- रामलिंगम हत्याकांड में NIA ने PFI से जुड़े 4 पूर्व कार्यकर्ताओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की.
- आरोप है कि चारों आरोपियों ने थिरुभुवनम हमले में शामिल फरार आरोपियों को जानबूझकर कई वर्षों तक शरण दी थी.
- रामलिंगम की हत्या 2019 में जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध करने पर हुई थी, जिसमें पीएफआई सदस्यों ने हिंसा की थी.
NIA ने प्रतिबंधित संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) से जुड़े 4 पूर्व कार्यकर्ताओं के खिलाफ चार्जशीट दार किया है. इन पर आरोप है कि उन्होंने रामलिंगम हत्याकांड में शामिल फरार आरोपियों को कई वर्षों तक शरण दी. यह आरोपपत्र चेन्नई के पूनमल्ली स्थित विशेष एनआईए अदालत में दाखिल किया गया है, जिसमें के. मोहिदीन, मोहम्मद इमरान, थमीम अंसारी और असमत के नाम शामिल हैं.
NIA के अनुसार, ये चारों आरोपी थिरुभुवनम में रामलिंगम पर हुए हमले में शामिल हमलावरों और साजिशकर्ताओं को जानते थे, फिर भी उन्होंने उन्हें जानबूझकर छिपाकर रखा. एनआईए का कहना है कि यह हमला सांप्रदायिक तनाव फैलाने और आतंक पैदा करने की एक सोची-समझी साजिश का हिस्सा था. चारों आरोपियों पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 61(2) और 249 के साथ-साथ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) की धारा 19 के तहत आरोप लगाए गए हैं.
धर्म परिवर्तन का विरोध करने पर हुई थी हत्या
यह मामला 5 फरवरी 2019 से जुड़ा है, जब रामलिंगम ने जबरन धर्म परिवर्तन का विरोध किया था. इसी को लेकर पीएफआई सदस्यों के साथ कहासुनी हुई और उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई. एनआईए की जांच में पता चला कि चारों आरोपियों ने मोहम्मद बुरहानुद्दीन और मोहम्मद नबील हसन जैसे मुख्य आरोपियों को करीब छह साल तक शरण दी.
इससे पहले एनआईए इस मामले में 18 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है, जिसमें छह फरार आरोपी भी शामिल थे. बाद में चार फरार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. एजेंसी ने अन्य शरण देने वाले लोगों के खिलाफ भी कार्रवाई की है और यह जांच अभी जारी है.
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