- ऑस्ट्रेलिया के एलिस स्प्रिंग्स में पांच वर्षीय आदिवासी बच्ची की हत्या के बाद इलाके में हिंसा और तनाव फैल गया
- बच्ची का नाम कुमांइजी लिटिल बेबी है. वह एक आदिवासी कैंप से रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी
- संदिग्ध आरोपी जेफरसन लुईस को गिरफ्तार कर अस्पताल ले जाया गया, जहां भीड़ ने उसे पीटने की कोशिश की
ऑस्ट्रेलिया के शहर एलिस स्प्रिंग्स में एक 5 साल की मासूम आदिवासी बच्ची की मौत के बाद गुस्सा इस कदर भड़क उठा कि पूरा इलाका जंग के मैदान की तरह तब्दील हो गया. मासूम की लाश मिलने की खबर जैसे ही फैली, लोगों का सब्र जवाब दे गया और उन्होंने उस अस्पताल को घेर लिया जहां बच्ची की हत्या के संदिग्ध का इलाज चल रहा था. प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हुई इस हिंसक झड़प में पुलिस की गाड़ी फूंक दी गई और कई सुरक्षाकर्मी घायल हो गए.

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मासूम की तलाश और दुखद अंत
बच्ची की हत्या के बाद इलाके में तनाव पसर गया. परिवार की इच्छा पर बच्ची को 'कुमांइजी लिटिल बेबी' (Kumanjayi Little Baby) नाम से संबोधित किया जा रहा है. यह बच्ची पिछले शनिवार की रात 'ओल्ड टाइमर्स' नामक एक आदिवासी कम्युनिटी कैंप से रहस्यमय तरीके से लापता हो गई थी. बच्ची को खोजने के लिए ऑस्ट्रेलिया की सरकार ने पूरी ताकत झोंक दी थी. पैदल जत्थों, घोड़ों और हेलीकॉप्टरों के जरिए बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन चलाया गया.
हर कोई उम्मीद कर रहा था कि बच्ची सही-सलामत मिल जाएगी, लेकिन गुरुवार को एलिस स्प्रिंग्स के दक्षिण में, कैंप से करीब 5 किलोमीटर दूर उसका शव बरामद हुआ. नॉर्दर्न टेरिटरी पुलिस कमिश्नर मार्टिन डोल ने कहा कि यह खबर पूरे समुदाय और पुलिस बल के लिए दिल तोड़ने वाली थी. मासूम की मौत की पुष्टि होते ही शांति का माहौल अचानक गुस्से और हिंसा में बदल गया.
आरोपी की पिटाई
पुलिस ने बच्ची का शव मिलने के कुछ ही घंटों बाद संदिग्ध आरोपी जेफरसन लुईस को गिरफ्तार करने का दावा किया. पुलिस के मुताबिक, लुईस ने खुद को एलिस स्प्रिंग्स के पास एक आदिवासी कैंप में लोगों के हवाले कर दिया था. इसके बाद वहां मौजूद भीड़ ने उसे तब तक बेरहमी से पीटा जब तक कि वह बेहोश नहीं हो गया. पुलिस ने बीच-बचाव कर उसे भीड़ से निकाला और इलाज के लिए एलिस स्प्रिंग्स अस्पताल ले गई.

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जैसे ही लोगों को पता चला कि आरोपी अस्पताल में है, करीब 200 से ज्यादा लोगों की गुस्साई भीड़ ने अस्पताल को चारों तरफ से घेर लिया. भीड़ का मकसद आरोपी को अपने हाथ में लेना था. पुलिस और एम्बुलेंस कर्मियों ने जब उसे बचाने की कोशिश की, तो भीड़ उन पर भी टूट पड़ी. प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोग चिल्ला रहे थे कि लुईस को 'पेबैक' मिलना चाहिए. ये मध्य ऑस्ट्रेलियाई आदिवासी समुदायों में एक पारंपरिक सजा का तरीका है.
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शहर में भारी हिंसा और आंसू गैस के गोले
अस्पताल के बाहर स्थिति इतनी अनियंत्रित हो गई कि पुलिस को आंसू गैस के गोलों का इस्तेमाल करना पड़ा. इस हिंसक टकराव में दो पुलिस अधिकारी, दो एम्बुलेंस कर्मचारी और एक फायर फाइटर घायल हो गए हैं. कमिश्नर डोल ने बताया कि पुलिस ने अपने पास उपलब्ध सभी संसाधनों को अस्पताल की सुरक्षा में लगा दिया था ताकि भीड़ आरोपी तक न पहुंच सके.
तनाव को देखते हुए और आरोपी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए पुलिस ने उसे गुपचुप तरीके से एलिस स्प्रिंग्स से हटाकर नॉर्दर्न टेरिटरी की राजधानी डार्विन भेज दिया है. फिलहाल बच्ची के शव का पोस्टमार्टम होना बाकी है, जिसके बाद आरोपी पर हत्या की औपचारिक धाराएं लगाई जाएंगी.
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