उत्तराखंड की चारधाम यात्रा शुरू हुए 55 दिन हो गए हैं, इस बीच 31 लाख से अधिक तीर्थयात्रियों ने चारों धाम के दर्शन किए हैं. सबसे अधिक यात्री केदारनाथ पहुंचे, इसके बाद बद्रीनाथ गंगोत्री और यमुनोत्री में तीर्थ यात्री ने दर्शन किए. चारधाम यात्रियों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन चिंता की बात यह है कि 55 दिनों की यात्रा में 161 यात्रियों की मौत भी हो चुकी है. इनमें 160 यात्रियों की मौत स्वास्थ्य खराब होने और 1 यात्री की मौत प्राकृतिक आपदा की वजह से हुई है.
चारधाम यात्रा के दौरान कहां हुई कितनी मौतें?
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केदारनाथ की चढ़ाई सबसे कठिन
चारधाम यात्रा में केदारनाथ और यमुनोत्री धाम की चढ़ाई सबसे कठिन है. केदारनाथ धाम में 21 किलोमीटर की कठिन पैदल चढ़ाई है तो यमुनोत्री धाम में 5 किलोमीटर की कठिन चढ़ाई है. हालांकि, यमुनोत्री और बद्रीनाथ धाम के लिए ज्यादा पैदल नहीं चलना होता है, यहां गाड़ियां मंदिर से करीब 200 मीटर दूरी पर पार्क होते हैं. फिर भी इन जगहों पर भी जान गंवाने वालों की संख्या अधिक है. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या यात्री अपनी बीमारी या कोई अन्य शारीरिक परेशानी को छिपा कर दर्शन करने पहुंच रहे हैं.

एक दिन रुक कर उच्च हिमालय क्षेत्र में जाएं यात्री
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स्वास्थ्य को लेकर उत्तराखंड सरकार ने क्या इंतजाम किए?
सरकार की तरफ से चारधाम यात्रा में 47 परमानेंट डेडीकेटेड हॉस्पिटल से इसके अलावा अस्थाई तौर पर 25 मेडिकल अस्पताल बनाए गए हैं. स्वास्थ्य विभाग ने 57 स्क्रीनिंग केंद्र भी अलग-अलग जगह पर बनाए हैं जो देहरादून, हरिद्वार, रुद्रप्रयाग, चमोली और उत्तरकाशी में हैं. केदारनाथ में 17 बेड और बद्रीनाथ धाम में 45 बेड का अस्पताल बनाया गया है. 25 स्पेशलिस्ट डॉक्टर, 178 मेडिकल ऑफिसर्स, 414 पैरामेडिकल स्टाफ को पदस्थ किया गया है. इसके अलावा फिजिशियन, ऑर्थोपेडिक, एनएस्थेसिसटी और गाइनेकोलॉजिस्ट की भी तैनाती की गई है.

हार्ट अटैक से हो रही सबसे अधिक मौतें
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5.5 लाख से अधिक लोगों की स्क्रीनिंग की गई
डॉ विमलेश जोशी ने बताया कि चार धाम यात्रा में अब तक साढ़े पांच लाख से ज्यादा लोगों की स्क्रीनिंग की गई है. 20000 से ज्यादा तीर्थ यात्रियों को हल्की-फुल्की बीमारियां दी थी, जिन्हें दवा दी गई. 78 से ज्यादा मरीजों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू कर अस्पताल पहुंचाया गया, जबकि 650 से ज्यादा मरीजों को एंबुलेंस के जरिए अस्पताल में भर्ती कराया गया. डॉ विमलेश जोशी ने बताया कि बहुत बड़ी तादात में यात्री आ रहे हैं, अगर किसी को हार्ट अटैक आता है तो उसे अस्पताल पहुंचने में समय लग जाता है, इससे उसकी मौत मौके हो जाती है. हालांकि, डॉक्टर या पैरेट मेडिक टीमों द्वारा उन्हें फर्स्ट एड दिया जाता है, लेकिन हायर सेंटर पहुंचने में समय लग जाता है.
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