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बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को ही क्यों चुना अपनी 'आजादी' का दिन?

विभाजन के बाद कलात का राजनीतिक भविष्य धुंधला और अनिश्चितताओं से भरा रहा. बलूच राष्ट्रवादियों के ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, दिसंबर 1947 में कलात की विधायिका ने पाकिस्तान में शामिल होने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.

बलूचिस्तान ने 11 अगस्त को ही क्यों चुना अपनी 'आजादी' का दिन?
फाइल फोटो

पाकिस्तान 14 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस मनाता है. वहीं बलूचों ने उससे ठीक तीन दिन पहले यानी 11 अगस्त को बलूचिस्तान का 'स्वतंत्रता दिवस' की घोषणा कर दी है. यह तारीख दशकों पुराने उस ऐतिहासिक विवाद का प्रतीक है, जो 1947 में भारत के विभाजन और कलात रियासत के भविष्य से जुड़ा हुआ है.

बलूच राष्ट्रवादी आंदोलनों और कार्यकर्ताओं के लिए 11 अगस्त उस दौर की याद दिलाता है, जब उनके अनुसार बलूचिस्तान ने पाकिस्तान में विलय होने से पहले अपनी संप्रभुता की घोषणा की थी. पाकिस्तान जहां बलूचिस्तान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है, वहीं बलूच राष्ट्रवादी दावा करते हैं कि पाकिस्तान के अस्तित्व में आने से पहले ही इस क्षेत्र की अपनी एक अलग राजनीतिक पहचान थी.

11 अगस्त का असली महत्व क्या है?

11 अगस्त की इस तारीख का इतिहास तब शुरू होता है जब भारतीय उपमहाद्वीप में ब्रिटिश हुकूमत अपनी आखिरी सांसें गिन रहा था. उस वक्त कलात रियासत के शासक मीर अहमद यार खान का तर्क था कि उनकी रियासत ब्रिटिश भारत का हिस्सा नहीं थी और इसका दर्जा अन्य देशी रियासतों से अलग था. बलूच राष्ट्रवादियों का कहना है कि कलात की अपनी स्वतंत्र सत्ता थी और ब्रिटिश क्राउन के साथ उनके सीधे अलग समझौते थे.

इसी पृष्ठभूमि में 11 अगस्त 1947 को ब्रिटिश सरकार, कलात के खान और बनने वाले नए देश पाकिस्तान के प्रतिनिधियों के बीच एक 'स्टैंडस्टिल एग्रीमेंट'यानी यथास्थिति बनाए रखने का समझौता हुआ. 

बलूच राष्ट्रवादी समूह इस समझौते को इस बात के प्रमाण के तौर पर देखते हैं कि पाकिस्तान बनने से ठीक पहले कलात की स्वतंत्र स्थिति और संप्रभुता को आधिकारिक तौर से स्वीकार किया गया था. इस समझौते के तुरंत बाद कलात के खान ने स्वतंत्रता का ऐलान कर दिया और वहां दो सदनों वाला एक विधायी ढांचा तैयार किया गया.

फिर पाकिस्तान में कैसे मिल गए?

विभाजन के बाद कलात का राजनीतिक भविष्य धुंधला और अनिश्चितताओं से भरा रहा. बलूच राष्ट्रवादियों के ऐतिहासिक दस्तावेजों के मुताबिक, दिसंबर 1947 में कलात की विधायिका ने पाकिस्तान में शामिल होने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था.

लेकिन इसके बाद के महीनों में कलात और पाकिस्तान के रिश्ते तेजी से बिगड़े. 27 मार्च 1948 को पाकिस्तानी सेना कलात में दाखिल हो गई. इसके बाद कलात के खान ने विलय पत्र पर हस्ताक्षर कर दिए और यह पूरा क्षेत्र पाकिस्तान के नियंत्रण में आ गया.

बलूच राष्ट्रवादियों का पक्ष है कि यह एक जबरन किया गया कब्जा था, जिसने उनसे उनकी संप्रभुता और आजादी छीन ली

आज क्यों अहम है 11 अगस्त?

बलूच राष्ट्रवादी आंदोलनों के लिए 11 अगस्त का दिन इस बात का ऐतिहासिक दस्तावेज है कि बलूचिस्तान कभी एक स्वतंत्र राजनीतिक इकाई था. इस दिन बलूच एक्टिविस्ट और विदेशों में मौजूद बलूच समुदाय के लोग कार्यक्रम आयोजित करते हैं, बलूच झंडा फहराते हैं और अपने क्षेत्र की स्वायत्तता या पूर्ण आजादी की मांग करते हैं.

इसके ठीक विपरीत, 14 अगस्त को जब पाकिस्तान अपना स्वतंत्रता दिवस मनाता है, तब बलूच अलगाववादी समूह उस दिन को 'ब्लैक डे' (काला दिवस) के रूप में मनाते हैं और पाकिस्तान के नियंत्रण का विरोध दर्ज कराते हैं.

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