- भारत इस हफ्ते BRICS समिट में डिजिटल करेंसी को क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट के लिए जोड़ने पर जोर देगा
- भारत BRICS देशों की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी को आपसी इंटरऑपरेबिलिटी बढ़ाने के लिए प्रस्तावित करेगा
- राजनीतिक और तकनीकी बाधाओं के कारण डिजिटल करेंसी को जोड़ने की प्रक्रिया में कई चुनौतियां मौजूद हैं
इस हफ्ते होने वाले समिट में भारत BRICS देशों की सेंट्रल बैंक डिजिटल करेंसी (CBDCs) को क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट के लिए आपस में जोड़ने पर जोर देगा. बातचीत से जुड़े दो सूत्रों ने बताया कि ऐसा राजनीतिक और तकनीकी रुकावटों के बावजूद किया जा रहा है. इस साल BRICS की अध्यक्षता भारत कर रहा है और इस ग्रुप के नेताओं की बैठक 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में होनी है. इससे पहले रॉयटर्स ने जनवरी में रिपोर्ट दी थी कि रिजर्व बैंक ऑफ़ इंडिया (RBI) ने क्रॉस-बॉर्डर ट्रेड को आसान बनाने के लिए इन देशों की सरकारी डिजिटल करेंसी को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव दिया था.
सूत्रों के मुताबिक, नेताओं की बैठक के एजेंडे में CBDC को आपस में जोड़ने का प्रस्ताव शामिल होगा. हालांकि, दुनिया भर में डिजिटल करेंसी को सीमित स्तर पर अपनाए जाने के कारण इसे लागू करना मुश्किल हो सकता है. मामले की संवेदनशीलता और मीडिया से बात करने की इजाजत नहीं होने के कारण सूत्रों ने अपनी पहचान जाहिर नहीं करने को कहा. भारत के विदेश मंत्रालय, वित्त मंत्रालय और RBI को भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं मिला.
राजनीतिक और तकनीकी चुनौतियां
भारत का प्रस्ताव रियो डी जनेरियो में हुए ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन के 2025 के घोषणापत्र पर आधारित होगा, जिसमें सदस्य देशों के पेमेंट सिस्टम के बीच इंटरऑपरेबिलिटी (आपसी तालमेल) को बढ़ावा देने की बात कही गई थी, ताकि सीमा-पार लेन-देन को ज्यादा कुशल बनाया जा सके. हालांकि, CBDC को आपस में जोड़ने की किसी भी कोशिश में बड़ी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. ब्रिक्स (BRICS) में पेमेंट के साझा सिस्टम बनाने पर पहले हुई बातचीत में बहुत कम प्रगति हुई है, जिससे अलग-अलग तरह के देशों के बीच फाइनेंशियल इंफ्रास्ट्रक्चर को जोड़ने में आने वाली मुश्किलों का पता चलता है.
दो सूत्रों में से एक ने बताया कि ईरान और UAE जैसे देशों के बीच तनावपूर्ण संबंध एक बड़ी बाधा बने रहेंगे, क्योंकि UAE ने ईरान के साथ फाइनेंशियल संबंध खत्म कर दिए हैं.
दूसरे सूत्र ने बताया कि भारत भी चीन के साथ फाइनेंशियल कनेक्टिविटी बढ़ाने को लेकर हिचकिचा रहा है, क्योंकि ऐसी व्यवस्थाओं के लिए पड़ोसी देशों के बीच गहरे भरोसे की जरूरत होगी. रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत ने चीन से जुड़े होने के कारण राष्ट्रीय सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला देते हुए, क्रॉस-बॉर्डर ट्रांज़ैक्शन के लिए देश के इंस्टेंट पेमेंट सिस्टम के साथ Alipay+ को जोड़ने के प्रस्ताव को रोक दिया था.
सूत्र ने आगे कहा कि किसी भी CBDC लिंकेज के चालू होने से पहले, व्यापार असंतुलन को संभालने में मदद के लिए करेंसी-स्वैप व्यवस्थाओं की भी जरूरत होगी. ब्रिक्स देशों ने पहले डॉलर-आधारित भुगतान के विकल्पों पर विचार किया है, जिसमें समूह के लिए एक साझा मुद्रा का ब्राज़ील का प्रस्ताव भी शामिल था, हालांकि यह योजना कभी आगे नहीं बढ़ पाई. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ऊंचे टैरिफ लगाने की धमकी देकर इस समूह को ऐसे कदम उठाने के खिलाफ चेतावनी दी थी. दूसरे सूत्र ने कहा कि भारत की डॉलर को बदलने में कोई दिलचस्पी नहीं है, और आधिकारिक डिजिटल मुद्राओं को जोड़ने का मकसद सीमा-पार भुगतान को आसान और तेज बनाना है.
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