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BAPS को पेरिस में मिली क्लीन चिट… 5 सितंबर को एफिल टॉवर में आखिर क्या हुआ था? NDTV की पड़ताल में सामने आया सच

पेरिस के एफिल टॉवर में 5 सितंबर को BAPS डेलीगेशन की विजिट पर महिला कर्मचारियों को हटाने का दावा पेरिस सिटी की जनरल इंस्पेक्टोरेट की जांच में बेबुनियाद पाया गया.

एफिल टॉवर में 5 सितंबर के कार्यक्रम को लेकर विवाद हुआ था.
AFP
पेरिस/नई दिल्ली:

पेरिस के आइकॉनिक एफिल टॉवर में 5 सितंबर को आखिर ऐसा क्या हुआ था, जिसकी गूंज भारत समेत दुनिया के देशों में सुनाई दी? ऐसा क्या हुआ था कि BAPS स्वामिनारायण संस्था के डेलीगेशन के विजिट के बाद दुनिया के इस मशहूर टूरिस्ट स्पॉट के दरवाजे एक दिन के लिए बंद करने पड़े? क्या BAPS के डेलीगेशन के दौरे के दौरान सचमुच महिला कर्मचारियों को एफिल टॉवर से हटाया गया था? या फिर एक झूठी कहानी गढ़ी गई और उसे सच की तरह दुनिया के सामने पेश कर दिया गया?

दावा बड़ा था...लेकिन जब इस पूरे मामले की जांच पेरिस सिटी की जनरल इंस्पेक्टोरेट ने की तो महिला कर्मचारियों को हटाने या उन्हें एफिल टॉवर से दूर रखने का दावा बेबुनियाद पाया गया. तो फिर सवाल और बड़ा हो जाता है कि आखिर ये कहानी आई कहां से? क्या BAPS के खिलाफ कोई सुनियोजित दुष्प्रचार हुआ? अगर ऐसा था...तो इस कहानी को किसने फैलाया? किस मकसद से फैलाया? और इसका निशाना कौन था?

NDTV ने इस पूरे विवाद की जड़ तक पहुंचने की कोशिश की. पेरिस से दिल्ली तक... हमारी टीम ने दस्तावेज़ खंगाले, ग्राउंड पर जाकर पड़ताल की. विवाद से जुड़े लोगों और संगठनों से बात की और ये समझने की कोशिश की कि 5 सितंबर को एफिल टॉवर में वास्तव में हुआ क्या था? 

पेरिस से हमारी रिपोर्टर नताशा और दिल्ली से आदित्य राज कौल इस कहानी की एक-एक कड़ी जोड़ने निकले. दावे क्या थे? तथ्य क्या कहते हैं? और इस विवाद की असली कहानी क्या है? इस सबसे बड़ी तहकीकात में सामने आईं कुछ ऐसी जानकारियां, जो इस पूरे विवाद को एक बिल्कुल अलग नजरिए से देखने पर मजबूर करती हैं.

एफिल टॉवर विवाद की पूरी पड़ताल

7 सितंबर 2026. दिन सोमवार. यही वो तारीख थी जब राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में पेरिस में हुए एक विवाद की खबर छाई रही, जिसका ताल्लुक भारत से भी था. उस विवाद में स्वामीनारायण संप्रदाय की संस्था BAPS का नाम आया. खबरों के मुताबिक, BAPS का एक डेलीगेशन उस दिन एफिल टॉवर विजिट के लिए आया था. 

आरोप लगा कि विजिट से पहले BAPS ने मैनेजमेंट से आग्रह किया था कि उनकी विजिट के दौरान डेलिगेशन का महिलाओं से संपर्क सीमित रहे. इस वजह से महिला कर्मचारियों से अपनी जगह छोड़कर दूसरे हिस्सों में जाने को कहा गया. आरोपों के मुताबिक उस दिन महिला स्टाफ की जगह पुरुष कर्मचारी लगाए गए. फिर खबर आई कि एफिल टॉवर के स्टाफ ने इसे लैंगिक भेदभाव बताकर विरोध में एक दिन की हड़ताल कर दी. लेकिन अब जब इस मामले की जांच हुई, तो पूरा मामला 180 डिग्री घूम गया.

ये सितंबर महीने का उस समय का मामला है जब पेरिस के उपनगर बुसी-सेंट-जॉर्जेस में एक हिंदू मंदिर का उद्घाटन हुआ था, जिसे BAPS ने बनाया था. मंदिर का निर्माण पारंपरिक भारतीय वास्तुकला और तकनीकों का इस्तेमाल करके किया गया है.

ये मंदिर लगभग 3,500 वर्ग मीटर में बना है और इसकी ऊंचाई करीब 24 मीटर है. जबकि उसके बगीचे अलग हैं. ये आयोजन पेरिस में हुआ बेहद भव्य आयोजन था. 

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उस आयोजन में बुसी-सेंट-जॉर्जेस के मेयर समेत कई नामी-गिरामी लोग पहुंचे थे. उन्होंने BAPS द्वारा किए जाने वाले सामाजिक और मानवीय कामों की खुले दिल से तारीफ की थी. 

अब जबकि तथाकथित मीडिया कवरेज कम हो गया है और असल सच सामने आने लगा है. और पेरिस सिटी काउंसिल की दो रिपोर्टों के अंश इस बात की पुष्टि करते हैं कि BAPS पर कोई दोष नहीं है.

फिर भी आपको दो-तीन छोटी-छोटी बातें याद रखनी होंगी. कई आध्यात्मिक परंपराओं में तथाकथित संन्यासी व्रत होते हैं. जो केवल पुरुष होते हैं. वे आध्यात्मिक बुलावे का जवाब देते हैं और अपना जीवन भक्ति में समर्पित कर देते हैं.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उद्घाटन समारोह में व्यक्तिगत रूप से नहीं पहुंचे, लेकिन उन्होंने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधित किया और मंदिर को भारत-फ्रांस सांस्कृतिक संबंधों में महत्वपूर्ण पड़ाव बताया. 

फ्रांस में ये पहला विशाल हिंदू मंदिर है जिसका उद्घाटन 6 सितंबर को हुआ, लेकिन इससे एक दिन पहले यानी 5 सितंबर को एफिल टॉवर में हुई एक घटना ने सब कुछ बदलकर रख दिया.

क्या कुछ हुआ था?

मंदिर का निर्माण कराने वाले BAPS के एक प्रतिनिधिमंडल ने एफिल टॉवर जाने की इच्छा जताई थी. 5 सितंबर को वो एफिल टॉवर पहुंचे. 

उस डेलीगेशन में लगभग 100 लोग थे जिनमें ज्यादातर साधु थे. इनमें BAPS के मौजूदा आध्यात्मिक प्रमुख 93 साल के महंत स्वामी महाराज भी शामिल थे. 

खबरों के मुताबिक, इस डेलीगेशन ने एफिल टॉवर का मैनेजमेंट देखने वाली कंपनी SETE से अनुरोध किया था कि डेलीगेशन के एफिल टॉवर विजिट के दौरान  महिलाओं के साथ बातचीत और संपर्क को सीमित रखा जाए. इसके पीछे दलील ये दी गई कि उनके संन्यासी जीवन की प्रतिज्ञाओं के तहत महिलाओं के संपर्क में आने की मनाही है.

खबरों के मुताबिक, तब एफिल टॉवर में तैनात महिला कर्मचारियों से अपनी जगह छोड़कर दूसरे हिस्सों में जाने को कहा गया. उनकी जगह पुरुष कर्मचारी लगाए गए. ये भी कहा गया कि जब तक डेलिगेशन वहां है, वहां की महिला कर्मचारी कुछ खास हिस्सों में ना जाएं और ना ही उधर से गुजरें. इस बात पर बवाल मच गया.

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Photo Credit: AFP

खबरें आईं कि इसके विरोध में एफिल टॉवर के स्टाफ ने 7 सितंबर को एक दिन की हड़ताल कर दी. टॉवर मैनेजमेंट की खूब आलोचना हुई. विवाद बढ़ने के बाद हालांकि तब BAPS ने भी खेद भी जताया था, लेकिन इस विवाद के बाद BAPS अचानक फ्रांस के सार्वजनिक बहस में चर्चा का विषय बन गया.

तब BAPS ने एक बयान भी जारी किया था, जिसमें कहा गया कि एफिल टॉवर की यात्रा के दौरान महिलाओं को हटाने या उनसे दूरी बनाने की कोई औपचारिक या अनौपचारिक मांग नहीं की गई थी. केवल सुबह सबसे पहले प्रवेश देने का अनुरोध किया गया था, ताकि डेलीगेशन में बड़ी संख्या लोगों के होने की वजह से दूसरे पर्यटकों को असुविधा न हो.

BAPS का ये भी कहना है कि उसके साधु विमानों, ट्रेनों आदि से यात्रा करते हैं और इस दौरान महिलाओं को हटाने की मांग नहीं करते. इस यात्रा के लिए BAPS की ओर से समन्वय करने वाली व्यक्ति भी एक महिला थीं.

पड़ताल में क्या कुछ सामने आया?

NDTV की रिपोर्टर नताशा ने लंदन से पेरिस पहुंचकर इस घटना की पूरी पड़ताल की. वो उन सब लोगों और संगठनों से मिलीं, जो-जो इस विवाद का हिस्सा थे.

पेरिस में BAPS की कॉर्डिनेटर जिग्न्याबेन व्यास ने कहा, 'महिलाओं के साथ भेदभाव या उन्हें हाशिए पर धकेल दिए जाने के बारे में इस तरह की नकारात्मक टिप्पणियां सुनकर थोड़ा निराशा हुई, लेकिन सच्चाई सामने आ गई है इसलिए मैं बहुत खुश हूं और अब लोग BAPS को उसी तरह जानेंगे जैसे मैं सालों से जानती हूं.'

इस मामले में BAPS की ओर से बयान जारी करने और एफिल टॉवर में उनके डेलीगेशन की विजिट से पर्यटकों को हुई असुविधा के लिए माफी मांगने से ही मामला खत्म नहीं हो गया. चूंकि मामला अंतरराष्ट्रीय सुर्खियां बन चुका था, लिहाजा पेरिस सिटी की जनरल इंस्पेक्टोरेट ने इस मामले में लगाए जा रहे आरोपों की जांच की.

BAPS की ओर से महिला कर्मचारियों को हटाने को लेकर कोई स्पष्ट अनुरोध नहीं किया गया था. SETE के सामने जो शुरुआती अनुरोध रखा गया था, वो धार्मिक प्रतिनिधियों और महिलाओं के बीच शारीरिक संपर्क न होने से संबंधित था.

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जांच रिपोर्ट के मुताबिक, रिसेप्शन और कस्टमर रिलेशन में काम करने वाले कर्मचारियों से अस्थायी रूप से वहां से हटने को कहा गया, जब डेलीगेशन का एक हिस्सा नॉर्थ पिलर की ओर जा रहा था.

एफिल टॉवर की मैनेजमेंट कंपनी SETE ने कहा कि आंतरिक जांच में पाया गया कि ऑपरेशनल खामियों और कमियों के कारण महिला कर्मचारियों को उनकी ड्यूटी से हटाया गया.

तो इस तरह इस मामले में BAPS को क्लीन चिट मिल गई. ये जांच पेरिस शहर के अधिकारियों ने SETE के साथ मिलकर शुरू की थी. 

इस विवाद की गाज एफिल टॉवर का संचालन करने वाली कंपनी के डायरेक्टर जनरल पैट्रिक ब्रांको रुइवो साल पर गिरी है. खबरें हैं कि वो इस साल के आखिर तक अपने पद से हट जाएंगे.

क्या इस मामले में जान-बूझकर झूठ फैलाया गया?

इस मामले में BAPS को क्लीन चिट मिलने के बाद NDTV  ने BAPS संस्था के अंतरराष्ट्रीय संबंध प्रमुख ब्रह्म विहारी दास से संपर्क किया. 

उन्होंने कहा, 'हमें खुशी है कि यह गलतफहमी अब दूर हो गई है. लेकिन हम किसी पर उंगली नहीं उठाना चाहते और न ही किसी पर आरोप लगाना चाहते हैं. •हम उन लोगों को भी माफ करना चाहते हैं, जिन्होंने हम पर ऐसी बात का आरोप लगाया, जो हमने न तो की और न ही कभी उसका प्रचार करना चाहेंगे.'

इस बयान से ये सवाल उठता है कि क्या एफिल टॉवर विवाद BAPS के खिलाफ एक सोची-समझी साजिश थी? ये समझने के लिए पेरिस में उस इलाके में जाना जरूरी था, जहां स्वामिनारायण संप्रदाय का फ्रांस में सबसे बड़ा हिंदू मंदिर बना है. NDTV रिपोर्टर नताशा ने यहां पहुंचकर ये समझने की कोशिश की कि पेरिस में स्थित इस BAPS मंदिर का यहां क्या कोई विरोध है?

हमारी टीम ने पेरिस में स्थित इस BAPS मंदिर के आसपास रहने वाले लोगों से बात की. मंदिर के खिलाफ किसी तरह का विरोध नहीं है. 

तो पेरिस में BAPS स्वामिनारायण संस्था के इस विशाल हिंदू मंदिर से जब न फ्रांस के राजनीतिक, न सामाजिक तबकों को कोई दिक्कत है. मंदिर के आसपास के लोगों को भी कोई आपत्ति नहीं है. तो फिर एफिल टॉवर में हुए बवाल के पीछे क्या हो सकता है? 

कौन है फिर इस सबके पीछे?

इसकी कड़ियां जुड़ती हैं CGT नाम के संगठन से, जो एफिल टॉवर में काम करने वाले कर्मचारियों की यूनियन है. 

ऐसा कहा जा रहा है कि 5 सितंबर से पहले CGT ने पांचवां एंटी-BAPS सम्मेलन प्रायोजित किया था. ऐसा शक है कि हड़ताल करने वाले एफिल टॉवर के कुछ कर्मचारियों का एंटी-BAPS कैंपेन वालों से संपर्क हो सकता है.

पेरिस से नताशा और दिल्ली से आदित्य राज कौल की रिपोर्ट

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