- अगस्त 2026 दुनिया का सबसे गर्म महीना दर्ज किया गया, इस दौरान में धरती का औसत तापमान डेढ़ डिग्री से अधिक बढ़ा
- भारत में अगस्त 2026 ने 125 साल पुराना तापमान रिकॉर्ड तोड़ दिया, अब तक का सबसे गर्म महीना दर्ज किया
- पश्चिमी यूरोप में भीषण गर्मी से नदियों का बहाव कम हुआ और किसानों की फसलें खराब हो गईं
दुनियाभर में अगस्त जैसे आग उगल रहा था. इस महीने में सबसे ज्यादा गर्मी पड़ी. अगस्त को दुनियाभर में सबसे गर्म महीना रहा. EU की कोपरनिकस क्लाइमेट चेंज सर्विस ने इस बात का खुलासा किया है. उनके रिकॉर्ड के मुताबिक, अगस्त महीने में धरती का औसत ग्लोबल टेंपरेचर प्री-इंडस्ट्रियल लेवल से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा बढ़ा हुआ दर्ज किया गया, ये जानकारी रॉयटर्स के हवाले से सामने आई है.
पूरी दुनिया ने अगस्त में खराब मौसम और जलवायु से जुड़ी आपदाओं का कहर देखा. वैज्ञानिक का मानना है कि नेपाल और तिब्बत में लैंडस्लाइड और अचानक आई बाढ़ में हुईं सैकड़ों मौतें जलवायु परिवर्तन का नतीजा हो सकती हैं. हालांकि इसकी बारीकियों पर अभी स्टडी चल रही है.
दुनियाभर में अगस्त 2026 सबसे ज्यादा गर्मी
अगस्त में पहली बार दुनिया का औसत तापमान 16.96 डिग्री के औसत ग्लोबल सरफेस एयर टेम्परेचर के साथ प्री-इंडस्ट्रियल स्तर से 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा दर्ज किया गया. दुनियाभर में अगस्त 2026 इतना गर्म था, जितना कि साल 2023 में जुलाई का महीना था. C3S के मुताबिक, इतना तो 19वीं सदी में धरती का औसत तापमान भी नहीं था. अगस्त 2026 तो 19वीं सदी के धरती के औसत तापमान से 1.65 डग्री सेल्सियस ज्यादा गर्म रहा. ये वो समय था जब इंसानों ने तेल, कोयला और गैस का इस्तेमाल बड़े स्तर पर शुरू नहीं किया था.
भारत में भी अगस्त में पड़ी झुलसाने वाली गर्मी
भारत मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, भारत में भी अगस्त महीने में गर्मी ने 125 साल पुराना रिकॉर्ड तोड़ दिया.अगस्त 2026 1901 के बाद अब तक का सबसे गर्म महीना दर्ज किया गया.अगस्त 2026 का औसत और न्यूनतम तापमान ऐतिहासिक स्तर पर रहा.
खतरे के स्तर से पार पहुंचा धरती का तापमान
दुनियाभर में अगस्त महीने में सिर्फ बारिश ने ही कहर नहीं बरपाया सूखे ने भी कई देशों को खूब रुलाया. इंडोनेशिया से लेकर ग्रीस और बेल्जियम तक जंगल में आग देखी गई, जबकि हंगरी और रोमानिया भयंकर सूखे से जूझ रहे थे. औद्योगिक क्रांति से पहले के समय से अगर तुलना करें तो तापमान का 1.5 डिग्री सेल्सियस से ज्यादा होना खतरे का संकेत है. यह वार्मिंग का वह लेवल है, जिसे रोकने का वादा 200 देशों ने 2015 के पेरिस जलवायु समझौते में किया था. जिससे दुनिया जलवायु परिवर्तन के बुरे कहर से बच सके.
पश्चिमी यूरोप गर्मी से बेहाल
आंकड़ों के मुताबिक, पश्चिमी यूरोप अब तक की सबसे ज्यादा गर्मी से जूझ रहा है. गर्मी की वजह से नदियों में पानी का बहाव कम रहा, मिट्टी की नमी सूझ गई, जिससे किसान बहुत परेशान हैं. मई के बाद से लगातार पड़ रही भीषण गर्मी की वजह से किसानों की फसलें खराब हो रही हैं.संयुक्त राष्ट्र ने दुनियाभर की सरकारों से CO2 उत्सर्जन में तेजी से कटौती करने को कहा है, ताकि बढ़ते तापमान को कम किया जा सके.
झुलस रही जमीन, तप रहा समुद्र
अगस्त 2026 की गर्मी ने जमीन जमीन को ही नहीं झुलसाया है बल्कि समुद्री को भी तपा दिया.C3S के मुताबिक, अगस्त में दुनिया के महासागरों में अब तक का सबसे ज्यादा समुद्री सतह का तापमान दर्ज किया गया. अल नीनो मौसम पैटर्न बनने की वजह से ट्रॉपिकल पैसिफिक में तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया. आने वाले महीनों में इसके और बढ़ने की आशंका है, जिससे ग्लोबल तापमान और बढ़ सकता है.
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