
अमेरिका में साल 2011 में जब मीरा शंकर राजदूत के पद से विदा होकर स्वदेश लौटीं तो इससे एक दिन पहले उनकी घरेलू सहायिका उनका घर छोड़कर चली गई और फिर लौटी नहीं।
भारतीय दूतावास ने इस मामले को मीडिया की नजरों से छिपा लिया। माना जा रहा है कि इस संदर्भ में पुलिस और विदेश विभाग के पास औपचारिक शिकायत दर्ज कराई गई तथा घरेलू सहायिका के आधिकारिक पासपोर्ट को रद्द कर दिया गया।
मीरा शंकर के दो साल से अधिक समय के कार्यकाल के दौरान उनकी सेवा करने वाली इस घरेलू सहायिका के बारे में अभी तक कोई जानकारी नहीं है। माना जा रहा है कि वह अमेरिका में गैर-कानूनी ढंग से रह रही है।
यह कोई पहली घरेलू सहायिका नहीं थी जिसने किसी भारतीय राजनयिक का घर छोड़ा। इससे पहले भी घरेलू सहायिकाएं पिछले कुछ वर्षों में वरिष्ठ भारतीय राजनयिकों के घरों को छोड़कर गईं।
इस तरह की घटनाओं को नजदीक से देखने वाले सूत्रों ने बताया कि वाशिंगटन स्थित भारतीय दूतावास से जुड़ी घरेलू सहायिकाओं के राजनयिकों का घर छोड़कर जाने वालों की बात करें तो बीते एक दशक में यह संख्या एक दर्जन से अधिक है।
अमेरिका में सिर्फ घरेलू सहायिकाएं ही नहीं, बल्कि भारत से लाए गए भारतीय सुरक्षा गार्डों के बारे में भी माना जा रहा है कि वे भी संबंधित राजनयिकों के पास से चले गए। इनमें से ज्यादातर अपने कार्यकाल के आखिर में छोड़कर गए। भारतीय दूतावास से जुड़ी घरेलू सहायिकाओं को यहां 'इंडिया बेस्ड डोमेस्टिक असिस्टेंट' (आईबीडीए) कहा जाता है।
भारतीय दूतावास ने पीटीआई की ओर से पूछे गए इस सवाल का कोई जवाब नहीं दिया कि फिलहाल उसके राजनयिकों के पास कितनी आईबीडीए हैं।
वाशिंगटन में दूतावास के अलवा न्यूयॉर्क, सैन फ्रांसिस्को, ह्यूस्टन, अटलांटा और शिकागो में भारत का वाणिज्य दूतावास है।
अमेरिका में भारतीय दूतावासों-वाणिज्य दूतावासों से जुड़े सूत्रों ने कहा कि हाल फिलहाल में घरेलू सहायिकाओं से जुड़े तीन मामले प्रकाश में आए। ये तीनों मामले न्यूयॉर्क स्थित वाणिज्य दूतावास से जुड़े थे। इनमें भारतीय राजनयिक देवयानी खोबरागड़े का मामला भी शामिल है।
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