विज्ञापन

म्यांमार में मिन आंग ह्लाइंग के राष्ट्रपति बनने पर छ‍िड़ी बहस, सिविलियन लोकतंत्र या सैन्य शासन?

सोए विन जैसे पुराने और मजबूत नेता जनरल के लिए चुनौती बन सकते थे, जबकि नए अधिकारी उन पर ज्यादा निर्भर और वफादार माने जाते हैं. मिन आंग ह्लाइंग धीरे-धीरे सेना में ऊपर बढ़ते गए और 2010 में जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ बने. माना जाता है कि उनकी वफादारी ने उन्हें शीर्ष तक पहुंचाया.

म्यांमार में मिन आंग ह्लाइंग के राष्ट्रपति बनने पर छ‍िड़ी बहस, सिविलियन लोकतंत्र या सैन्य शासन?
म्यांमार को लोग जनरल मिन आंग ह्लाइंग शासन को उत्सुकता के साथ देख रहे हैं.
  • म्यांमार के नए राष्ट्रपति जनरल मिन आंग ह्लाइंग की नियुक्ति के बाद सेना की पकड़ मजबूत होने का संकेत मिल रहा है
  • फरवरी 2021 में सेना ने तख्तापलट कर लोकतांत्रिक सरकार को भंग कर दिया और कई नेताओं को गिरफ्तार किया था
  • दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में चुनाव हुए लेकिन वे सेना के शासन को औपचारिक रूप देने तक सीमित रहे
क्या हमारी AI समरी आपके लिए उपयोगी रही?
हमें बताएं।

म्यांमार की राजनीति में जनरल मिन आंग ह्लाइंग को देश के नए राष्ट्रपति बनाए जाने के बाद बहस छिड़ गई है. राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि क्या यह 'नागरिक शासन' की ओर एक बदलाव है या फिर यह म्यांमार की सेना (जुंटा) शासन की यथास्थिति पहले की तरह जारी रहने वाली है. कुछ लोग जनरल के सैन्य अनुभव और देश में सुधार की जरूरत की बात करते हैं, लेकिन असलियत यह दिखाती है कि सेना की पकड़ और मजबूत हो रही है.

सिविलियन लोकतंत्र की वापसी?

राजधानी की एक सेना-समर्थक वेबसाइट ने इस बदलाव को “सिविलियन लोकतंत्र की वापसी” बताया, जिससे बहस और तेज हो गई. आलोचकों ने पुराने ऐसे कई उदाहरण सामने रखे हैं, जिनमें जनरल के समय में दमन और सख्ती देखी गई. एक प्रमुख पोर्टल, 'ग्लोबल एशिया फोरम,' की रिपोर्ट के अनुसार, दिसंबर 2025 और जनवरी 2026 में तीन चरणों में चुनाव हुए, लेकिन रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे सिर्फ सेना के शासन को ही औपचारिक रूप दिया गया.

रिपोर्ट के अनुसार, फरवरी 2021 में सेना ने तख्तापलट कर सत्ता पर कब्जा कर लिया था. चुनी हुई संसद को भंग कर दिया गया, सांसदों और नेताओं (राष्ट्रपति विन म्यिंट और आंग सान सू ची भी शामिल थे) को गिरफ्तार कर लिया गया. इसके बाद विरोध करने वाले लोगों पर कड़ी कार्रवाई की गई.इसके अलावा सभी लोकतांत्रिक पार्टियों को खत्म कर दिया गया और संसद की एक-चौथाई सीटें सेना के लिए रिजर्व कर दी गईं. 

80 प्रतिशत मंत्री अधिकारी या रिटायर्ड अधिकारी

विश्लेषकों के अनुसार, 80 प्रतिशत से अधिक केंद्रीय मंत्री कथित तौर पर या तो सेवारत अधिकारी हैं या फिर सेवानिवृत्त सैन्यकर्मी हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि नए राष्ट्रपति ने अपने संभावित विरोधियों को हटाकर अपने भरोसेमंद लोगों को आगे बढ़ाया है. उनके पहले डिप्टी जनरल रहे सोए विन की जगह अब जनरल ये विन ऊ को लाया गया है, जो पहले मिलिट्री सिक्योरिटी में थे और जिन्हें जनरल का बेहद करीबी माना जाता है.

एक विश्लेषक के मुताबिक, सोए विन जैसे पुराने और मजबूत नेता जनरल के लिए चुनौती बन सकते थे, जबकि नए अधिकारी उन पर ज्यादा निर्भर और वफादार माने जाते हैं. बीबीसी की एक जीवनी के अनुसार, मिन आंग ह्लाइंग धीरे-धीरे सेना में ऊपर बढ़ते गए और 2010 में जॉइंट चीफ ऑफ स्टाफ बने. माना जाता है कि उनकी वफादारी ने उन्हें शीर्ष तक पहुंचाया. आज जब वे राष्ट्रपति बने हैं, तब म्यांमार गंभीर आर्थिक संकट से जूझ रहा है, जो अंतरराष्ट्रीय हालात और लंबे समय से खराब प्रबंधन की वजह से और बढ़ गया है. अब यह देखना बाकी है कि वे इन चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और अपने पद पर कितने समय तक टिक पाते हैं.

ये भी पढ़ें-

तो अब तुर्किए और इजरायल में छिड़ेगी जंग, एर्दोगन ने नेतन्याहू को आक्रमण करने की दे दी धमकी

ईरान युद्ध में यूरोप क्या हो गया अलग-थलग? जानिए क्यों आगे होगी बहुत ज्यादा मुश्किल

डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान-अमेरिका शांति वार्ता की बताई एक-एक बात, आगे का प्लान भी बताया

रूस ने की ईरान-अमेरिका के बीच मध्यस्थता की पेशकश, पुतिन ने पेजेश्कियन से की बात

पाक ने की मदद, US को नापसंद... क्या है ईरान का वो परमाणु कार्यक्रम जिस पर बातचीत रही बेनतीजा; अब आगे क्या?

क्या गल्फ में बन रहा नया अलायंस, ईरान युद्ध में पाकिस्तान के मध्यस्थ बनने की कहीं ये वजह तो नहीं?

जर्मन रिसर्च टीम को मिला एक नया द्वीप, किसका होगा मालिकाना हक, समुद्र में द्वीप कैसे बनते हैं?

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com