भारत के पड़ोसी देश बांग्लादेश में आज 18 महीनों बाद वोटिंग होने जा रही है. शेख हसीना के 15 साल लंबे शासन के गिरने के बाद यह पहली बड़ी चुनावी परीक्षा है. बांग्लादेश में 2024 के उस हिंसक आंदोलन के बाद पहली बार आम चुनाव हों रहे हैं, जिसके कारण तत्कालीन प्रधानमंत्री शेख हसीना को पद से हटना पड़ा था. देश में 11 राजनीतिक दलों के गठबंधन का नेतृत्व कर रही जमात-ए-इस्लामी, बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (बीएनपी) के नेतृत्व वाले गठबंधन की मुख्य प्रतिद्वंद्वी के रूप में उभरी है. अल्पसंख्यकों को लेकर जताई जा रही आशंकाओं को दूर करते हुए बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख ने किसी भी प्रकार के भेदभाव को खारिज कर दिया. रिपोर्ट के मुताबिक, सबसे मजबूत दावेदार बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) है, जो वर्तमान सर्वेक्षणों में 50% से अधिक समर्थन हासिल कर रही है. पार्टी की कमान अब तारीक रहमान के हाथों में है, जो 17 साल के आत्मनिर्वासन के बाद दिसंबर 2025 में देश लौटे. बांग्लादेश के चुनाव से जुड़े हर लेटेस्ट अपडेट पाने के लिए जुड़े रहिए एनडीटीवी के लाइव ब्लॉग के साथ
Bangladesh Election Live Updates:-
बांग्लादेश चुनाव में BNP बनाम जमात की कड़ी टक्कर
बांग्लादेश में 2024 के जनविद्रोह के बाद आज होने वाला चुनाव देश के भविष्य के लिए निर्णायक माना जा रहा है. शेख हसीना की 15 साल पुरानी सरकार के सत्ता से बेदखल होने और उसके बाद बने अंतरिम प्रशासन के अधीन यह पहला राष्ट्रीय चुनाव है. इस बार राजनीति का केंद्र BNP के नेता तारीक रहमान और जमात‑ए‑इस्लामी के बीच मुकाबले पर टिक गया है, जो देश में पहली बार एक इस्लामिस्ट‑नेतृत्व वाली सरकार बनने की संभावना भी पैदा कर रहा है. अंतरिम नेता मोहम्मद यूनुस ने मतदान से पहले कहा कि यह चुनाव देश की लोकतांत्रिक दिशा, उसकी मजबूती और आने वाली पीढ़ी के भविष्य को तय करेगा.
10 लाख सुरक्षाकर्मी तैनात, बांग्लादेश के चुनावी इतिहास में सबसे बड़ी तैनाती
बांग्लादेश में लंबे वक्त बाद हो रहे चुनाव केलिए इलेक्शन कमीशन ने करीब 10 लाख सुरक्षा बल तैनात कर दिए हैं. 13वें संसदीय चुनाव के साथ-साथ 84-सूत्रीय सुधार पैकेज पर जनमत-संग्रह भी हो रहा है.
बांग्लादेश में अहम जनरल इलेक्शन, हाई सिक्योरिटी में मतदान
बांग्लादेश में गुरुवार को होने वाले आम चुनाव को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतज़ाम किए गए हैं. गौर करने वाली जरूरी बात ये है कि यह चुनाव 18 महीने बाद हो रहा है, जब शेख हसीना का 15 साल पुराना शासन बड़े पैमाने पर हुए प्रदर्शनों के बाद गिर गया था.