- दुनिया की बड़ी AI कंपनियों के 11000 से ज्यादा कर्मचारियों ने एक याचिका पर हस्ताक्षर कर ट्रंप की मदद मांगी
- इन्होंने अमेरिकी सरकार से कहा कि सबसे ताकतवर AI मॉडल को तेजी से जारी करने की रफ्तार धीमी कराने में वह मदद करे
- OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने कहा कि सिंगुलैरिटी का दौर अब शुरू हो चुका है यानी तकनीक इंसानी कंट्रोल से बाहर है
दुनिया की जो बड़ी कंपनियां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस यानी AI को डेवपल कर रही हैं, वे ही अब उसकी बढ़ती ताकत से डरने लगी हैं. वे खुद अब उसकी ताकत को कंट्रोल करने के लिए मदद मांगने लगी हैं. दुनिया की बड़ी AI कंपनियों के 11000 से ज्यादा कर्मचारियों ने मंगलवार, 28 जुलाई को एक याचिका पर हस्ताक्षर किए. इन AI एक्सपर्ट्स ने अमेरिकी सरकार से कहा है कि सबसे ताकतवर AI मॉडल को तेजी से जारी करने की रफ्तार धीमी कराने में मदद की जाए. साइन करने वालों में एंथ्रोपिक के CEO डारियो अमोडेई भी शामिल हैं.
इस याचिका का नाम 'पेसिंग द फ्रंटियर' है. इसमें कहा गया है कि अमेरिकी सरकार दुनिया के दूसरे देशों के साथ मिलकर ऐसी टेक्नोलॉजी और नियम बनाने में मदद करे, जिनसे सबसे एडवांस AI के विकास की रफ्तार को सोच-समझकर कंट्रोल किया जा सके. वैसे तो OpenAI के CEO सैम ऑल्टमैन ने इस याचिका पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, लेकिन मंगलवार को छपे एक इंटरव्यू में उन्होंने भी कहा कि AI बनाने वाली कंपनियों को शायद अपनी मर्जी से AI की तेज रफ्तार थोड़ी कम करनी पड़े, ताकि समाज को इसके साथ तालमेल बैठाने का समय मिल सके.
AI एक्सपर्ट्स को क्या डर सता रहा?
इस याचिका पर OpenAI के रिसर्च हेड, गूगल की AI कंपनी डीपमाइंड के रणनीतिक प्रमुख और मेटा AI के मुख्य वैज्ञानिक ने भी साइन किए हैं. इस याचिका में लिखा है, "दुनिया की सबसे बड़ी AI कंपनियों का मानना है कि वे जल्द ही AI से AI पर रिसर्च कराने के करीब पहुंच सकती हैं. यह बताना मुश्किल है कि इससे AI कितनी तेजी से आगे बढ़ेगा, लेकिन खतरा यह है कि AI की ताकत इतनी तेजी से बढ़ सकती है कि हम उसे समझने या कंट्रोल करने में पीछे रह जाएं."
क्या AI इंसानों से आगे निकलने वाला है?
यह पहली बार नहीं था जब कोई AI मॉडल अपने डेवलपर्स के कंट्रोल से बाहर गया हो. लेकिन इस घटना को पहले की घटनाओं के मुकाबले ज्यादा गंभीर माना गया. इसके बाद OpenAI ने अपनी टेस्टिंग कुछ समय के लिए रोक दी. इस दौरान कंपनी ने अपने 'सैंडबॉक्सिंग' सिस्टम की सुरक्षा मजबूत की. सैंडबॉक्सिंग वह तरीका है, जिसमें कोड को एक सीमित और सुरक्षित माहौल में चलाकर टेस्ट किया जाता है. सैम ऑल्टमैन ने कहा कि लंबे समय में AI इंडस्ट्री को मिलकर AI के विकास की रफ्तार धीमी करने पर सहमत होना पड़ सकता है.
उन्होंने कहा, "हमें AI के विकास की रफ्तार थोड़ी कम करनी पड़ सकती है, ताकि समाज को AI की नई और ज्यादा ताकतवर क्षमताओं के हिसाब से खुद को तैयार करने का समय मिल सके." उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा तरीका अपनाना होगा जिससे यह न लगे कि कुछ कंपनियां नियमों का फायदा अपने लिए बना रही हैं, या बड़ी AI कंपनियां आपस में मिलकर बाकी कंपनियों के खिलाफ काम कर रही हैं.
हम सिंगुलैरिटी के दौर में आ चुके हैं- सैम ऑल्टमैन
सैम ऑल्टमैन ने कहा कि इसके लिए काफी काम करना होगा और इसे सही तरीके से करना बहुत जरूरी है. शनिवार को जारी एक दूसरे पॉडकास्ट "रिलेंटलेस" में सैम ऑल्टमैन ने कहा कि उनके हिसाब से सिंगुलैरिटी का दौर अब शुरू हो चुका है. सिंगुलैरिटी वह काल्पनिक स्थिति मानी जाती है, जब तकनीक इंसानों की बुद्धि और नियंत्रण से भी आगे निकल जाती है. ऑल्टमैन ने कहा, "हम अब सिंगुलैरिटी के दौर में हैं. यही वह समय है."
AI कंपनी एंथ्रोपिक भी पहले से AI के विकास की रफ्तार जानबूझकर धीमी करने के पक्ष में रही है. इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए एंथ्रोपिक और OpenAI के कुछ नए और ताकतवर AI मॉडल जारी होने से रोक दिए थे. दोनों कंपनियों ने सरकार के इस आदेश का पालन किया था. बाद में यह रोक हटा ली गई.
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