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चीन में 'सुपर सोल्जर' बनाने की तैयारी? हार्वर्ड के पूर्व प्रोफेसर इंसानी दिमाग में चिप लगाने के मिशन पर जुटे

लिबर को कभी अमेरिका ने चीन के साथ गुप्त संबंधों के आरोप में सजा सुनाई थी. लिबर का मिशन इंसानी दिमाग में इलेक्ट्रॉनिक्स यानी चिप लगाना है. इस तकनीक को 'ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस' (BCI) कहा जाता है.

चीन में 'सुपर सोल्जर' बनाने की तैयारी? हार्वर्ड के पूर्व प्रोफेसर इंसानी दिमाग में चिप लगाने के मिशन पर जुटे
लिबर का मिशन इंसानी दिमाग में इलेक्ट्रॉनिक्स यानी चिप लगाना है.
Reuters

चीन ने भविष्य के युद्धों और चिकित्सा विज्ञान में अपनी बादशाहत कायम करने के लिए फिर से एक बड़ा दांव खेला है. हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के पूर्व प्रोफेसर और दुनिया के दिग्गज नैनो-साइंटिस्ट चार्ल्स लिबर अब चीन के शेनझेन में अपनी नई अत्याधुनिक लैब चला रहे हैं. चीन में रहकर लिबर इंसानी दिमाग में चिप लगाने का रिसर्च कर रहे हैं.

लिबर को कभी अमेरिका ने चीन के साथ गुप्त संबंधों के आरोप में सजा सुनाई थी. लिबर का मिशन इंसानी दिमाग में इलेक्ट्रॉनिक्स यानी चिप लगाना है. इस तकनीक को 'ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस' (BCI) कहा जाता है. इसका इस्तेमाल चिकित्सा के साथ-साथ 'सुपर सोल्जर' तैयार करने के लिए भी किया जा सकता है.

67 साल के चार्ल्स लिबर नैनोटेक्नोलॉजी और न्यूरोसाइंस के क्षेत्र में दुनिया के शीर्ष वैज्ञानिकों में गिने जाते हैं. 2011 में उन्हें दशक का सर्वश्रेष्ठ रसायनशास्त्री (Chemist) चुना गया था. अब वे चीन के सरकारी फंड से चलने वाले 'i-BRAIN' (इंस्टीट्यूट फॉर ब्रेन रिसर्च, एडवांस्ड इंटरफेस एंड न्यूरोटेक्नोलॉजीज) के संस्थापक निदेशक बन गए हैं.

अमेरिका में मिली सजा तो चीन ने मौके का उठाया फायदा

लिबर का इतिहास विवादों से भरा रहा है. रॉयटर्स के मुताबिक, दिसंबर 2021 में, एक अमेरिकी जूरी ने उन्हें चीनी सरकार के 'थाउजेंड टैलेंट्स प्रोग्राम' से भुगतान लेने के बारे में संघीय जांचकर्ताओं से झूठ बोलने का दोषी पाया था. उन पर टैक्स चोरी के भी आरोप लगे थे. 

सजा के तौर पर उन्होंने दो दिन जेल में बिताए और छह महीने घर में नजरबंद रहे. उस वक्त उनके वकीलों ने तर्क दिया था कि वे लाइलाज कैंसर (लिम्फोमा) से जूझ रहे हैं. लेकिन जैसे ही उनकी पाबंदियां खत्म हुईं, वे अपने सपनों को पूरा करने के लिए चीन चले गए.

चीन ने लिबर के लिए संसाधनों की कोई कमी नहीं छोड़ी है. हार्वर्ड में लिबर को जिन उपकरणों को साझा करना पड़ता था, शेनझेन में उनके पास अपनी खुद की डीप अल्ट्रावॉयलेट लिथोग्राफी मशीनें हैं. ये मशीनें अत्याधुनिक चिप बनाने के काम आती हैं. इसके अलावा, उनके पास 2,000 बंदरों (प्राइमेट्स) वाली एक विशाल रिसर्च फैसिलिटी तक सीधी पहुंच है. विशेषज्ञों का मानना है कि इंसानी दिमाग में चिप लगाने के परीक्षण से पहले बंदरों पर ट्रायल करना अनिवार्य होता है. 

'सुपर सोल्जर' बनाने के मिशन में चीन

हालांकि इस तकनीक का प्राथमिक मकसद पैरालिसिस या एएलएस (ALS) जैसी बीमारियों का इलाज करना है, लेकिन इसके सैन्य इस्तेमाल की संभावनाओं ने पेंटागन की चिंता बढ़ा दी है.

अमेरिकी रक्षा विभाग के अनुसार, चीन की पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के वैज्ञानिक ब्रेन इंटरफेस का इस्तेमाल 'सुपर सोल्जर' बनाने के लिए करना चाहते हैं. इसके जरिए सैनिकों की मानसिक फुर्ती, एकाग्रता और युद्ध के मैदान में स्थिति को समझने की क्षमता को कई गुना बढ़ाया जा सकता है.

चीन की इस रणनीति को 'मिलिट्री-सिविल फ्यूजन' कहा जाता है. ऐसे में नागरिक शोध का सीधा लाभ सेना को दिया जाता है. चीन ने मार्च 2026 में अपनी नई पंचवर्षीय योजना में 'ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस' को राष्ट्रीय प्राथमिकता घोषित किया है. चीनी अधिकारियों का मानना है कि आने वाले 10 वर्षों में यह तकनीक एक नया हाई-टेक सेक्टर खड़ा कर देगी. 

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