वाशिंगटन:
भारत और अमेरिका अपने सहयोग का दायरा अंतरिक्ष से जुड़ी गतिविधियों तक बढ़ाने पर सहमत हो गए हैं। इन गतिविधियों में मौसम और मानसून के अनुमान से लेकर चंद्र, मंगल मिशन सहित अंतरिक्ष खोज में सहयोग शामिल हैं।
दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (नासा) के बीच इस सहमति की घोषणा अमेरिका-भारत असैन्य अंतरिक्ष संयुक्त कार्यकारी समूह (सीएसजेडब्लयूजी) की एक बैठक के बाद शुक्रवार को की गई।
बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, "2008 में भारत के अति सफल चंद्रयान-1 चंद्र मिशन में नासा द्वारा किए गए सहयोग से आगे बढ़ते हुए नासा और इसरो चंद्र और मंगल के भावी मिशनों सहित अन्य सहकारी अंतरिक्ष खोज कार्य के लिए सहमत हुए हैं।"
बयान में कहा गया है, "इस क्रम मेंसहयोग के सम्भावित क्षेत्रों की पहचान के लिए सीएसजेडब्ल्यूजी, ग्रह विज्ञान और हेलियोफिजिक्स में लगातार चर्चा करने पर सहमत हैं।"
बयान में आगे कहा गया है कि अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और भारतीय रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (आरआरएनएसएस) के बीच अनुकूलता और अंतरसक्रियता को बढ़ावा देने में भी लगातार प्रगति हो रही है।
बयान में कहा गया है कि ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम्स पर अंतर्राष्ट्रीय समिति जैसी द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संस्थाओं में इस क्षेत्र में और काम होंगे।
दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष और अन्य नीतिगत मुद्दों पर जानकारियों का आदान-प्रदान किया और कहा कि इस दिशा में जारी प्रयास सहयोग के नए अवसर तैयार करेंगे।
दोनों पक्षों ने एल और एस-बैंड एसएआर मिशन में प्रस्तावित नासा-इसरो सहयोग के साथ आगे बढ़ने में पर्याप्त कार्यक्रमगत रुचि और वैज्ञानिक योग्यता की पुष्टि की है।
बैठक के प्रारम्भ में नासा के प्रशासक चार्ल्स बोल्डन ने स्थिर विकास को बढ़ावा देने के लिए सुदूर अंतरिक्ष खोज से लेकर पृथ्वी निगरानी उपग्रह जैसी अत्याधुनिक परियोजनाओं पर भारत-अमेरिका सहयोग में हुई आशाजनक वृद्धि को रेखांकित किया।
अमेरिका में भारत की राजदूत निरूपमा राव ने कहा कि सीएसजेडब्लयूजी अमेरिका-भारत साझेदारी में एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है। उन्होंने सुझाया कि दोनों पक्षों को सहयोग के नए क्षेत्रों की लगातार तलाश करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस रिश्ते का कोई अंतिम छोर नहीं है।
दोनों देशों की अंतरिक्ष एजेंसियों- भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) और राष्ट्रीय वैमानिकी एवं अंतरिक्ष प्रशासन (नासा) के बीच इस सहमति की घोषणा अमेरिका-भारत असैन्य अंतरिक्ष संयुक्त कार्यकारी समूह (सीएसजेडब्लयूजी) की एक बैठक के बाद शुक्रवार को की गई।
बैठक के बाद जारी एक संयुक्त बयान में कहा गया है, "2008 में भारत के अति सफल चंद्रयान-1 चंद्र मिशन में नासा द्वारा किए गए सहयोग से आगे बढ़ते हुए नासा और इसरो चंद्र और मंगल के भावी मिशनों सहित अन्य सहकारी अंतरिक्ष खोज कार्य के लिए सहमत हुए हैं।"
बयान में कहा गया है, "इस क्रम मेंसहयोग के सम्भावित क्षेत्रों की पहचान के लिए सीएसजेडब्ल्यूजी, ग्रह विज्ञान और हेलियोफिजिक्स में लगातार चर्चा करने पर सहमत हैं।"
बयान में आगे कहा गया है कि अमेरिकी ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) और भारतीय रीजनल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (आरआरएनएसएस) के बीच अनुकूलता और अंतरसक्रियता को बढ़ावा देने में भी लगातार प्रगति हो रही है।
बयान में कहा गया है कि ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम्स पर अंतर्राष्ट्रीय समिति जैसी द्विपक्षीय और बहुपक्षीय संस्थाओं में इस क्षेत्र में और काम होंगे।
दोनों पक्षों ने अंतरिक्ष और अन्य नीतिगत मुद्दों पर जानकारियों का आदान-प्रदान किया और कहा कि इस दिशा में जारी प्रयास सहयोग के नए अवसर तैयार करेंगे।
दोनों पक्षों ने एल और एस-बैंड एसएआर मिशन में प्रस्तावित नासा-इसरो सहयोग के साथ आगे बढ़ने में पर्याप्त कार्यक्रमगत रुचि और वैज्ञानिक योग्यता की पुष्टि की है।
बैठक के प्रारम्भ में नासा के प्रशासक चार्ल्स बोल्डन ने स्थिर विकास को बढ़ावा देने के लिए सुदूर अंतरिक्ष खोज से लेकर पृथ्वी निगरानी उपग्रह जैसी अत्याधुनिक परियोजनाओं पर भारत-अमेरिका सहयोग में हुई आशाजनक वृद्धि को रेखांकित किया।
अमेरिका में भारत की राजदूत निरूपमा राव ने कहा कि सीएसजेडब्लयूजी अमेरिका-भारत साझेदारी में एक महत्वपूर्ण स्तम्भ है। उन्होंने सुझाया कि दोनों पक्षों को सहयोग के नए क्षेत्रों की लगातार तलाश करते रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि इस रिश्ते का कोई अंतिम छोर नहीं है।