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This Article is From Sep 15, 2016

भारत में रियल एस्टेट में ट्रंप के निवेश से अमेरिकी विदेश नीति प्रभावित होगी: रिपोर्ट

भारत में रियल एस्टेट में ट्रंप के निवेश से अमेरिकी विदेश नीति प्रभावित होगी: रिपोर्ट
डोनाल्ड ट्रंप (फाइल फोटो)
वाशिंगटन: अमेरिका में अगर राष्ट्रपति पद के रिपब्लिकन उम्मीदवार डोनाल्ड ट्रंप चुनाव जीतते हैं और व्हाइट हाउस में दाखिल होते हैं तो भारत सहित दुनिया के कई देशों के रियल एस्टेट क्षेत्र में उनका निवेश अमेरिकी विदेश नीति को प्रभावित कर सकता है. एक प्रमुख अमेरिकी साप्ताहिक पत्रिका में यह दावा किया गया है.

पत्रिका 'न्यूजवीक' ने विदेशों में प्रापर्टी के क्षेत्र में निवेश पर कवर स्टोरी प्रकाशित की है. इसमें कहा गया है कि जुलाई महीने में जब रिपब्लिकन पार्टी का नेशनल कन्वेंशन चल रहा था तो उस समय 'ट्रंप ऑर्गनाइजेशन' ने एलान किया था कि वह भारत में बड़े पैमाने पर निवेश की योजना बना रहा है.

साप्ताहिक ने कहा, "यह इस बात का स्पष्ट उदाहरण है कि ट्रंप के राष्ट्रपति बनने की स्थिति में हितों का टकराव हो सकता है." उसने सवाल किया, "अगर वह भारत के साथ सख्ती से पेश आते हैं तो क्या सरकार यह समझेगी कि उसे परियोजनाओं को हरी झंडी देनी है और पुणे में ट्रंप के साझेदारों से संबंधित जांच को खत्म करना है? और अगर ट्रंप पाकिस्तान को लेकर कड़ा रूख अख्तियार करते हैं तो क्या यह अमेरिका के रणनीतिक हितों के लिए होगा या फिर भारत सरकार के उन अधिकारियों को खुश करने के लिए होगा जो ट्रंप टॉवर पुणे से होने वाले उनके लाभ को नुकसान पहुंचा सकते हैं?"

अमेरिकी पत्रिका 'न्यूजवीक' के अनुसार पुणे और गुड़गांव में रियल एस्टेट में ट्रंप के निवेश के परिणामस्वरूप भाजपा और कांग्रेस सहित विभिन्न दलों के राजनीतिज्ञों ने ट्रंप के परिवार के साथ निकट संबंध स्थापित कर लिए हैं. इस खबर के अनुसार ट्रंप ने साल 2011 में रोहन लाइफस्केप्स नामक एक भारतीय रियल एस्टेट डेवलपर के साथ समझौते पर हस्ताक्षर किया था और यह भारतीय कंपनी 65 मंजिला इमारत बनाना चाहती थी. बाद में इसी कंपनी के निदेशक कल्पेश मेहता भारत में ट्रंप के व्यवसायों के प्रतिनिधि बन गए.

पत्रिका के अनुसार सरकारी नियामक ने ट्रंप और भारतीय कंपनी की इस परियोजना पर जल्द रोक लगा दी तथा ट्रंप जूनियर भारत गए और महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण से ये रुकावटें खत्म करने का आग्रह किया. परंतु चव्हाण ने ट्रंप ऑर्गनाइजेशन को रियायत देने से इनकार कर दिया.

इस साप्ताहिक ने कहा, "किसी विदेशी नेता के लिए उस समय ऐसा फैसला "चव्हाण की तरह" करना बहुत मुश्किल होगा अगर वह अमेरिकी राष्ट्रपति के बेटे से बात कर रहा होगा." पत्रिका की कवर स्टोरी में कहा गया, "पिछले महीने ट्रंप टॉवर्स पुणे नामक इस प्रोजेक्ट को लेकर एक मामला उस वक्त खड़ा हो गया जब राज्य सरकार और स्थानीय पुलिस ने भूमि रिकॉर्ड में खामियों की जांच शुरू कर दी. पता चला कि जिस जमीन पर इमारत बनी है कि उसे पंचशील द्वारा कानूनी ढंग से नहीं लिया गया है." भारतीय कंपनी का कहना है कि कोई कानून नहीं तोड़ा गया है.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

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