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This Article is From May 29, 2025

600 दिन, 54 हजार लाशें… युद्ध के बीच भुखमरी से तबाह हो रहा गाजा

रिपोर्ट्स के मुताबिक हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोगों को कूड़े के ढेर में खाना तलाश करना पड़ रहा है. एक मां, अपने बच्चों को बचाने के लिए जले हुए चावल और सूखी रोटियों को उबालकर पेट भरने की कोशिश करती है.

7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था यह संघर्ष.

इजरायल और हमास के बीच जारी जंग को आज 600 दिन बीत चुके हैं. 600 दिनों से मध्य पूर्व को खून, आंसू और तबाही के अंधकार में डुबो रखा है. एक ऐसा संघर्ष जो सिर्फ दो पक्षों की लड़ाई नहीं है, बल्कि लाखों मासूमों के अस्तित्व का सवाल बन चुका है. 7 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ यह संघर्ष अब 600 दिन पार कर चुका है. दुनिया ने शायद उस दिन यह अंदाजा नहीं लगाया था कि यह हिंसा, इतनी गहराई तक आम जिंदगियों को चीर डालेगी.

गाजा की जमीन पर सिर्फ गोलियां और मिसाइलें नहीं उम्मीदें, सपने और इंसानियत भी गिरी

आंकड़ों की बात करें तो मरने वालों की संख्या पचास हजार के पार है, और घायलों की तादाद लाखों में. लेकिन इन आंकड़ों के पीछे सिर्फ हथियार नहीं भूख, बीमारी और बंद होती जिंदगी की रेखाएं भी जिम्मेदार हैं. कुछ महीनों पहले सीमाओं को पूरी तरह सील कर दिया गया. न खाना पहुंच सका, न दवाइयां, न राहत. जो जिंदा हैं, वे हर रोज जिंदा रहने की जद्दोजहद में हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि लोगों को कूड़े के ढेर में खाना तलाश करना पड़ रहा है. एक मां, अपने बच्चों को बचाने के लिए जले हुए चावल और सूखी रोटियों को उबालकर पेट भरने की कोशिश करती है. ये सिर्फ भुखमरी नहीं भारी तबाही का मंजर है. हाल ही में कुछ राहत सामग्री पहुंची जरूर, लेकिन हालात इतने विस्फोटक थे कि भीड़ ने नियंत्रण तोड़ दिया और सुरक्षा बलों ने जवाब में गोली चला दी. इस अफरातफरी में कई लोगों की जान चली गई, और दर्जनों घायल हो गए.

बंधकों की वापसी की बात करें तो अब तक 148 लोग लौटे हैं. कभी समझौते के तहत, कभी बिना किसी डील के, और कभी सैन्य कार्रवाई से. लेकिन सैकड़ों अभी भी लापता हैं, और उन्हें वापस लाने के लिए राजनयिक कोशिशें जारी हैं. संघर्षविराम को लेकर बयानबाजी तो तेज है, लेकिन कोई साफ रास्ता नहीं दिखता. इजरायल जमीन पर बड़े हमले की बात करता है, तो हमास संघर्षविराम की शर्तें बदलता है. बीच में हैं बिचौलिये देश — मिस्र, कतर, और अमेरिका जो बैकफुट पर हैं. 600 दिन… और अब भी कोई स्पष्ट अंत नहीं.

इस समय, जब दुनिया विज्ञान, विकास और कूटनीति की बात करती है —एक पूरा इलाका भूख, बंदूक और बर्बादी के दलदल में डूबा हुआ है.

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अनुषी गुप्ता
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