- एंथ्रोपिक के AI मॉडल क्लॉड फेबल 5 और माइथोस 5 पर अमेरिकी सरकार द्वारा लगा बैन हट गया है
- अमेरिकी सरकार ने देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए इन AI मॉडल को दूसरे देशों में उपलब्ध कराने पर रोक लगा दी थी
- यह मॉडल कुछ मामलों में हैकिंग और साइबर सुरक्षा के काम में इंसानों से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं
दुनिया के सबसे ताकतवर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस मॉडल (AI मॉडल) पर अमेरिकी सरकार का लगाया बैन अब हट गया है. एंथ्रोपिक ने कहा कि रोक हटाने के बाद वह जल्द ही अपने सबसे ताकतवर AI मॉडल फेबल 5 और माइथोस 5 की पहुंच दुनिया भर में फिर से शुरू करेगी. यह कोई आम AI नहीं है. इसे बनाने वाली कंपनी यानी एंथ्रोपिक खुद ही दावा करती है कि यह कुछ मामलों में हैकिंग और साइबर सुरक्षा के काम में इंसानों से भी बेहतर प्रदर्शन कर सकता है. इसी वजह से अमेरिका ने पहले राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देकर इस पर रोक लगा दी थी. अब डोनाल्ड ट्रंप की सरकार ने यह बैन हटा लिया है.
कंपनी ने क्या कहा?
एंथ्रोपिक कंपनी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, "हमें सूचना मिली है कि अमेरिका के वाणिज्य विभाग ने क्लॉड फेबल 5 और माइथोस 5 के दूसरे देश में निर्यात पर लगे प्रतिबंध हटा दिए हैं. हम कल से इनकी पहुंच फिर से शुरू करेंगे."
We've received notice that the Department of Commerce has lifted export controls on Claude Fable 5 and Mythos 5.
— Anthropic (@AnthropicAI) June 30, 2026
We'll begin restoring access tomorrow, and will share an update soon.
We're grateful to our users for their patience, and to everyone who worked with us on…
दरअसल 12 जून को अमेरिकी सरकार ने देश की सुरक्षा का हवाला देते हुए इन AI मॉडल को दूसरे देशों में उपलब्ध कराने पर रोक लगा दी थी. सरकार का कहना था कि टूल के गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए लगाए गए सुरक्षा उपायों में कुछ कमजोरियां मिली थीं. कंपनी ने फिर इन AI मॉडल को पूरी तरह हटा लिया. एएफपी की रिपोर्ट के अनुसार अभी सिर्फ चार दिन पहले ही कंपनी ने बताया था कि उसे ट्रंप सरकार से अनुमति मिल गई है, जिसके बाद अमेरिका की कुछ चुनिंदा साइबर सुरक्षा कंपनियों को माइथोस 5 का इस्तेमाल करने दिया गया.
पोलिटिको की रिपोर्ट के अनुसार, 26 जून को लिखे एक लेटर में अमेरिकी वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने कहा कि एंथ्रोपिक ने इन AI मॉडल से जुड़े खतरों को कम करने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ मिलकर काम किया है.
चिंता क्यों है?
एंथ्रोपिक का कहा था कि इन AI मॉडल की टेस्टिंग के दौरान उसने पाया कि यह साइबर सुरक्षा और हैकिंग के काम में बेहद माहिर है और कई मामलों में इंसानों से बेहतर प्रदर्शन करता है. 7 अप्रैल को कंपनी ने दावा किया था कि माइथोस प्रीव्यू पहले ही हजारों गंभीर सुरक्षा खामियां खोज चुका है. इनमें लगभग हर बड़े ऑपरेटिंग सिस्टम और वेब ब्राउजर की कमजोरियां शामिल हैं. कंपनी ने कहा कि जिस तेजी से AI आगे बढ़ रहा है, उसे देखते हुए जल्द ही ऐसी क्षमताएं बहुत फैल जाएंगी. तब यह तकनीक ऐसे लोगों के हाथों में भी पहुंच सकती है जो इसका सुरक्षित इस्तेमाल नहीं करेंगे.
कंपनी के अनुसार, यह AI बिना ज्यादा निगरानी के पुराने कंप्यूटर सिस्टम में मौजूद बेहद गंभीर सुरक्षा खामियां खोज सकता है, जिन्हें तुरंत ठीक करने की जरूरत होती है. उसने एक ऐसी कमजोरी भी ढूंढी जो 27 साल से एक सिस्टम में मौजूद थी. इतना ही नहीं, यह उन कमजोरियों का फायदा उठाने के तरीके भी बता सकता है.
इसके बाद कई देशों के वित्त मंत्रियों, केंद्रीय बैंक के अधिकारियों और वित्तीय क्षेत्र के बड़े लोगों ने गंभीर चिंता जताई. उन्हें डर है कि यह AI भविष्य में पूरी वित्तीय व्यवस्था की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता है.
पिछले हफ्ते ही अमेरिका की खुफिया एजेंसी CIA के डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने इन सबसे एडवांस AI मॉडल की ताकत की तुलना परमाणु हथियारों से की थी. वॉशिंगटन में एडब्ल्यूएस समिट के दौरान रैटक्लिफ ने कहा, "राष्ट्रपति के राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक सुरक्षा सलाहकारों के साथ हमारी बातचीत में इन आधुनिक AI मॉडल के असर पर चर्चा होती है... इनकी ताकत को डिजिटल परमाणु हथियार कहना गलत नहीं होगा."
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