- यूपी में अभी 23 जिले बाढ़ की चपेट में हैं. सूबे में 1,311 राहत केंद्र बनाए गए हैं.
- प्रतापगढ़ और अमरोहा में बारिश से जुड़ी घटनाओं में 3 की मौत हुई है.
- बलिया, पीलीभीत, चित्रकूट और लखीमपुर में नदियों का जलस्तर खतरे के ऊपर पहुंच चुका है.
उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में भी बाढ़ की स्थिति बनी हुई है. अब तक प्रभावित 35 जिलों में से 23 जिले अभी भी बाढ़ की चपेट में हैं. अधिकारियों ने बताया है कि अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया है, जिनमें से 3,042 लोगों को बुधवार को बचाया गया. बारिश से जुड़ी घटनाओं में तीन लोगों की मौत हुई है. प्रतापगढ़ के 18 महीने का प्रियांश और अमरोहा के गजरौला में 32 साल के शेरा और 55 साल के सुरेश की मौत हुई है. सरकार ने बताया कि राहत और बचाव कार्यों के लिए 1,499 नावें और मोटरबोट तैनात की गई हैं, जबकि 1,067 मेडिकल टीमें काम पर लगाई गई हैं.
राहत के लिए जमीन पर उतरीं एजेंसियां...
सरकार ने 1,311 बाढ़ राहत केंद्र बनाए हैं, जिनमें से 201 अभी चालू हैं. राहत एजेंसियों ने घर टूटने के 442 मामलों में मदद भी पहुंचाई है, जबकि 36,287 पशु प्रभावित हुए हैं. चित्रकूट में 42वीं बटालियन PAC (प्रांतीय सशस्त्र कांस्टेबुलरी) की मोटरबोट की मदद से मंदाकिनी नदी के किनारे बसे चौरा गांव से करीब 150 लोगों को बचाया गया. बचाए गए लोगों को खाना, राहत का सामान और मेडिकल मदद भी दी गई.
बलिया में गंगा और सरयू नदियों का जलस्तर बढ़ने से करीब 20,500 लोग प्रभावित हुए हैं. 83 नावें तैनात की गई हैं, जबकि 6,500 राशन किट, 33,843 दवा किट और 83,092 पके हुए खाने के पैकेट बांटे गए हैं.
कुल 16,629 पशुओं का टीकाकरण किया गया है और 965 क्विंटल चारा उपलब्ध कराया गया है. बाढ़ चौकियां, नेशनल डिजास्टर रिस्पॉन्स फोर्स (NDRF) और PAC की टीमें भी तैनात की गई हैं. अधिकारियों ने बताया कि गोपालनगर टाडी और भोजपुरवा में राहत शिविर और कम्युनिटी किचन बनाए गए हैं.
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पीलीभीत में शारदा, देओहा और खाकरा नदियों का जलस्तर बढ़ रहा था. बनबसा से शारदा नदी में दो लाख क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया और नानक सागर से देओहा नदी में 30,000 क्यूसेक से ज्यादा पानी छोड़ा गया. 1 से 8 तक की क्लासेज बंद कर दी गईं, जबकि खाकरा पुल के डूबने से करीब 18 गांवों का संपर्क टूट गया.
निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर जाने की सलाह दी गई है. 200 बेड वाले मेडिकल कॉलेज में, अंडरग्राउंड केबल बॉक्स में बारिश का पानी घुसने की वजह से 34 घंटे से ज्यादा वक्त तक मुख्य बिजली सप्लाई बंद रही और जनरेटर का इस्तेमाल किया गया.
अधिकारियों ने बताया कि पालिया में शारदा नदी का जलस्तर खतरे के निशान (154.59 मीटर) से 35 सेंटीमीटर ऊपर था और स्थिर बना हुआ था. खेती की जमीन और गांवों तक जाने वाली सड़कें पानी में डूब गई थीं, हालांकि किसी भी गांव के पूरी तरह बाढ़ की चपेट में आने की खबर नहीं है.
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बांटी जा रही राहत सामग्री...
राहत सामग्री बांटने का काम भी तेज कर दिया गया है. अब तक अनाज के 68,953 पैकेट और खाने के 3.36 लाख से ज्यादा पैकेट बांटे जा चुके हैं. पानी से होने वाली बीमारियों को रोकने में मदद के लिए 5.02 लाख से ज्यादा क्लोरीन की गोलियां और 1.77 लाख से ज्यादा ORS पैकेट बांटे गए हैं. इससे पहले, सरकार ने 1,640 खाद्यान्न पैकेट, 16,190 लंच पैकेट, 18,000 से ज्यादा क्लोरीन पैकेट और 7,000 से ज्यादा ओआरएस पैकेट वितरित किए जाने की जानकारी दी थी.
प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में लोगों को सतर्क रहने और स्थानीय अधिकारियों द्वारा जारी निर्देशों का पालन करने की सलाह दी है. गाजियाबाद में 4 सितंबर तक येलो अलर्ट जारी किया गया है. निवासियों को भारी बारिश के दौरान सावधानी बरतने और जलभराव वाले क्षेत्रों से बचने की सलाह दी गई है.
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