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ओम प्रकाश राजभर क्या पूर्वांचल में कर देंगे बड़ा खेल? ब्राह्मण समीकरण साधने की कोशिश

यूपी विधानसभा चुनाव में अभी भले ही एक साल का वक़्त बचा हो लेकिन अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिशें अभी से शुरू हो गई हैं. क्या सत्ता और क्या विपक्ष, हर कोई समीकरण साधने में जुट चुका है.

ओम प्रकाश राजभर क्या पूर्वांचल में कर देंगे बड़ा खेल? ब्राह्मण समीकरण साधने की कोशिश
  • ओम प्रकाश राजभर ने आगामी रविवार को आजमगढ़ में सामाजिक समरसता महारैली आयोजित करने का ऐलान किया है
  • राजभर ने दावा किया है कि इस रैली में एक लाख से अधिक लोग और दस हजार से ज्यादा ब्राह्मण शामिल होंगे
  • राजभर अब केवल राजभर या ओबीसी के नेता नहीं रहकर सर्वसमाज में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं
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यूपी विधानसभा चुनाव में अभी भले ही एक साल का वक़्त बचा हो लेकिन अपनी ताकत बढ़ाने की कोशिशें अभी से शुरू हो गई हैं. क्या सत्ता और क्या विपक्ष, हर कोई समीकरण साधने में जुट चुका है. इस बीच यूपी के चर्चित नेता और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर कुछ बड़ा करने जा रहे हैं. राजभर एनडीए में रहते हुए अपनी ताकत भी बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं और अपना दायरा भी.

एक लाख की भीड़ इकट्ठी होगी?

दरअसल अब तक राजभर समाज और कुछ ओबीसी जातियों के नेता माने जाने वाले यूपी के मंत्री और सुभासपा के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर पूर्वांचल में अपनी ताकत दिखाने जा रहे हैं. आजमगढ़ में आने वाले रविवार को राजभर ने एक रैली का आयोजन किया है. इस रैली को लेकर ओम प्रकाश राजभर का दावा है कि एक लाख से ज़्यादा भीड़ इकट्ठी होगी. इसमें दस हजार से ज्यादा ब्राह्मणों की भी भागीदारी होगी.

सर्वमान्य नेता बनने की कोशिश

आजमगढ़ के अतरौलिया में होने वाली इस रैली का नाम सामाजिक समरसता महारैली दिया गया है. खास बात ये है कि इसमें जो एक लाख की भीड़ इकट्ठी करने का दावा किया जा रहा है, उसमें दावा ये है कि दस हजार ब्राह्मण भी मौजूद होंगे. यानी ओम प्रकाश राजभर अब राजभर या ओबीसी के नेता नहीं बल्कि सर्वसमाज में अपना प्रभाव बढ़ाने की कवायद में जुट गए हैं. ब्राह्मणों को जुटाने का संदेश उनकी इस कोशिश का हिस्सा दिखाई पड़ता है.

ब्राह्मणों की खूब डिमांड

वर्तमान में ब्राह्मणों की राजनीति अपने चरम पर है. हर राजनैतिक दल ब्राह्मणों को साधने में जुटा हुआ है. बीजेपी मानती है कि ब्राह्मण उसका साथ छोड़कर नहीं जा सकता वहीं समाजवादी पार्टी ने भी सॉफ्ट हिंदुत्व को राह पकड़कर ब्राह्मणों को साथ लाने की हरसंभव कोशिश की है. मायावती भी सर्वजन की हिमायती बनते हुए सवर्ण और ब्राह्मण हिट की बात कह रही हैं.

आबादी कम लेकिन असर ज़्यादा

उत्तर प्रदेश में ब्राह्मणों की आबादी 12 तीसरी के आसपास मानी जाती है. हालांकि राजनैतिक विशेषज्ञ कहते हैं कि एक ब्राह्मण औसतन दो वोट प्रभावित करने की क्षमता रखता है. यही वजह है कि बीजेपी, सपा, कांग्रेस, बसपा से लेकर क्षेत्रीय दल भी ब्राह्मणों को साथ लाने की कोशिश करते रहते हैं. इस बार ये कोशिश सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर करते हुए दिखाई दे रहे हैं.

ब्राह्मण विवाद शुरू कैसे हुआ?

दरअसल पिछले साल विधानसभा के शीतकालीन सत्र के दौरान कुछ ब्राह्मण विधायक मिलने इकट्ठा हुए. इस मिलन की तस्वीर सामने आई तो हंगामा हो गया. विपक्ष ने कहा कि सत्तारूढ़ दल के ब्राह्मण विधायक दुखी हैं और इसलिए बैठक कर रहे हैं.अभी विवाद थमता, उससे पहले बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी ने नोटिस देकर ब्राह्मणों से सख़्ती कर दी. इसके बाद से हर कोई ये साबित करने में लगा है कि ब्राह्मण बीजेपी से छिटक रहा है.

महारैली का कितना होगा असर?

सुभासपा अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर अपनी बेबाक बोली और ज़मीनी पकड़ के लिए जाने जाते हैं. बोलने में बेबाकी कभी कभी विवाद खड़ा कर देती है लेकिन गांव गांव संगठन तैयार करके राजभर ने पूर्वांचल में अपनी पैठ मज़बूत कर ली है. रविवार को अगर दावे के मुताबिक भीड़ इकट्ठी हो गई तो रैली भले आज़मगढ़ में हो रही है लेकिन इसका असर लखनऊ से लेकर दिल्ली तक जाएगा. हालांकि अगर भीड़ इकट्ठी नहीं हो पाई तो इस दावे की हवा निकलते देर भी नहीं लगेगी. फिलहाल सबको इंतजार है रविवार का.
 

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