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'एक दिमाग में लाखों आइंस्टाइन से बेहतर है एक हृदय में लाखों बुद्ध', AI के सवाल पर BAPS के ब्रह्मविहारी स्वामीजी

NDTV World Summit 2026 के दूसरे दिन की शुरुआत अबू धाबी स्थित BAPS हिंदू मंदिर के प्रमुख पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामीजी के साथ हुई है. इस चर्चा में AI के बढ़ते प्रभाव के बीच इंसानियत, आस्था और मानवीय मूल्यों की अहमियत पर बात हुई.

'एक दिमाग में लाखों आइंस्टाइन से बेहतर है एक हृदय में लाखों बुद्ध', AI के सवाल पर BAPS के ब्रह्मविहारी स्वामीजी
पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामीजी ने NDTV World Summit 2026 में AI और आस्था पर अपने विचार रखे

एक दिमाग में लाखों आइंस्टाइन से बेहतर है एक हृदय में लाखों बुद्ध! यह बात BAPS के इंटरनेशनल स्पोक्सपर्सन और अबू धाबी स्थित BAPS हिंदू मंदिर के प्रमुख पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामीजी ने NDTV World Summit 2026 के मंच से कही. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के दौर में मशीनों की बढ़ती ताकत के बीच एक बड़ा सवाल यह है कि इंसान होने का असली मतलब क्या है. क्या सिर्फ बुद्धिमत्ता ही इंसान की पहचान है या आस्था और चेतना भी इसमें अहम भूमिका निभाती हैं. NDTV World Summit 2026 के दूसरे और आखिरी दिन के पहले सत्र में इसी सवाल पर चर्चा हुई.

'Beyond Intelligence: AI, Faith and the Meaning of Being Human' विषय पर हुए इस सत्र में पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामीजी ने अपने विचार रखे. इस चर्चा में AI के बढ़ते प्रभाव के बीच इंसानियत, आस्था और मानवीय मूल्यों की अहमियत पर बात हुई. इस सत्र को NDTV के सीनियर एग्जीक्यूटिव एडिटर आदित्य राज कौल ने मॉडरेट किया. 

"AI के डर को समझिए लेकिन आस्था के साथ सामना कीजिए"

ब्रह्मविहारी स्वामीजी ने यहां कहा, "हम एक नई प्रजाति के आविष्कार के कगार पर हैं. अब तक ऐसा नहीं होता था कि वाशिंग मशीनें अपने जैसी छोटी वाशिंग मशीनें पैदा कर लें, जो रोजमर्रा के कामों में उनकी मदद कर सकें. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) में ऐसे 'एजेंट' होंगे जिन्हें वह खुद बनाएगा. अब तक ऐसा कभी नहीं हुआ कि कोई कार खुद से छोटी कारें पैदा कर ले. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस असल में खुद को ही आगे बढ़ा रहा है (यानी खुद को ही पैदा कर रहा है). इसकी अपनी एक सोच है."

उन्होंने कहा कि AI के डर को समझिए लेकिन आस्था के साथ सामना कीजिए. उनके अनुसार एक दिमाग में लाखों आइंस्टाइन से बेहतर है एक हृदय में लाखों बुद्ध को जमा किया जाए.

उन्होंने यह सुनिश्चित करने के लिए वैश्विक प्रयासों का भी आह्वान किया कि AI इंसानों के नियंत्रण में रहे. साथ ही, उन्होंने कहा कि इस तकनीक को किस तरह इस्तेमाल किया जाए, इसमें आस्था की भी भूमिका होनी चाहिए. उन्होंने कहा, "अगर कोई अनिश्चितता है और आप उसका सामना डर ​​के साथ करते हैं, तो इस बात की संभावना ज्यादा है कि आप गलत फैसले ले लें. लेकिन अगर आप किसी चीज का सामना विश्वास के साथ करते हैं, तो हो सकता है कि आप हमेशा सही फैसले न ले पाएं, फिर भी ऐसी स्थिति में- जो पूरी तरह से हमारे नियंत्रण से बाहर हो, जो बिल्कुल अलग और अप्रत्याशित हो- आपके सही फैसले लेने की संभावना बढ़ जाती है. मुझे लगता है कि दुनिया को इसका सामना विश्वास के साथ करना चाहिए. लेकिन इसका मतलब यह भी नहीं है कि हम इसे नियंत्रित करने के लिए 'रेड लाइट' नहीं रख सकते. इसलिए, ये दोनों बातें साथ-साथ हैं. डर को समझें, लेकिन उसका सामना विश्वास के साथ करें." 

"इंसान मशीनों की तरह सोचने लगेंगे"

इस सवाल के जवाब में कि क्या मशीनें इंसानी रिश्तों की जगह ले सकती हैं, खासकर तब, जब लोग सलाह के लिए मशीनों की ओर ज्यादा रुख कर रहे हैं, ब्रह्मविहारी स्वामी ने कहा कि उन्हें इस बात की ज्यादा चिंता नहीं है कि मशीनें इंसानों जैसी हो रही हैं, बल्कि इस बात की चिंता है कि इंसान मशीनों जैसे होते जा रहे हैं. उन्होंने कहा, "मुझे इस बात की चिंता नहीं है कि मशीनें इंसानों की तरह सोचेंगी और व्यवहार करेंगी, बल्कि मुझे इस बात की चिंता है कि इंसान मशीनों की तरह सोचने लगेंगे."

AI के नुकसान को रोमन साम्राज्य के पतन से जोड़कर समझाया

स्वामीजी के अनुसार हर खोज हमें समय का तोहफा देती है, चाहे वह पहिया हो या कंप्यूटर. असली बदलाव हम क्या चुनते हैं, उसपर निर्भर करता है. उन्होंने कहा कि रोमन साम्राज्य के इतिहास से सीखने की जरूरत है. रोमन साम्राज्य ने दासों की मदद से सिर्फ भोग किया, खूनी खेल खेले, दासों से ही जंग लड़ाया, उनका खून बहाया. आखिर में रोमन साम्राज्य को खत्म होने के लिए किसी बाहरी जंग की जरूरत नहीं पड़ी, वह अंदर से उठी आग में ही भस्म हो गया. हम AI का इस्तेमाल कैसे करते हैं, वही उसकी और हमारी नियति तय करेगा.

ब्रह्मविहारी स्वामीजी ने एफिल टॉवर वाली घटना पर भी रखा अपना पक्ष

स्वामीजी से सत्र के मॉडरेटर आदित्य राज कौल ने हाल ही में BAPS के संतों के एफिल टॉवर के दौरे पर हुए विवाद को लेकर भी सवाल किया. स्वामीजी ने NDTV से उस दौरे के समय महिला कर्मचारियों को सामने से हटवाने के आरोपों पर कहा कि यह एफिल टॉवर की तरफ से हुई एक गलतफहमी थी.

उन्होंने कहा, "एक आध्यात्मिक संगठन के रूप में, हम पिछले लगभग 10 वर्षों से फ्रांसीसी सरकार के साथ बातचीत कर रहे थे... सभी प्रक्रियाओं और निष्पक्ष सुनवाई के बाद, उन्होंने हमें मंदिर बनाने के लिए जमीन दी. यह एक ऐसे धार्मिक परिसर में है, जहां एक मस्जिद, एक सिनेगॉग (यहूदी प्रार्थना स्थल), दो बौद्ध मंदिर और हमारा मंदिर स्थित है. सब कुछ ठीक है. सभी खुश हैं. उन्होंने हमें पेरिस की मुख्य सड़कों और सीन नदी से होकर एक जुलूस निकालने की विशेष अनुमति दी थी. यह अब तक के सबसे शानदार सांस्कृतिक जुलूसों में से एक था, जिसकी आप कल्पना कर सकते हैं. एफिल टॉवर प्रबंधन ने खुद ही कहा था कि आप एफिल टॉवर आ सकते हैं. हमने यह उनके सामान्य खुलने के समय के दौरान ही किया."

स्वामीजी ने आगे कहा, "जैसा कि आप जानते हैं, जब हम हवाई जहाज से यात्रा करते हैं, तो हम कभी महिलाओं को विमान से उतरने के लिए नहीं कहते. हम ट्रेनों में भी सफर करते हैं. वहां भी महिलाएं साथ होती हैं. यहां तक कि इस पूरी सभा में भी सभी मौजूद हैं. लेकिन, साधु होने के नाते हम अपने आध्यात्मिक नियमों का पालन करते हैं- हम खुद तो इनका पालन करते हैं, पर कभी किसी और पर इन्हें थोपते नहीं हैं. एफिल टॉवर प्रबंधन ने भी कहा था कि वे खुश हैं... लेकिन जाहिर है, जैसा कि आपने कहा, अगर कुछ लोग इसे लेकर बेवजह सनसनी फैलाना चाहते हैं, तो बात अलग है."

ब्रह्मविहारी स्वामी ने भारतीय मीडिया के कुछ हिस्सों पर भी सवाल उठाए, जिन्होंने तथ्यों की ठीक से जांच किए बिना ही इस विवाद को रिपोर्ट कर दिया. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया और सनसनीखेज कवरेज घटनाओं को तोड़-मरोड़ कर पेश कर सकते हैं, खासकर तब जब लोग बिना किसी पुष्टि के छोटे वीडियो या ऑनलाइन दावों पर भरोसा कर लेते हैं. उन्होंने NDTV सहित उन मीडिया संस्थानों की तारीफ की, जिन्होंने तथ्यों की जांच की और इस मामले की पड़ताल पर रिपोर्टिंग की.

BAPS के बारे में

BAPS यानी बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था एक हिंदू धार्मिक और सामाजिक संस्था है. इसकी स्थापना शास्त्रीजी महाराज ने 1907 में गुजरात में की थी. यह संस्था दुनिया के कई देशों में मंदिरों और केंद्रों के जरिए आध्यात्मिक शिक्षा, धार्मिक गतिविधियों और मानवीय सेवा से जुड़े काम करती है. इसका उद्देश्य लोगों में नैतिक मूल्यों को बढ़ावा देना और समाज की भलाई के लिए काम करना है.

पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामीजी के बारे में जानिए

पूज्य ब्रह्मविहारी स्वामीजी BAPS स्वामीनारायण संस्था के वरिष्ठ संत और अबू धाबी स्थित BAPS हिंदू मंदिर के प्रमुख हैं. BAPS की आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, उन्होंने इस ऐतिहासिक मंदिर की परियोजना को शुरू करने से लेकर इसके निर्माण के पूरा होने तक अहम भूमिका निभाई. मंदिर का उद्घाटन 14 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और BAPS के आध्यात्मिक प्रमुख महंत स्वामी महाराज की मौजूदगी में हुआ था. यह मध्य पूर्व का पहला पारंपरिक पत्थरों से बना हिंदू मंदिर है. 

ब्रह्मविहारी स्वामीजी BAPS के जरिए अंतरराष्ट्रीय संबंधों, मानवीय सेवा और विभिन्न धर्मों के बीच सद्भाव को बढ़ावा देने से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रहे हैं. BAPS के अनुसार, रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान उन्होंने पोलैंड-यूक्रेन सीमा पर राहत प्रयासों का नेतृत्व किया, जिसमें भारतीय नागरिकों सहित अन्य लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद की गई. मार्च 2025 में उन्हें अंतरराष्ट्रीय संबंधों, मानवीय सेवा और धार्मिक सद्भाव में योगदान के लिए लोकमत महाराष्ट्रियन ऑफ द ईयर पुरस्कार से सम्मानित किया गया था.

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