अमेरिका की ईरान को खुली धमकी
अमेरिका और ईरान के बीच रिश्ते कैसे हैं, ये किसी से छुपा नहीं है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी (Donald Trump Threaten Iran) देते हुए कहा कि अगर वह न्यूक्लियर डील पर सहमति नहीं बनाता है, तो उसके खिलाफ सख्त एक्शन लिया जाएगा. एनबीसी न्यूज के मुताबिक, ट्रंप ने एक इंटरव्यू में कहा कि अगर ईरान डील नहीं करता है, तो अमेरिका ऐसी बमबारी करेगा, जो पहले कभी नहीं देखी होगी. इसके साथ भी टैरिफ भी लगाया जाएगा. ट्रंप ने ये चेतावनी ऐसे समय में दी है, जब ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर वाशिंगटन और तेहरान के बीच तनाव बढ़ गया है. सवाल ये भी है कि क्या ट्रंप की ईरान को ये आखिरी धमकी है?
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- ट्रंप ने इससे पहले मार्च में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को चिट्ठी लिखकर चेतावनी दी थी कि तेहरान को या तो नए सिरे से बातचीत के लिए सहमत होना पड़ेगा वरना सैन्य टकराव झेलना पड़ेगा.
- ईरान ने अमेरिका के प्रस्ताव को सीधे तौर पर खारिज कर दिया. राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन की ओर से ईरान के सर्वोच्च नेता को भेजी गई चिट्ठी में कहा गया है कि तेहरान वाशिंगटन के साथ सीधी बातचीत नहीं करेगा.
- ईरानी संसद के स्पीकर गलीबाफ ने कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान को धमकाया तो वह भी ये बात समझ ले कि वह भी एक बम के ढेर पर बैठा है. अगर ईरान पर हमला हुआ, तो अमेरिका और उसके सहयोगियों को पूरे क्षेत्र में असुरक्षा झेलनी पड़ेगी.
- अमेरिका ने 2018 में समझौते से खुद को अलग कर लिया और 'अधिकतम दबाव' की नीति के तहत प्रतिबंध लगा दिए. ये प्रतिबंध ईरान के साथ व्यापार करने वाले सभी देशों और कंपनियों पर लागू हैं.
- इन लोगों ने तेहरान को अंतरराष्ट्रीय वित्तीय प्रणाली से अलग कर दिया, जिससे परमाणु समझौते के आर्थिक प्रावधान शून्य हो गए.
- अप्रैल 2021 में ऑस्ट्रिया के वियना में JEPOA को फिर से लागू करने के लिए बातचीत शुरू हुई. कई राउंड की वार्ता के बावजूद, अगस्त 2022 में अंतिम दौर की वार्ता के बाद से कोई खास कामयाबी हासिल नहीं हुई है.
अमेरिका को ईरान की दो टूक
ऐसा लगता है कि ट्रंप की चेतावनी से ईरान को जैसे कोई फर्क ही नहीं पड़ रहा. वह अपनी जिद पर अड़ा है. ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई ने ट्रंप के प्रस्ताव को ठुकराते हुए कहा कि ईरान धमकाने वाली सरकारों के साथ बातचीत नहीं करेगा.
अमेरिका-ईरान के बीच कब से है तनाव?
बता दें कि 1979 में ईरानी क्रांति के बाद से, ईरान के संबंध अमेरिका और उसके सहयोगियों के साथ तनावपूर्ण हो गए हैं. बंधक संकट के बाद दोनों देशों ही देशों ने रिश्ते तोड़ लिए. दोनों देशों के बीच 1980 के बाद से कोई औपचारिक राजनयिक संबंध भी नहीं रहे. अमेरिका से 1995 से ईरान के साथ व्यापारिक संबंधों पर प्रतिबंध लगा दिया था.
ईरान के खिलाफ अमेरिका का एक और कदम
अमेरिका ने इजरायल को ईरान और उसके प्रॉक्सी संगठनों के खिलाफ कार्रवाई का अधिकार दे दिया है. इजरायल के पास अब ये अधिकार है कि वह अमेरिका से पूछे बिना ईरान और उसके प्रॉक्सी के खिलाफ हमले कर सकता है. ट्रंप ने न सिर्फ ईरान के साथ युद्ध के दरवाजे खोल दिए, बल्कि वह अयातुल्ला खुमैनी के सामने जंग का बिगुल भी फूंक रहे हैं.
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