Farming Success Story: सेना से रिटायरमेंट लेकर खेती शुरू करने वाले कर्नल सुभाष देशवाल (Retired Colonel Subhash Deshwal) ने गाजर उत्पादन में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. तकनीक और प्लानिंग से आज 100 करोड़ रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया. कर्नल सुभाष देशवाल आज 'कैरट किंग' के नाम से मशहूर हो चुके हैं. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने दोस्त लाल किशन यादव के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद में महज 2 एकड़ जमीन पर गाजर की खेती शुरू की. उनके पास खुद की जमीन नहीं थी, इसलिए उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का मॉडल अपनाया और आज यह 1500 एकड़ में कारोबार फैला दिया. बता दें कि यूपी सरकार ने 2025 में कैरट किंग सुभाष देशवाल को 'यूपी गौरव सम्मान' से सम्मानित किया था.

उनके खेतों में उग रही गाजर दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई जैसे बड़े शहरों में सप्लाई होती है. (फोटो क्रेडिट- फेसबुक/ Sunshine Vegetables Private Limited)
सुभाष देशवाल ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का मॉडल अपनाया
मूल रूप से हरियाणा के निवासी कर्नल सुभाष देशवाल वर्ष 2006 में सेना से कर्नल पद पर सेवानिवृत्त हुए थे. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने अपने एक दोस्त के साथ उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के सिकंदराबाद में महज 2 एकड़ जमीन पर गाजर की खेती शुरू की. उनके पास खुद की जमीन नहीं थी, इसलिए उन्होंने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग का मॉडल अपनाया. उनकी मेहनत और नई सोच का ही नतीजा है कि आज उनका खेती का कारोबार 1500 एकड़ में फैल चुका है. शुरुआत में वो 8-10 टन गाजर का पैदा लेते थे, लेकिन आज 35-40 टन पैदावार ले रहे हैं. बता दें कर्नल देशवाल शुरुआत में विभिन्न सब्जियों की खेती की, लेकिन विलायती गाजर में उन्हें सबसे बड़ी सफलता मिली.

विलायती गाजर की खेती. (फोटो क्रेडिट- फेसबुक/ Sunshine Vegetables Private Limited)
कर्नल सुभाष देशवाल का मानना है कि केवल खेती करने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि किसान को खुद को एक उद्यमी के रूप में भी विकसित करना पड़ता है. वो कहते हैं, 'सिर्फ फसल उगा लेने से बात नहीं बनेगी. किसानों को बिजनेस की सोच अपनानी होगी. छोटी जोत वाले किसानों को समूह बनाकर काम करना चाहिए और एक-दूसरे से जुड़ना चाहिए. इससे लागत कम होती है और बाजार तक पहुंच आसान बनती है.

(फोटो क्रेडिट- फेसबुक/ Sunshine Vegetables Private Limited)
रिटायरमेंट के बाद खेती की बारीकियां सीखीं
कर्नल देशवाल आगे कहते हैं, 'सरकार भी किसानों को कई तरह की सब्सिडी और योजनाओं का लाभ दे रही है. हमने खेती शुरू करने के लिए जमीन किराये पर ली थी. केवल जमीन का मालिक होना किसी को सफल किसान नहीं बना सकता. अगर आपको कामयाब किसान बनना है, तो खेती की बारीकियां सीखनी होंगी.

(फोटो क्रेडिट- फेसबुक/ Sunshine Vegetables Private Limited)
शून्य से शुरुआत
कर्नल सुभाष देशवाल ने जब खेती की शुरुआत की थी, तब उन्हें खेती की ज्यादा जानकारी नहीं थी. वो कहते हैं कि हमने शून्य से शुरुआत की, लगातार सीखा और नए प्रयोग किए. अमेरिका आज भी हमारे देश से ज्यादा आलू अत्पादन करता है. इस खेती ने हमे इतना दिया, शायद वो कोई और नहीं दे सकती थी... पैसा और सम्मान दोनों दिया.

(फोटो क्रेडिट- फेसबुक/ Sunshine Vegetables Private Limited)
कर्नल सुभाष देशवाल कहते हैं कि उन्होंने गाजर उत्पादन की लागत को काफी कम कर दिया है, जिससे खेती को अधिक लाभकारी बनाया जा सका. उनका मानना है कि आज खेती के क्षेत्र में पढ़े-लिखे युवाओं के आने की सबसे ज्यादा जरूरत है. हमारे देश में ऐसी सोच बन गई है कि अगर किसी पढ़े-लिखे युवक को चपरासी की नौकरी भी मिल जाए, तो वह खुद को धन्य समझने लगता है. यही वजह है कि आज बहुत कम युवा खेती को करियर के रूप में चुनना चाहते हैं. वो कहते हैं, 'मेरा बेटा इंफोसिस में काम करता था, लेकिन उसने नौकरी छोड़कर वापस लौट आया.

(फोटो क्रेडिट- फेसबुक/ Sunshine Vegetables Private Limited)
इस खेती को बिना पढ़ा लिखा भी किसान इस खेती को कर सकते हैं. आज सरकार एग्रीकल्चर पर जोड़ दे रहा है. सरकार खेती के लिए सब्सिडी दे रही है. हमने अवसेंटी खेत मालिक का जमीन लिया, जो नौकरी के सिलसिले में बाहर चला गया हो और उसका जमीन खाली पड़ा हो. उन्हें एडवांस में पैसे दिए. हमने पेंशन से काम किया.
50 हजार टन उत्पादन और देशभर में सप्लाई आज कर्नल देशवाल की कंपनी सन साइन वेजिटेबल प्राइवेट लिमिटेड के जरिए सालाना 50 हजार टन विलायती गाजर का उत्पादन हो रहा है. उनकी गाजर कश्मीर से कन्याकुमारी तक प्रमुख मंडियों में बिक रही है. इसके अलावा, दवा, सॉस, बेबी फूड, नूडल्स और फूड सप्लीमेंट बनाने वाली कंपनियों को भी सप्लाई की जाती है.
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