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PM कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा का बड़ा कदम, मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा पर एक्शन की तैयारी

2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर राणा की नागरिकता रद्द करने का कनाडाई सरकार का कदम कथित तौर पर उसके खिलाफ आतंकवाद के आरोपों पर आधारित नहीं है.

PM कार्नी की भारत यात्रा से पहले कनाडा का बड़ा कदम, मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा पर एक्शन की तैयारी
मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर राणा की कनाडा में नागरिकता रद्द हो सकती है
  • कनाडा ने 26/11 मुंबई हमले के आरोपी तहव्वुर हुसैन राणा की नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया शुरू की है- रिपोर्ट
  • तहव्वुर राणा पर नागरिकता आवेदन में गलत जानकारी देने का आरोप लगाया गया है, जो जांच में साबित हुआ है
  • राणा को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर गिरफ्तार किया गया था, वह मुंबई आतंकी हमलों के मुकदमे का इंतजार कर रहा है
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कनाडा सरकार ने 26/11 मुंबई आतंकी हमले के मुख्य साजिशकर्ता तहव्वुर हुसैन राणा की नागरिकता रद्द करने की प्रक्रिया कथित तौर पर शुरू कर दी है. यह कदम कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की 26 फरवरी को होने जा रही भारत यात्रा से पहले उठाया गया है. इससे पहले जस्टिन ट्रूडो सरकार के दौरान भारत-कनाडा संबंधों में तनाव आ गया था लेकिन अब नई कार्नी सरकार रिश्तों पर पटरी पर लाने की कोशिश में है.

पाकिस्तान में जन्मा राणा फिलहाल भारत की हिरासत में हैं और 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के मामले में मुकदमे का इंतजार कर रहा है. यह हमला पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा ने किया था, जिसमें 160 से ज्यादा लोग मारे गए थे.

कनाडा सरकार क्या करने जा रही है?

कनाडाई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इमिग्रेशन, रिफ्यूजीज एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) ने राणा को बताया है कि 2001 में मिली उसकी कनाडाई नागरिकता छीनी जा सकती है. 65 साल का तहव्वुर राणा 1997 में कनाडा गया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कनाडा की सरकार की तरफ से यह कार्रवाई आतंकवाद के आरोपों के कारण नहीं, बल्कि गलत जानकारी देने के कारण की जा रही है. IRCC के मुताबिक, राणा ने 2000 में नागरिकता के लिए आवेदन करते समय कनाडा में अपने रहने के बारे में गलत जानकारी दी थी.

रिपोर्ट के अनुसार, राणा ने दावा किया था कि वह चार साल तक ओटावा और टोरंटो में रहा और इस दौरान केवल छह दिन देश से बाहर था. लेकिन रॉयल कैनेडियन माउंटेड पुलिस (RCMP) की जांच में सामने आया कि वह ज्यादातर समय शिकागो में था, जहां उनके कई घर और व्यवसाय थे, जिनमें इमिग्रेशन कंसल्टेंसी और किराना दुकान शामिल थी. विभाग ने उस पर “गंभीर और जानबूझकर धोखा” देने का आरोप लगाया है. अधिकारियों का कहना है कि अगर सही जानकारी दी जाती, तो उसे कनाडा की नागरिकता नहीं मिलती.

31 मई 2024 के पत्र में IRCC ने राणा को बताया कि गलत जानकारी के कारण उसे नागरिकता दी गई, जबकि वो जरूरी शर्तों को पूरी नहीं करता था. अब यह मामला कनाडा की फेडरल कोर्ट में है, जो तय करेगी कि नागरिकता झूठ या धोखाधड़ी से ली गई थी या नहीं. राणा के वकीलों ने इस फैसले को गलत और उनके अधिकारों का उल्लंघन बताया है. हाल ही में फेडरल कोर्ट में सुनवाई हुई, जहां सरकार ने कुछ संवेदनशील राष्ट्रीय सुरक्षा जानकारी को गोपनीय रखने की अनुमति मांगी.

पिछले साल 10 अप्रैल को भारत की नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने अमेरिका से प्रत्यर्पण के बाद राणा को औपचारिक रूप से गिरफ्तार किया था. उसे लॉस एंजिलिस से विशेष विमान द्वारा नई दिल्ली लाया गया था.

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