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This Article is From Aug 21, 2017

उत्कल एक्सप्रेस हादसे में बचे यात्रियों की जुबानी- मैंने डिब्बों को पटरी से दूर उछलते देखा...

हादसे में बच गए एक यात्री ने बताया कि वह ट्रेन के एस-2 डिब्बे में थे, जो एक घर में चल रहे स्कूल में घुस गया.

उत्कल एक्सप्रेस हादसे में बचे यात्रियों की जुबानी- मैंने डिब्बों को पटरी से दूर उछलते देखा...
उत्कल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे पटरी से उतरे थे.
  • खतौली के पास हुआ था हदसा
  • पटरी से उतर गई थी ट्रेन
  • स्थानीय लोगों ने की मदद
नई दिल्ली: अब भी सदमे से गुजर रहे उत्कल एक्सप्रेस ट्रेन के यात्रियों का कहना है कि हादसे में मरने वालों की संख्या और बढ़ सकती थी, लेकिन स्थानीय निवासियों ने जिस तेजी से मदद की, उससे बहुतों की जान बच गई. सभी पीड़ितों ने उनकी मदद में जी जान से जुटे स्थानीय निवासियों की भरपूर तारीफ की. उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों ने दुर्घटनाग्रस्त डिब्बों में फंसे लोगों को बचाया. कई लोग इसी वजह से जिंदा बच सके क्योंकि स्थानीय लोगों ने उन्हें आनन-फानन में अस्पतालों तक पहुंचाया. और, उन्होंने यह सब उस वक्त किया जब आधिकारिक राहत एवं बचाव कार्य शुरू भी नहीं हुआ था. शनिवार की शाम पुरी से हरिद्वार जा रही कलिंग उत्कल एक्सप्रेस के 14 डिब्बे उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के नजदीक खतौली में पटरी से उतर गए, जिसमें 23 से अधिक लोगों की मौत हो गई. राहत दल पहुंचने से पहले ही स्थानीय निवासियों ने एकदूसरे पर चढ़े और बुरी तरह क्षतिग्रस्त डिब्बों में फंसे यात्रियों को बाहर निकाला और उन्हें अस्पताल पहुंचाया. 

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हादसे में बच गए एक यात्री ने बताया कि वह ट्रेन के एस-2 डिब्बे में थे, जो एक घर में चल रहे स्कूल में घुस गया. उन्होंने पत्रकारों को बताया, "मैं हरिद्वार जा रहा था. मैं नींद में था, तभी अचानक तेज झटका महसूस हुआ. मैंने सोचा चालक ने आपात ब्रेक लगाए हैं, लेकिन उसके बाद मैंने डिब्बों को पटरी से दूर उछलते देखा." उन्होंने बताया कि उनका डिब्बा जिस घर से टकराया था, उसी घर के निवासियों ने उन्हें बचाया. उन्होंने कहा, "वे जल्दी से आए और लोगों के समूह ने मुझे डिब्बे से बाहर निकाला."

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हादसे में ट्रेन के दो डिब्बे (एस-1 और एस-2) और रसोईयान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हुए हैं. हादसे में बच गए यात्रियों ने बताया कि स्थानीय निवासियों बहुत तेजी से न सिर्फ रेल यात्रियों के लिए बल्कि राहत में लगे लोगों के लिए भी पानी, भोजन और चाय की व्यवस्था की. ट्रेन में सफर कर रहे एक साधु ने बताया कि उन्हें जिन लोगों ने बचाया, वे मुस्लिम थे. आभार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा, "मैं एस-2 कोच में फंसा हुआ था. तभी मुस्लिमों के एक समूह ने मेरी पुकार सुनी और मुझे बाहर निकाला."

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हादसे की भयावहता बयान करते हुए एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा कि उन्होंने अन्य लोगों के साथ क्षतिग्रस्त डिब्बों से लोगों के शव निकाले और उनमें से कुछ के अंग गायब थे. उन्होंने कहा, "मेरी ईश्वर से प्रार्थना है कि किसी को ऐसा डरावना मंजर न दिखाए. पहले तो हमने देखा कि रेल के डिब्बे हवा में पांच-पांच फुट तक उछल गए और उसके बाद एकदूसरे पर चढ़ गए. डिब्बों से कटी-फटी लाशें बाहर निकालना डरावना था."

इनपुट- आईएनएस

 
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