- 20 साल से फांसी नहीं, अब 548 कैदियों की सजा बदलने का फैसला
- कैलिफोर्निया में बड़ा फैसला, 548 मौत की सजाएं उम्रकैद में बदलने की तैयारी
- कैलिफोर्निया गवर्नर के फैसले से पीड़ित परिवारों में नाराजगी, मानवाधिकार समूहों ने फैसले का किया स्वागत
कैलिफोर्निया के गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने एक ऐतिहासिक और विवादास्पद फैसला लेते हुए राज्य में मौत की सजा पाए 548 कैदियों की सजा को बिना पैरोल आजीवन कारावास में बदलने की घोषणा की है. अपने आठ वर्षीय कार्यकाल की समाप्ति से पहले उठाए गए इस कदम को अमेरिका के इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक दया याचिका कार्रवाई बताया जा रहा है. लंबे समय से मृत्युदंड के विरोधी रहे न्यूजॉम ने कहा कि राज्य द्वारा दी जाने वाली मौत की सजा कैलिफोर्निया के मूल्यों और न्याय व्यवस्था के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं है.
गवर्नर ने पत्र जारी कर बताया फैसला
न्यूज एजेंसी एपी के मुताबिक गवर्नर गेविन न्यूजॉम ने एक सार्वजनिक पत्र जारी कर कहा कि उन्होंने यह निर्णय इसलिए लिया क्योंकि उनका मानना है कि राज्य द्वारा किसी व्यक्ति की हत्या किया जाना कैलिफोर्निया के मूल्यों के विपरीत है.

गवर्नर द्वारा जारी किया गया पत्र
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उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था न्याय प्रणाली की बुनियाद को कमजोर करती है और समाज की मानवीय संवेदनाओं को भी प्रभावित करती है. न्यूजॉम ने अपने कार्यकाल के दौरान 2019 में ही कैलिफोर्निया में फांसी की सजा पर रोक लगाने की घोषणा कर दी थी. अब कार्यकाल समाप्त होने से पहले उन्होंने मृत्युदंड पाए सैकड़ों कैदियों की सजा बदलने का निर्णय लिया है.
548 कैदियों को मिलेगी राहत
गवर्नर कार्यालय के अनुसार इस फैसले से कुल 548 कैदी प्रभावित होंगे. इनमें 529 पुरुष और 19 महिलाएं शामिल हैं. हालांकि सभी मामलों में फैसला तुरंत लागू नहीं होगा. कैलिफोर्निया के संविधान के अनुसार जिन लोगों को एक से अधिक गंभीर अपराधों में दोषी ठहराया गया है, उनके लिए दया याचिका पर अंतिम मंजूरी राज्य के सुप्रीम कोर्ट से लेनी होगी. ऐसे करीब 382 मामलों में कैलिफोर्निया सुप्रीम कोर्ट की स्वीकृति आवश्यक होगी.
अमेरिकी इतिहास की सबसे बड़ी सामूहिक राहत
डेथ पेनल्टी इंफॉर्मेशन सेंटर के मुताबिक यदि सभी याचिकाएं मंजूर हो जाती हैं तो यह अमेरिका के इतिहास में सबसे बड़ी सामूहिक दया याचिका कार्रवाई होगी. इससे अमेरिका में मौत की सजा का इंतजार कर रहे कैदियों की संख्या में लगभग 30 प्रतिशत तक कमी आ सकती है. कैलिफोर्निया लंबे समय से पश्चिमी गोलार्ध की सबसे बड़ी डेथ रो आबादी वाला राज्य माना जाता है. राज्य में आखिरी बार वर्ष 2006 में किसी कैदी को फांसी दी गई थी.
चर्चित अपराधी भी होंगे प्रभावित
कैलिफोर्निया की डेथ रो में कई कुख्यात अपराधी शामिल हैं. इनमें रिचर्ड एलन डेविस भी शामिल है, जिसे 1993 में 12 वर्षीय पॉली क्लास के अपहरण और हत्या के मामले में दोषी ठहराया गया था. इसी तरह रैंडी क्राफ्ट, जिसे "स्कोरकार्ड किलर" के नाम से जाना जाता है, भी डेथ रो में शामिल है. अतीत में स्कॉट पीटरसन और चार्ल्स मैनसन गिरोह के सदस्यों जैसे कई चर्चित दोषियों की मौत की सजा पहले ही उम्रकैद में बदली जा चुकी है.
पीड़ित परिवारों क्या रुख है?
इस फैसले पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं. पॉली क्लास की बहन जेस निकोल ने कहा कि वह पहले मृत्युदंड का समर्थन करती थीं, लेकिन समय के साथ उनकी सोच बदल गई. उनके मुताबिक फांसी पीड़ित परिवारों के घाव नहीं भरती. वहीं कई पीड़ित परिवारों और अभियोजन पक्ष के प्रतिनिधियों ने इस फैसले का विरोध किया है. क्राइम सर्वाइवर्स संगठन की संस्थापक पैट्रिशिया वेन्सकुनास ने कहा कि यह फैसला पीड़ितों और उनके परिजनों के लिए दुखद है. सैम हर की हत्या के मामले में पीड़ित परिवार से जुड़े स्टीव हर ने भी गवर्नर के फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि इससे न्याय की भावना को ठेस पहुंची है.
इन्होंने जताई नाराजगी
कैलिफोर्निया डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नीज एसोसिएशन ने इस फैसले की निंदा की है. संस्था का कहना है कि एक हस्ताक्षर के जरिए उन जूरी सदस्यों, न्यायाधीशों और पीड़ित परिवारों के फैसलों को नजरअंदाज कर दिया गया जिन्होंने वर्षों तक न्याय की प्रक्रिया का पालन किया. कई अभियोजकों ने इसे कार्यपालिका की शक्ति का अनुचित उपयोग बताया है.
ACLU ने किया स्वागत
दूसरी ओर अमेरिकन सिविल लिबर्टीज यूनियन (ACLU) ने गवर्नर के फैसले का स्वागत किया है. ACLU का दावा है कि मृत्युदंड व्यवस्था नस्लीय असमानताओं, न्यायिक भूलों और अमानवीय दंड से जुड़ी रही है. संगठन ने इसे न्याय व्यवस्था में सुधार की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया.
दो दशकों से फांसी नहीं
न्यूजॉम का यह फैसला ऐसे समय आया है जब वह आठ साल के कार्यकाल के बाद पद छोड़ने की तैयारी कर रहे हैं और भविष्य में राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की संभावनाओं को लेकर भी चर्चा में हैं. जनवरी में पदभार संभालने वाले नए गवर्नर जेवियर बेसेरा पहले ही संकेत दे चुके हैं कि वह राज्य में मृत्युदंड पर लागू रोक को जारी रखेंगे. कैलिफोर्निया में मतदाता 2012 और 2016 में जनमत संग्रह के जरिए मृत्युदंड को बनाए रखने के पक्ष में मतदान कर चुके हैं. इसके बावजूद राज्य में पिछले दो दशकों से किसी को फांसी नहीं दी गई है.
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