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बांग्लादेश पहुंचे चीनी नौसेना के जहाज, आखिर बीजिंग के इतने नजदीक क्यों जा रहा ढाका?

यूनुस के काल में बांग्लादेश में पाकिस्तान का दखल काफी बढ़ गया था, लेकिन अब बांग्लादेश की सरकार पाकिस्तान से एक दूरी बनाकर चल रही है.

बांग्लादेश में चीन के तीन जहाज पहुंचे हैं.
  • चीनी नौसेना के तीन जहाज बांग्लादेश के चट्टोग्राम बंदरगाह पर पांच दिन की सद्भावना यात्रा पर पहुंचे थे
  • बांग्लादेश नौसेना ने चीनी जहाजों का स्वागत किया और दोनों देशों के नौसैनिक संबंध मजबूत करने की उम्मीद जताई
  • बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने अपनी पहली विदेश यात्रा भारत के बजाय मलेशिया से शुरू की थी

चीनी नौसेना के जहाज टैंग शान, दा किंग और ताई हू बांग्लादेश की पांच दिन की सद्भावना यात्रा पर चट्टोग्राम बंदरगाह पहुंचे. बांग्लादेश नौसेना ने इन जहाजों और उनके कर्मियों का गर्मजोशी से स्वागत किया. साथ ही उम्मीद जताई है कि इस सद्भावना यात्रा से दोनों नौसेनाओं के बीच आपसी सहयोग, पेशेवर संबंध और दोस्ताना रिश्ते और मजबूत होंगे.

तारिक रहमान ने पीएम बनते ही दिए संकेत

बांग्लादेश दरअसल अब कई मोर्चों पर संबंध बना रहा है. यही कारण है कि बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान अपनी पहली विदेश यात्रा भारत में न करके मलेशिया पहुंच गए. हालांकि, उन्होंने चीन को भी नहीं चुना, क्योंकि इससे वो भारत को एकदम से भारत को नाराज भी नहीं करना चाहते थे. कुआलालंपुर में उन्होंने मलेशियाई पीएम अनवर इब्राहिम से द्विपक्षीय व्यापार, निवेश और विशेष रूप से बांग्लादेशी प्रवासी श्रमिकों के लिए श्रम बाजार को फिर से खोलने पर गहन चर्चा की.

यहीं से वो चीन पहुंच गए. इस दौरे में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो मुख्य रूप से बुनियादी ढांचे के वित्तपोषण (जैसे तीस्ता नदी परियोजना), व्यापार और निवेश पर केंद्रित थे. इस यात्रा का साफ संकेत था कि बांग्लादेश अब भारत और चीन दोनों को मैनेज करके चलना चाहता है.

भारत को क्या बताना चाहता है बांग्लादेश

भले ही वो अब तक भारत नहीं आए हैं, मगर दोनों देशों के बीच कई स्तरों पर लगातार वार्ता चल रही है. इससे पहले यूनुस के काल में बांग्लादेश में पाकिस्तान का दखल काफी बढ़ गया था, लेकिन अब बांग्लादेश की सरकार पाकिस्तान से एक दूरी बनाकर चल रही है. ऐसे में चीनी नौसेना के जहाजों का आना इस बात का संकेत देता है कि बांग्लादेश अब चीन के साथ ज्यादा संबंध बढ़ाने के रास्ते पर बढ़ रहा है. वहीं इसके जरिए भारत पर भी दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है. वहीं भारत लगातार बांग्लादेश से रिश्ते सुधारने की कोशिश तो कर रहा है, लेकिन वो किसी दबाव में फैसले लेने का इच्छुक भी नहीं दिख रहा.

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