विज्ञापन

6 साल बाद फिर शुरू होगा भारत-तिब्बत-चीन सीमा व्यापार, 1 अगस्त को सजेगी तकलाकोट मंडी

करीब छह साल बाद तकलाकोट मंडी का रास्ता खुलने के साथ ही व्यापारियों की उम्मीदें भी लौट आई हैं. पहले चरण में 20 सदस्यीय दल सीमा पार व्यापार के लिए रवाना होगा.

6 साल बाद फिर शुरू होगा भारत-तिब्बत-चीन सीमा व्यापार, 1 अगस्त को सजेगी तकलाकोट मंडी
भारत- चीन सीमा पर व्यापार फिर से शुरू हो रहा है.

करीब छह साल से बंद भारत-तिब्बत-चीन सीमा व्यापार आखिरकार एक बार फिर शुरू होने जा रहा है. चीन की ओर से अनुमति मिलने के बाद 1 अगस्त 2026 से व्यापारिक गतिविधियां दोबारा शुरू होंगी. लंबे इंतजार के बाद मिली इस खबर से सीमांत क्षेत्रों के व्यापारियों में भारी उत्साह है. व्यापारियों को उम्मीद है कि इससे न केवल पुराने कारोबारी संबंध बहाल होंगे बल्कि सीमावर्ती क्षेत्रों की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी.

लिपुलेख दर्रे के रास्ते पहुंचेगा पहला व्यापारिक दल

उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले के धारचूला से लिपुलेख दर्रे के रास्ते व्यापारियों का पहला दल तिब्बत स्थित तकलाकोट मंडी के लिए रवाना होगा. पहले चरण में 20 सदस्यीय दल जाएगा जिसमें 16 व्यापारी और 4 हेल्पर शामिल हैं. सभी सदस्य गुंजी पहुंच चुके हैं और उनकी इमिग्रेशन संबंधी औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं.

पिथौरागढ़ के जिलाधिकारी आशीष भटगांई के अनुसार 1 अगस्त को पहला बैच तकलाकोट मंडी के लिए रवाना होगा. इसके बाद अन्य व्यापारिक दल भी व्यापार के लिए सीमा पार जाएंगे.

सदियों पुराना है भारत-तिब्बत व्यापार का इतिहास

भारत और तिब्बत के बीच व्यापार का इतिहास बेहद पुराना रहा है. सीमावर्ती क्षेत्रों के लोग वर्षों से एक-दूसरे के साथ वस्तुओं का आदान-प्रदान करते रहे हैं. तिब्बत की तकलाकोट मंडी कभी इस क्षेत्र का प्रमुख व्यापारिक केंद्र मानी जाती थी, जहां भारत, तिब्बत और चीन के व्यापारी बड़ी संख्या में पहुंचते थे.

यहां ऊन, पश्मीना, नमक, सुहागा, याक के बाल, खाल, मक्खन, जड़ी-बूटियां, शिलाजीत, घोड़े और बकरियों का व्यापार होता था. वहीं भारत से चावल, गेहूं, आटा, खाद्यान्न, सूती कपड़े, कंबल, ऊनी वस्त्र, मसाले, गुड़, सूखे मेवे और वनस्पति तेल जैसी वस्तुएं भेजी जाती थीं.

कई दर्रों से होता था सीमापार कारोबार

लिपुलेख दर्रा इस व्यापार का प्रमुख मार्ग रहा है. इसके अलावा चमोली जिले के माणा और नीति दर्रे तथा उत्तरकाशी की नेलांग घाटी और ऐतिहासिक गरतांग गली के रास्ते भी पुराने समय में सीमापार व्यापार हुआ करता था. इन मार्गों का स्थानीय लोगों की आजीविका और सांस्कृतिक संबंधों में महत्वपूर्ण योगदान रहा है.

चीन की मंजूरी के बाद दूर हुई व्यापारियों की चिंता

भारत-चीन सीमा व्यापार मूल रूप से 1 जुलाई से शुरू होना था लेकिन चीन की ओर से समय पर अनुमति नहीं मिलने के कारण इसमें देरी हुई. कोविड-19 महामारी के बाद व्यापार पूरी तरह बंद हो गया था जिससे कई व्यापारियों का लाखों रुपये का सामान तकलाकोट क्षेत्र में फंसा रह गया था.

भारत सरकार ने व्यापार के लिए 154 ट्रेड पास जारी किए थे लेकिन चीन की स्वीकृति न मिलने के कारण कारोबारी सीमा पार नहीं जा सके. अब अनुमति मिलने के बाद व्यापारियों को राहत मिली है और वे नए उत्साह के साथ कारोबार शुरू करने की तैयारी में जुट गए हैं.

सीमांत क्षेत्र को मिलेगा आर्थिक बल

विशेषज्ञों का मानना है कि सीमा व्यापार की बहाली से सीमावर्ती गांवों में आर्थिक गतिविधियां बढ़ेंगी, रोजगार के अवसर पैदा होंगे और भारत-तिब्बत के पारंपरिक व्यापारिक संबंधों को नई ऊर्जा मिलेगी. छह साल बाद खुल रही तकलाकोट मंडी से व्यापारियों को बड़े कारोबार की उम्मीद है.

यह भी पढ़ें- E20 पेट्रोल के बीच भारतीय सेना को मिला स्वदेशी XWG डीजल, माइनस 42°C में भी नहीं जमेगा, क्यों है इतना खास?

पूरी स्टोरी पढ़ें

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
India Trade, India-china Trade, Uttarakhand News
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com