
- अमेरिका के टैरिफ बम ने भारत और चीन के बीच रिश्तों में सुधार और नजदीकी लाने का महत्वपूर्ण योगदान किया है.
- राष्ट्रपति जिनपिंग ने द्रौपदी मुर्मू को सीक्रेट चिट्ठी भेजकर दोनों देशों के बीच संबंध सुधारने की पहल की थी.
- चीन ने अमेरिका के समझौतों पर चिंता जताते हुए भारत से संबंध मजबूत करने के लिए कदम उठाए हैं.
अमेरिका के टैरिफ बम ने भारत और चीन को और नजदीक (India-China Relatons) लाने का काम किया है. दोनों देशों की दूरियां अब घटने लगी हैं और रिश्तों में लगातार सुधार हो रहा है. दोनों के बीच अब गर्मजोशी देखने को मिल रही है. इसका बड़ा उदाहरण पीएम मोदी का जल्द होने वाला चीन का दौरा है. कुछ दिनों पहले चीनी विदेश मंत्री भारत आए थे और अब 7 साल बाद पीएम मोदी चीन जा रहे हैं. भले ही इसकी वजह ट्रंप का टैरिफ बम माना जा रहा हो लेकिन इसकी बड़ी वजह वह सीक्रेट चिट्ठी 9Xi Jinping Secret Letter) है, जिसे जिनपिंग ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को भेजा था.
ये भी पढे़ं- कोर्ट ने डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ को बताया गैरकानूनी, तिलमिलाए राष्ट्रपति बोले- 'बर्बाद कर देगा ये फैसला'
जिनपिंग की सीक्रेट चिट्ठी में क्या था?
ट्रंप की व्यापार नीतियों और टैरिफ बम के नेगेटिव प्रभाव को चीन भांप चुका था. जिसके बाद राष्ट्रपति जिनपिंग ने भारत से अपने रिश्ते और बेहतर करने की कोशिश शुरू की. उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक सीक्रेट लेटर भेजा था. इस लेटर में दोनों देशों के बीच संबंधों के सुधार पर जोर दिया गया. ये दावा ब्लूमबर्ग की एक रिपोर्ट में किया गया है. ये लेटर दोनों देशों के बीच रिश्तों की नई शुरुआत माना जा रहा है.
ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, एक भारतीय अधिकारी ने बताया कि चीन से आए जिनपिंग के पत्र में ट्रंप के भारत के साथ ऐसे समझौतों पर चिंता जताई गई, जिनसे बीजिंग के हितों को नुकसान हो सकता है. चिट्ठी में एक अधिकारी का भी जिक्र था, जिसे बीजिंग की पहल को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी दी गई थी. रिपोर्ट्स के मुताबिक, एक अधिकारी ने राष्ट्रपति मुर्मू को भेजे गए इस लेटर की खबर तुरंत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दी.
भारत-चीन संबंधों में सुधार की वजह जानिए
जिनपिंग के इस सीक्रेट लेटर के बाद बीजिंग ने एक बयान जारी किया था. जिसमें दोनों देशों के रिश्तों को मजबूत बताते हुए इसे 'ड्रैगन-हाथी का टैंगो' करार दिया गया. बता दें कि भारत-चीन संबंधों में सुधार उन दिनों तेज हुआ जब ट्रंप ने ट्रंप ने भारत-पाक संघर्ष में मध्यस्थता का दावा किया था. वहीं ट्रेड वार्ता भी बेअसर रही थी. इसके बाद से ही चीन और भारत के बीच सीमा विवाद सुलझाने की कोशिश और तेज हो गई. इसकी पहल सबसे पहले चीन की तरफ से की गई थी.
भारत का भी चीन से रिश्तों के सुधार पर जोर
रिपोर्ट के मुताबिक, मोदी सरकार ने जून में चीन के साथ संबंधों को गंभीरता से उस समय लेना शुरू किया, जब ट्रंप की टैरिफ संबंधी धमकियों और भारत-पाक सीजफायर के मध्यस्थता वाले उनके दावे पर बातचीत चल रही थी. ट्रंप के टैरिफ से आहत भारत और चीन दोनों ने 2020 के सीमा टकराव से आगे बढ़ने की कोशिशों में तेजी लाने पर सहमति जताई. दोनों ही देशों ने लंबे समय से चले आ रहे सीमा विवादों पर बातचीत को फिर से शुरू करने का भी वादा किया.
भारत-चीन संबंधों के बीच सुधार देखा भी जा रहा है. दोनों ही देशों के बीच बहुत जल्द सीधी फ्लाइट्स फिर से शुरू होने वाली हैं. बीजिंग ने भी भारत को यूरिया की आपूर्ति पर प्रतिबंधों में ढील दी है. वहीं नई दिल्ली ने सालों बाद चीनी नागरिकों के लिए टूरिस्ट वीजा फिर से खोल दिए हैं.
ट्रंप का ट्रेड वॉर भारत-चीन के बीच नई शुरुआत
भारत-चीन के बीच रिश्तों की नई शुरुआत ऐसे समय में की है जब अमेरिका ने ट्रेड वॉर शुरू किया. ट्रंप ने मार्च में, चीनी सामान पर टैरिफ दोगुना करने का ऐलान किया तब चीन के विदेश मंत्रालय ने भारत से "आधिपत्यवाद और सत्ता की राजनीति का विरोध" करने की अपील की थी. जिनपिंग ने खुद ऐलान किया था कि हाथी और ड्रैगन का एक साथ आना ही सही विकल्प होगा.
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं