महंगी कारें, आलीशान मकान और लग्जरी लाइफस्टाइल के साथ अब वीआईपी वाहन नंबर भी लोगों के लिए स्टेटस सिंबल बनते जा रहे हैं. उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में हुई वीआईपी नंबरों की ऑनलाइन नीलामी ने एक बार फिर इस बढ़ते क्रेज को सामने ला दिया है. यहां वाहन मालिकों ने पसंदीदा नंबर हासिल करने के लिए लाखों रुपये खर्च कर दिए.
13.91 लाख में बिका '0001' नंबर
देहरादून में हुई ऑनलाइन नीलामी में सबसे अधिक चर्चा UK07HP 0001 नंबर की रही. इस नंबर के लिए देहरादून निवासी हरजिंदर सिंह ने 13 लाख 91 हजार रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाकर इसे अपने नाम किया. दिलचस्प बात यह रही कि हरजिंदर सिंह ने केवल एक नहीं बल्कि दो वीआईपी नंबर खरीदे. उन्होंने UK07HP 0003 नंबर के लिए भी 9 लाख 4 हजार रुपये की बोली लगाई. इस तरह दोनों नंबरों पर उन्होंने कुल 22 लाख 95 हजार रुपये खर्च किए.
0001 से 0009 तक के नंबरों की सबसे ज्यादा मांग
आरटीओ अधिकारियों के अनुसार 0001, 786 और 0001 से 0009 तक की सीरीज वाले नंबरों की मांग सबसे ज्यादा रहती है. कई लोग अपनी गाड़ी को अलग पहचान देने और सामाजिक प्रतिष्ठा दिखाने के लिए इन नंबरों पर बड़ी रकम खर्च करते हैं. कई बार पसंदीदा नंबर की कीमत वाहन की कीमत के बराबर या उससे भी अधिक पहुंच जाती है. यही वजह है कि हर नीलामी में इन नंबरों के लिए कड़ी प्रतिस्पर्धा देखने को मिलती है.
अन्य नंबरों पर भी लगी लाखों की बोली
इस बार सिर्फ 0001 और 0003 नंबर ही आकर्षण का केंद्र नहीं रहे. कई अन्य नंबरों के लिए भी वाहन मालिकों ने खुलकर बोली लगाई.
UK07HP0005 : 3.95 लाख रुपये
UK07HP0002 : 3.50 लाख रुपये
UK07HP9999 : 2.83 लाख रुपये
UK07HP0008 : 1.86 लाख रुपये
UK07HP1111 : 1.68 लाख रुपये
UK07HP9000 : 1.68 लाख रुपये
महीने में दो बार होती है नीलामी
देहरादून के आरटीओ संदीप कुमार सैनी ने बताया कि वीआईपी नंबरों के लिए हर महीने दो बार ऑनलाइन नीलामी आयोजित की जाती है. पहली नीलामी महीने की पहली तारीख को और दूसरी 16 तारीख को होती है.
उन्होंने बताया कि 0001 और 786 जैसे लोकप्रिय नंबरों की बोली में हिस्सा लेने के लिए आवेदक को एक लाख रुपये की सुरक्षा राशि जमा करनी होती है. अन्य विशेष नंबरों के लिए 25 हजार रुपये की राशि जमा करनी पड़ती है. आरटीओ के अनुसार इच्छुक व्यक्ति ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी बोली लगाते हैं. निर्धारित अवधि पूरी होने के बाद सबसे अधिक बोली लगाने वाले व्यक्ति को वह नंबर आवंटित कर दिया जाता है.
यह भी पढ़ें- मराठी पर छिड़ी जंग HC पहुंची, ड्राइवरों ने उठाया सवाल- लाइसेंस देने में नहीं पूछी जाती भाषा; दिलचस्प दलीलें
NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं