सपा विधायक सचिन यादव को यूपी विधानसभा के मॉनसून सत्र से निलंबित कर दिया गया है. सिर पर पट्टी और गले में तख्ती बांधकर विधानसभा पहुंचने के चलते उन पर यह एक्शन सदन के स्पीकर सतीश महाना ने यह एक्शन लिया है. युवा विधायक सचिन यादव पहले भी इस तरह के प्रदर्शनों के चलते चर्चा में रहे हैं, लेकिन अबकी बार विधानसभा स्पीकर ने सख्त एक्शन लिया है. भले ही उन्हें सदन से सत्र भर के लिए बाहर किया गया है, लेकिन सचिन यादव सड़क की राजनीति में इसके जरिए खुद को स्थापित करना चाहेंगे. वह 2022 में फिरोजाबाद की जसराना सीट से पहली बार विधायक बने थे. यादव बहुल फिरोजाबाद जिले से सचिन का विधायक बनना बताता है कि वह अखिलेश यादव और परिवार के कितनी करीबी हैं.
सचिन यादव को अनुशासनहीनता और सदन की कार्यवाही में बाधा डालने के आरोप में निलंबित किया गया है. असल में सचिन को लेकर एक्शन की नौबत तब आई, जब सीएम योगी आदित्यनाथ के भाषण के बीच वह पोस्टर दिखाने लगे और हंगामा शुरू कर दिया. इस दौरान स्पीकर महाना ने चेतावनी भी दी थी, लेकिन इस पर भी सचिन यादव शांत नहीं हुए तो निलंबन की कार्रवाई करनी पड़ी. यह भी कहा कि अब भी सचिन यादव का यही रुख रहा तो अगली बार उनकी सदस्यता ही रद्द की जा सकती है.
पहले भी सचिन यादव अपने आक्रामक तेवरों के लिए चर्चित रहे हैं. मंगलवार को तो वह सदन में सिर पर पट्टी और गले में तख्ती लटका कर ही पहुंच गए. सिर पर पट्टी में यह भी लिखवा रखा था कि FIR नहीं संवाद करो. दरअसल वह यह संदेश देना चाहते थे कि सरकार को नीट पेपर लीक के खिलाफ आंदोलन करने वालों से संवाद करना चाहिए. सचिन यादव सपा के युवा और तेजतर्रार नेताओं में से एक हैं. भले ही वह पहली बार के ही सांसद हैं, लेकिन उन्हें अखिलेश यादव के करीबी विधायकों शुमार किया जाता है. वह वीरपाल सिंह यादव के बेटे हैं, जो सपा के नेता रहे हैं.
विधायक सचिन यादव ने 2009 में डॉ. भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी आगरा से एमए की पढ़ाई पूरी की थी. उनकी पत्नी एक बिजनेस वुमन हैं. उन्होंने 2022 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी की ओर से जसराना विधानसभा सीट से जीत हासिल की. उन्हें 108,289 वोट मिले और उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी मानवेंद्र लोधी को 836 वोटों के अंतर से हराया.
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