- VHP के अध्यक्ष आलोक कुमार ने राम मंदिर में कथित गड़बड़ियों की जांच के लिए तुरंत कानूनी कार्रवाई की मांग की
- आलोक ने फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और दोषियों को सजा देने सहित जांच में तेजी लाने की भी सार्वजनिक अपील की
- आलोक कुमार ने दोषियों को सख्त सजा दिए जाने की मांग उठाई है
अयोध्या में ऐतिहासिक राम जन्मभूमि मंदिर की पवित्रता और उससे जुड़े हितों की रक्षा के लिए विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के अंतरराष्ट्रीय अध्यक्ष आलोक कुमार ने तत्काल कानूनी कदम उठाने की जोरदार सार्वजनिक अपील की है. आलोक कुमार ने एक्स पर एक पोस्टर शेयर किया, जिसमें उगते सूरज की रोशनी में भव्य राम मंदिर की तस्वीर थी. इस पोस्टर में उन्होंने मंदिर ट्रस्ट में कथित गड़बड़ियों को दूर करने के लिए चार मुख्य मांगें रखीं. 'अयोध्या राम जन्मभूमि मंदिर के मामले में' शीर्षक वाले इस पोस्टर में अधिकारियों से ठोस कदम उठाने की अपील की गई.
VHP की चार प्रमुख मांगें
- कानूनी कार्यवाही शुरू करने के लिए तुरंत एफआईआर दर्ज की जाए
- मंदिर से जुड़े मामलों की चल रही या जरूरी जांच में तेजी लाई जाए
- रोजाना सुनवाई और समय पर न्याय सुनिश्चित करने के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट बने या उसे सक्रिय किया जाए
- दोषियों को सजा मिलनी चाहिए.
राम मंदिर चढ़ावा चोरी पर आलोक कुमार की मांग
आलोक कुमार ने पोस्टर में अपना संदेश 'जय श्री राम' के साथ खत्म किया. उनकी अपील श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के दान पात्रों (हुंडी) में जमा दान में कथित गड़बड़ियों से जुड़ी है. यह ट्रस्ट 2019 में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 2020 में बनाया गया था ताकि अयोध्या राम मंदिर के निर्माण और कामकाज को संभाला जा सके. भक्तों के दान से जुड़ी कथित वित्तीय गड़बड़ियों के कारण ट्रस्ट जांच के घेरे में आ गया है.
We demands that in Ayodhya Ram Mandir case...
— Vishva Hindu Parishad -VHP (@VHPDigital) June 24, 2026
1. FIR should be filled
2. Investigation be expedited
3. Fast rack court to take-up the matter on day to Day basis and;
4. Guilty persons to suffer their punishment
- Alok Kumar, Int'l President VHP pic.twitter.com/Wn5nLyKesm
दान पात्रों और अभियानों के जरिए अरबों रुपए नकद, सोना, चांदी और कीमती सामान इकट्ठा किया गया था, लेकिन गायब फंड को लेकर गंभीर सवाल उठे हैं. शुरू में इसका अनुमान 7-7.5 करोड़ रुपए लगाया गया था, लेकिन बाद में यह दावा किया गया कि यह रकम सैकड़ों करोड़ रुपए की है.
जमीन डील को लेकर भी विवाद
एक बड़ा विवाद 2021 की जमीन की डील को लेकर है, जिसमें ट्रस्ट ने कथित तौर पर 18.5 करोड़ रुपए में एक प्लॉट खरीदा, जबकि उससे कुछ ही मिनट पहले एक सहयोगी ने उसे 2 करोड़ रुपए में खरीदा था. इससे ज्यादा कीमत चुकाने और जनता के दान के संभावित दुरुपयोग का शक पैदा हुआ.
जून 2026 में, पूर्व कर्मचारियों और कार्यकर्ताओं के नए आरोपों ने राजनीतिक हलचल मचा दी, जिसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने ट्रस्ट के ही अनुरोध पर तीन सदस्यीय स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एसआईटी) का गठन किया. एसआईटी दान के हिसाब-किताब, जमीन के लेन-देन, गायब कीमती सामान और प्रक्रिया में हुई खामियों की जांच कर रही है.
फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई की मांग
आलोक कुमार ने जनता का भरोसा बहाल करने के लिए एफआईआर, तेजी से जांच, फास्ट-ट्रैक कोर्ट में सुनवाई और दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है. ट्रस्ट ने किसी भी बड़ी गड़बड़ी से इनकार किया है और कहा कि अभी ऑडिट चल रहा है, जबकि इस विवाद के कारण ज्यादा पारदर्शिता की मांग भी बढ़ रही है.
यह नई मांग ऐसे समय में उठी है जब अयोध्या राम मंदिर को लेकर देश भर में लगातार दिलचस्पी बनी हुई है. 2019 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले से दशकों पुराने विवाद सुलझने के बाद, जनवरी 2024 में इस मंदिर का उद्घाटन किया गया था. तब से यह मंदिर एक प्रमुख तीर्थ स्थल और हिंदू सांस्कृतिक पुनरुत्थान का प्रतीक बन गया है.
कानून के तहत सख्ती से निपटा जाए
वीएचपी नेताओं का हमेशा से यह कहना रहा है कि मंदिर की पवित्रता को कमजोर करने की किसी भी कोशिश, चाहे वह तोड़-फोड़, अतिक्रमण या प्रशासनिक लापरवाही के जरिए हो, से कानून के तहत सख्ती से निपटा जाना चाहिए. तेजी से न्यायिक प्रक्रिया पूरी करने की मांग यह दिखाती है कि हिंदू संगठन अयोध्या आंदोलन के ज़रिए मिली मुश्किल से हासिल जीत को सुरक्षित रखने को लेकर कितने गंभीर हैं.
इनपुट-IANS
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