- शहीद भगत सिंह का जन्म पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव में हुआ था, जो अब पाकिस्तान में फैसलाबाद में आता है
- फैसलाबाद प्रशासन ने भगत सिंह के पुश्तैनी गांव में उनका स्मारक बनाने का निर्णय लिया है
- लाहौर के पूंछ हाउस में भगत सिंह गैलरी खोली गई है, जहां उनकी आजादी से जुड़ी तस्वीरें और दस्तावेज रखे गए हैं
क्या आपको पता है कि शहीद-ए-आजम भगत सिंह का जन्म पंजाब के जिस गांव में हुआ था वह अब पाकिस्तान में है? आजादी के पहले यह पंजाब के लायलपुर जिले के बंगा गांव था. साल था 1907 और तारीख थी 28 सितंबर. भगत सिंह ने देश की आजादी के लिए अपनी जान कुर्बान कर दी लेकिन उनका गांव बंटवारे के बाद पाकिस्तान में चला गया. अब यह पाकिस्तान के पंजाब राज्य के फैसलाबाद में आता है. अब फैसलाबाद सरकार ने भगत सिंह के लिए उनके गांव में उनके पुश्तैनी हवेली के पास स्मारक बनाने का फैसला लिया है.
पाकिस्तान के अखबार द एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार फैसलाबाद को सुंदर बनाने और उसकी ऐतिहासिक विरासत को बचाने की एक बड़ी पहल के तहत, इस जिले का प्रशासन भगत सिंह के लिए एक स्मारक बनाने की योजना बना रहा है. रिपोर्ट के अनुसार डिप्टी कमिश्नर नौमान सिद्दीकी ने शहीद-ए-आजम को बंटवारे से पहले और बाद के दौर का दोनों देशों के लिए एक कॉमन स्वतंत्रता सेनानी बताया है.
यह कदम पाकिस्तान में भगत सिंह से जुड़ी जगहों को संरक्षित करने और उनकी याद में कार्यक्रम आयोजित करने की नई कोशिशों के बीच उठाया गया है. बता दें कि इससे पहले 30 दिसंबर, 2024 को लाहौर के पूंछ हाउस में भगत सिंह गैलरी खोली गई थी. इस गैलरी में आजादी की लड़ाई से जुड़ी ऐतिहासिक तस्वीरें, उनके लेटर और अन्य डॉक्यूमेंट रखे गए हैं.
ध्यान रहे कि पूंछ हाउस पाकिस्तान के उद्योग विभाग के अंदर आता है और इसका भगत सिंह पर चले केस से भी ऐतिहासिक संबंध है. लाहौर षड्यंत्र मामले में भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव पर मुकदमा 1929-30 में यहीं चलाया गया था. इसके अलावा लाहौर में शादमान (जिसे फव्वारा चौक के नाम से भी जाना जाता है) का नाम बदलकर भगत सिंह चौक रखने की भी लंबे समय से मांग की जा रही है.
भगत सिंह को अपना दिखाने की कोशिश में क्यों लगा पाकिस्तान?
भगत सिंह जैसे कद के व्यक्ति पाकिस्तान के लिए भी ऐतिहासिक हस्ती हैं. पाकिस्तान की आधी से ज्यादा आबादी पंजाबी मूल की है. वहां का राजनीतिक नेतृत्व भी पंजाबी है और भगत सिंह भी पंजाबी थे. भगत सिंह का स्मारक बनाकर पाकिस्तान की पंजाब सरकार, जिसे मरियम नवाज लीड करती हैं, इसी पंजाबी वोटरों को अपने पाले में रखना चाहेंगी. जो देश बार-बार मुहम्मद बिन कासिम और महमूद गजनवी से अपना जुड़ाव दिखाना चाहता है, उसके लिए भगत सिंह का पंजाबी बैकग्राउंड उन्हें राष्ट्रीय इतिहास और पहचान का हिस्सा बनाने के लिए काफी वजह होनी चाहिए.
पाकिस्तान में भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन नाम का एक संगठन भगत सिंह की यादों को पाकिस्तान में संजोने का काम कई सालों से करता आ रहा है. बीबीसी की एक रिपोर्ट के अनुसार इस संगठन के अध्यक्ष इम्तियाज कुरैशी ने बताया था, "भगत सिंह की पाकिस्तान में बहुत इज्जत है. यहां उनके बहुत दीवाने हैं. उनके पिता, दादा का बनाया हुआ घर आज भी पाकिस्तान में मौजूद है. उनके दादा अर्जुन सिंह ने 120 साल पहले जो आम का पेड़ लगाया था, वो आज भी मौजूद है. उनके गांव का नाम बदल कर भगतपुरा रख दिया गया है. हर साल 23 मार्च को भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की शहीदी दिवस मनाया जाता है."
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