- बांग्लादेश चुनाव के लिए जमात-ए-इस्लामी नेतृत्व वाले 11 दलों के गठबंधन ने 253 संसदीय सीटों पर सहमति बनाई है
- आगामी आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को होगा, जो शेख हसीना के सत्ता से हटने के बाद पहला चुनाव होगा
- जमात-ए-इस्लामी के नायब अमीर सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर ने इसे देश के अस्तित्व के लिए ऐतिहासिक चुनाव बताया है
बांग्लादेश की राजनीति में 13वें राष्ट्रीय संसद चुनाव को लेकर एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व वाले 11-दलीय चुनावी गठबंधन ने 300 संसदीय सीटों में से 253 सीटों पर आपसी सहमति बना ली है. गुरुवार, 15 जनवरी की रात राजधानी ढाका के काकराइल स्थित डिप्लोमा इंजीनियर्स संस्थान में आयोजित प्रेस कांफ्रेंस में इस चुनावी गठबंधन की सीट शेयरिंग का एलान किया गया. बता दें कि बांग्लादेश में आम चुनाव 12 फरवरी 2026 को होने जा रहा है. यह चुनाव शेख हसीना के सत्ता से हटने और अंतरिम सरकार के गठन के बाद का पहला चुनाव है. इस चुनाव को लोकतांत्रिक स्थिरता की बहाली के लिए अहम माना जा रहा है, हालांकि इसकी निष्पक्षता को लेकर बड़े सवाल हैं. शेख हसीना की अवामी लीग को बैन कर दिया गया है.
"अस्तित्व बचाने का चुनाव": सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर
सीट बंटवारे की घोषणा करते हुए जमात-ए-इस्लामी के नायब अमीर सैयद अब्दुल्ला मोहम्मद ताहिर ने इस गठबंधन को ऐतिहासिक बताया. उन्होंने कहा, "यह चुनाव देश के अस्तित्व को बचाने का चुनाव है. बांग्लादेश के इतिहास में सभी मतों को समाहित करने वाला इतना बड़ा गठबंधन पहले कभी नहीं बना. हम 'वन बॉक्स पॉलिसी' (एक बॉक्स नीति) के तहत एकजुट होकर लड़ेंगे."
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सीटों का गणित: किसे क्या मिला?
गठबंधन में तय हुए समझौते के अनुसार, सीटों का वितरण इस प्रकार है:

गठबंधन में शामिल जागपा (JAGPA) और खिलाफत आंदोलन जैसे दलों के लिए सीटों की घोषणा बाद में की जाएगी.
'इस्लामी आंदोलन' पर सस्पेंस बरकरार
भले ही 10 दलों ने एकजुटता दिखाई, लेकिन इस्लामी आंदोलन बांग्लादेश (चरमोनई पीर के नेतृत्व वाली) इस संवाददाता सम्मेलन में शामिल नहीं हुई. हालांकि, गठबंधन के नेताओं का दावा है कि उनके साथ बातचीत चल रही है. सूत्रों के अनुसार, उनके लिए लगभग 40-45 सीटें खाली रखी गई हैं. जमात नेताओं ने उम्मीद जताई है कि वे जल्द ही अपना अंतिम निर्णय लेंगे.
संवाददाता सम्मेलन में जमात-ए-इस्लामी के अमीर डॉ. शफीकुर रहमान ने विशेष रूप से युवाओं को संबोधित किया. उन्होंने आह्वान किया, "युवाओं, तुम अपना वोट डालने जरूर आना और वोट का हिसाब लेकर ही घर लौटना." उन्होंने यह भी कहा कि इस बार चुनाव में किसी भी तरह की धांधली बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इसके साथ ही उन्होंने शहीद उस्मान बिन हादी के लिए न्याय की मांग करते हुए कहा कि ऐसे क्रांतिकारियों की हत्या का न्याय होना जरूरी है.
क्यों महत्वपूर्ण है यह गठबंधन?
यह चुनावी गठबंधन बांग्लादेश के राजनीतिक परिदृश्य को पूरी तरह से बदल सकता है. जमात-ए-इस्लामी ने 179 सीटों पर चुनाव लड़ने का फैसला कर यह साफ कर दिया है कि वह गठबंधन के भीतर सबसे बड़ी ताकत बनी रहेगी, वहीं NCP और खिलाफत मजलिस जैसे दलों को साथ लेकर उसने एक व्यापक 'इस्लामवादी और राष्ट्रवादी' मोर्चे को जन्म दिया है.
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