- उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर मामले में संतुलित समाधान का सुझाव दिया है.
- भोपाल में सड़क चौड़ीकरण के दौरान मस्जिद को बिना नुकसान पहुंचाए निकाले गए समाधान का उदाहरण प्रस्तुत किया.
- सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के बीच खड़े हनुमान मंदिर के आसपास विकास कार्य और विवाद चर्चा का विषय बने हैं.
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को लेकर चल रही चर्चा के बीच पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखकर एक अहम सुझाव दिया है. उमा भारती ने कहा कि विकास कार्य जरूरी हैं, लेकिन आस्था का सम्मान भी उतना ही आवश्यक है. उन्होंने भोपाल में सड़क चौड़ीकरण के दौरान मस्जिद को बिना नुकसान पहुंचाए निकाले गए समाधान का उदाहरण देते हुए कहा कि उसी तरह उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के मामले में भी ऐसा रास्ता निकाला जाना चाहिए, जिससे विकास कार्य भी प्रभावित न हों और श्रद्धालुओं की भावनाएं भी सुरक्षित रहें.
उमा भारती ने सीएम को लिखा पत्र
उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती ने मुख्यमंत्री मोहन यादव को पत्र लिखा है. अपने पत्र में उन्होंने मंदिर से जुड़े विवाद के समाधान का सुझाव देते हुए कहा कि सरकार को ऐसा रास्ता अपनाना चाहिए, जिसमें विकास और धार्मिक आस्था दोनों का संतुलन बना रहे. उन्होंने स्पष्ट किया कि समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए विकास कार्य आगे बढ़ाए जा सकते हैं.
भोपाल की मस्जिद का दिया उदाहरण
उमा भारती ने अपने पत्र में भोपाल का उदाहरण देते हुए कहा कि सड़क चौड़ीकरण के दौरान एक मस्जिद को छेड़े बिना योजना में बदलाव कर समाधान निकाला था. उन्होंने सुझाव दिया कि उसी तरह उज्जैन के खड़े हनुमान मंदिर के मामले में भी तकनीकी और प्रशासनिक स्तर पर ऐसा विकल्प तलाशा जाए, जिससे मंदिर को नुकसान पहुंचाए बिना सड़क चौड़ीकरण का कार्य पूरा हो सके.
सिंहस्थ की तैयारियों के बीच चर्चा में आया मंदिर
महाकाल की नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ महाकुंभ की तैयारियों के तहत कई विकास कार्य किए जा रहे हैं. इसी क्रम में सड़क चौड़ीकरण की योजना के दौरान खड़े हनुमान जी की प्रतिमा और मंदिर चर्चा का विषय बन गए हैं. सोशल मीडिया पर प्रतिमा को हटाने की संभावनाओं से जुड़ी खबरें सामने आने के बाद बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंच रहे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन करने पहुंच रहे हैं.

उमा भारती ने सीएम मोहन यादव को पत्र लिखा.
170 साल पुरानी मानी जाती है प्रतिमा
खड़े हनुमान जी की प्रतिमा को करीब 170 वर्ष पुराना बताया जाता है. इस प्रतिमा की खासियत यह है कि लगभग आठ फीट ऊंची मूर्ति बिना किसी बाहरी सहारे के खड़ी दिखाई देती है. बताया जाता है कि प्रतिमा को मजबूती देने वाली शिला चार से पांच फीट तक जमीन के भीतर स्थापित है. इसी वजह से इसकी संरचना और वास्तविक स्थिति को समझने के लिए विशेषज्ञों द्वारा तकनीकी परीक्षण किए जा रहे हैं.
प्रशासन ने क्या कहा
मामले को लेकर प्रशासन का कहना है कि फिलहाल प्रतिमा को विस्थापित करने की कोई कार्रवाई नहीं की है. अधिकारियों के अनुसार धार्मिक आस्था का पूरा सम्मान किया जा रहा है और किसी भी निर्णय से पहले वैज्ञानिक तथा तकनीकी जांच को प्राथमिकता दी जा रही है. परीक्षण रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी.
संत समाज ने जताई आपत्ति
प्रतिमा को हटाने की चर्चाओं के बीच संत समाज ने भी अपनी आपत्ति दर्ज कराई है. फिरोजाबाद के महंत मनीष भारद्वाज और पुजारी रामकुमार ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण के नाम पर मंदिर या प्रतिमा से किसी प्रकार की छेड़छाड़ नहीं की जानी चाहिए. उनका कहना है कि हनुमान जी कलयुग के प्रमुख देवता माने जाते हैं और उनसे जुड़ी धार्मिक भावनाओं का सम्मान होना चाहिए.
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