टीएमसी के 20 बागी सांसदों की नेशनलिस्ट सिटिजंस पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में विलय की याचिका को लोकसभा सचिवालय ने प्रोसेस कर रहा है. माना जा रहा है कि अगले 5-7 दिनों में ये प्रक्रिया पूरी होने की संभावना है. लोकसभा सचिवालय की आंतरिक समिति कर रही है याचिका की छानबीन. इस समिति में कानूनी विशेषज्ञ भी हैं.
समिति की रिपोर्ट आने के बाद लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला फैसला करेंगे. सूत्रों के अनुसार दसवीं अनुसूची के पैरा 4(2) के मुताबिक हो सकता है फैसला. इसके अनुसार यदि कोई राजनीतिक दल किसी दूसरी पार्टी में अपना विलय करता है, तो उसके विधायकों या सांसदों की सदस्यता सुरक्षित रहेगी. लेकिन इसके लिए दो-तिहाई का जादुई आंकड़ा होना अनिवार्य है.
टीएमसी के बागी सांसदों के मामले में 28 में से 20 सांसदों ने NCPI में विलय की याचिका दी है जो कि दो तिहाई से अधिक है. ऐसे में स्पीकर उनके विलय को मंजूरी देते हुए उन्हें मान्यता दे सकते हैं. इस तरह उनकी लोक सभा सदस्यता सुरक्षित रहेगी. साथ ही, उनके लोक सभा में बैठने की जगह भी बदली जा सकती है. वे अभी विपक्षी बेंचों पर बैठते हैं जो बदल कर सत्ता पक्ष की ओर की जा सकती है क्योंकि उन्होंने एनडीए को समर्थन देने की बात भी कही है.
गौरतलब है कि काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व में टीएमसी के 20 बागी सांसदों ने TMC से अलग होकर एक अनजान पार्टी NCPI में विलय का ऐलान किया है. कोकोली घोष और शताब्दी रॉय के नेतृत्व में सांसदों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से मिलकर विलय का पत्र सौंपा है.
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