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गेम चेंजर... चीन में कैसे एक ट्रेन की वजह से फलों की कीमत घट गई?

चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच 'लॉजिस्टिक्स' और 'एग्री-ट्रेड' (कृषि व्यापार) के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर कदम है. इस रेल नेटवर्क और कोल्ड-स्टोरेज तकनीक के मेल से कई बड़े आर्थिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं.

गेम चेंजर... चीन में कैसे एक ट्रेन की वजह से फलों की कीमत घट गई?
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  • चीन ने थाईलैंड, लाओस और युन्नान प्रांत को जोड़ने वाली तेज कनेक्टिविटी वाली रेल सेवा शुरू की है
  • यह रेल-टू-रोड नेटवर्क थाईलैंड से चीन के 30 से अधिक शहरों को 48 घंटे में ताजे फल उपलब्ध कराता है
  • इस सेवा से लाओस और थाईलैंड के किसानों को चीन के बाजार तक तेज और सीधे पहुंच का फायदा मिल रहा है
बीजिंग:

चीन ने थाईलैंड, लाओस और दक्षिण-पश्चिम चीन के युन्नान प्रांत को जोड़ने वाली एक रेल सेवा शुरू की है. इस लाइन की कनेक्टिविटी बहुत तेज है. सबसे खास बात इस पर चलने वाली ट्रेन में है. ये ट्रेनें कोल्ड स्टोरेज के तौर पर काम करतीं है, इससे फल खराब नहीं होते और जल्द से बाजार में पहुंच जाते हैं. नतीजा ये कि फलों की कीमतें बढ़ती नहीं हैं.

चीन-लाओस रेलवे के जरिए थाईलैंड से चीन तक फलों का परिवहन अब बहुत तेज गति से होता है. थाईलैंड के लाएम चबांग बंदरगाह से कुनमिंग (युन्नान प्रांत) तक फलों को पहुंचने में अब केवल 3 दिन लगते हैं. ट्रेन की बोगियों को विशेष रूप से डिजाइन किया गया है. इसमें 13 डिग्री तापमान पर फलों को ठंडा रखा जाता है, जिससे उसकी ताजगी बनी रहती है.

आमतौर पर रेल सेवाओं का उपयोग माल ढोने के लिए किया जाता है, लेकिन चीन-लाओस-थाईलैंड कॉरिडोर पर चलने वाली ये ट्रेनें आधुनिक कोल्ड-चेन तकनीक से लैस हैं. ये ट्रेनें एक 'मोबाइल कोल्ड स्टोरेज' की तरह काम करती हैं. यात्रा के दौरान डिब्बों का तापमान स्थिर रखा जाता है, जिससे थाईलैंड के मशहूर ड्यूरियन, मंगोस्टीन और लाओस के केले जैसे जल्दी खराब होने वाले फल हफ्तों तक ताजे बने रहते हैं.

इस लॉजिस्टिक के कारण फल सही समय में बाजारों तक पहुंच जाते हैं, जिससे उसके खराब होने की संभावना लगभग खत्म हो जाती है. इसकी वजह से चीन के बाजार में फलों की कीमत में लगभग 30% तक की कमी आई है.

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यह रेल-टू-रोड परिवहन थाईलैंड के बागानों से सीधे चीन के 30 से ज्यादा शहरों तक 48 घंटे के भीतर ताजे फल पहुंचाता है. इस साल ट्रेन के जरिए दो लाख टन से अधिक ट्रोपिकल फल पहुंचाए जाने की उम्मीद है.

थाईलैंड के ड्यूरियन और लाओस के केले जैसे फल जल्दी खराब हो जाते हैं, इसकी वजह से लंबी दूरी के व्यापार में मुश्किलें आती हैं. ऐसे में रेल रूट पर 'कोल्ड-चेन' डिब्बों का इस्तेमाल करने से समुद्री मार्ग के मुकाबले अब ये फल कुछ ही दिनों में चीन के बाजारों तक पहुंच रहे हैं.

यह कॉरिडोर सिर्फ चीन के लिए ही नहीं, बल्कि लाओस और थाईलैंड के किसानों के लिए भी वरदान है. लाओस एक 'लैंड-लॉक्ड' देश से अब 'लैंड-लिंक्ड' देश बन रहा है. इससे उसकी जीडीपी में भी कृषि निर्यात का हिस्सा बढ़ेगा. वहीं थाईलैंड के फल उत्पादकों के लिए भी दुनिया का सबसे बड़ा उपभोक्ता बाजार चीन अब एक एक्सप्रेस हाईवे की तरह उपलब्ध है.

थाईलैंड के कृषि मंत्रालय ने भी इस कदम की सराहना की है, क्योंकि उनके किसानों को अब दुनिया के सबसे बड़े बाजार यानी चीन तक सीधी और तेज पहुंच मिल गई है.

यह चीन और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच 'लॉजिस्टिक्स' और 'एग्री-ट्रेड' (कृषि व्यापार) के क्षेत्र में एक गेम-चेंजर कदम है. इस रेल नेटवर्क और कोल्ड-स्टोरेज तकनीक के मेल से कई बड़े आर्थिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं. यह रेल सेवा 'पैन-एशिया रेलवे नेटवर्क' का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है. यह दिखाता है कि भविष्य में व्यापार केवल सड़क या समुद्र पर निर्भर नहीं रहेगा, बल्कि हाई-स्पीड कार्गो ट्रेनें 'सप्लाई चेन' की नई रीढ़ बनेंगी.

तकनीक और बुनियादी ढांचे का यह मेल इस बात का सटीक उदाहरण है कि कैसे सही लॉजिस्टिक्स न केवल व्यापार को बढ़ाते हैं, बल्कि आम आदमी की रसोई तक पहुंचने वाली चीजों की गुणवत्ता और दाम को भी सही रखते हैं. यदि यह मॉडल सफल रहता है, तो आने वाले समय में पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया में खाद्यान्न सुरक्षा और कृषि व्यापार के लिए इसी तरह के 'स्मार्ट लॉजिस्टिक्स' का विस्तार किया जा सकता है.

लेखक के बारे में
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चंदन वत्स
Chief Sub Editor
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