रायटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, कुछ दिन पहले यूरोप, एशिया और मध्य‑पूर्व के करीब 50 देशों ने इस मुद्दे पर एक वर्चुअल बैठक में हिस्सा लिया था, जिसमें भारत भी शामिल था. इस बैठक को अमेरिका को एक राजनीतिक संदेश के तौर पर भी देखा गया, खासतौर पर तब जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उन्हें सहयोगी देशों की मदद की जरूरत नहीं है.
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ब्रिटेन‑फ्रांस के नेतृत्व में मिशन
पिछले हफ्ते एक दर्जन से ज्यादा देशों ने यह सहमति जताई थी कि हालात अनुकूल होने पर वे ब्रिटेन और फ्रांस के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय मिशन में शामिल होने को तैयार हैं. इस मिशन का उद्देश्य होर्मुज में जहाजों की सुरक्षा करना है.
ब्रिटेन के रक्षा मंत्री जॉन हीली ने कहा, 'आज और कल का काम कूटनीतिक सहमति को एक साझा सैन्य योजना में बदलना है, ताकि जलडमरूमध्य में नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके और एक स्थायी युद्धविराम का समर्थन किया जा सके.' उन्होंने भरोसा जताया कि अगले दो दिनों में ठोस प्रगति देखने को मिलेगी.
किन मुद्दों पर होगी चर्चा
अधिकारियों के मुताबिक, लंदन बैठक में सैन्य क्षमताओं (Military Capabilities), कमांड एंड कंट्रोल ढांचे, क्षेत्र में बलों की तैनाती की रणनीति जैसे अहम मुद्दों पर चर्चा होगी. यह मिशन तभी सक्रिय किया जाएगा, जब क्षेत्र में एक टिकाऊ युद्धविराम लागू होगा.
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बड़ा सवाल: क्या ईरान मानेगा?
होर्मुज़ जलडमरूमध्य ईरान के बेहद करीब स्थित है और वहां उसकी भूमिका निर्णायक मानी जाती है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय समुदाय की इस पहल पर अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ईरान इस योजना को स्वीकार करेगा, या फिर तनाव बना रहेगा.
लंदन में हो रही यह बैठक सिर्फ सैन्य रणनीति नहीं, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा और भूराजनीतिक संतुलन से जुड़ा बड़ा कदम मानी जा रही है. आने वाले दिनों में यह स्पष्ट होगा कि कूटनीतिक सहमति जमीनी हकीकत में बदल पाती है या नहीं.
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