- संभल हिंसा के दौरान पुलिस फायरिंग मामले में अनुज चौधरी समेत 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश था
- FIR दर्ज करने का आदेश संभल के तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी को दिया था
- यूपी सरकार और अनुज चौधरी ने सीजेएम के आदेश को रद्द कराने के लिए इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की है
संभल के पूर्व चर्चित पुलिस अधिकारी अनुज चौधरी और अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने के आदेश का मामला अब इलाहाबाद हाई कोर्ट पहुंच गया है. संभल की कोर्ट ने नवंबर 2024 में हुई संभल हिंसा के मामले में अनुज चौधरी समेत दर्जनों पुलिसकर्मियों पर FIR दर्ज करने का आदेश दिया था. अब यूपी सरकार और पुलिसकर्मियों ने इस आदेश को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए इसे रद्द करने की मांग की है. इस मामले पर जल्द ही इलाहाबाद हाई कोर्ट में सुनवाई होगी.
क्या है पूरा मामला?
संभल के तत्कालीन सीजेएम विभांशु सुधीर ने 9 जनवरी को संभल के पूर्व सर्कल ऑफिसर अनुज चौधरी, पूर्व एसएचओ अनुज तोमर सहित 20 पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दिया था. ये आदेश 24 नवंबर 2024 को हुई संभल हिंसा के दौरान मोहम्मद आलम पर गोली चलाने के आरोप में दिया गया था. आलम के पिता ने यामीन ने कोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए अपने बेटे पर गोली चलाने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की मांग की थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि पुलिस फायरिंग के दौरान मोहम्मद आलम घायल हो गया था. संभल हिंसा में पुलिस ने मोहम्मद आलम को भी आरोपी बनाया था.
इलाहाबाद हाई कोर्ट से क्या मांग?
अब यूपी सरकार और फिरोजाबाद में तैनात एएसपी अनुज चौधरी ने सीजेएम कोर्ट के आदेश को रद्द करने की मांग करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट में रिवीजन याचिका दाखिल की है. याचिका में सीजेएम कोर्ट के फैसले को रद्द करने की मांग की गई है. इस पर जल्द ही सुनवाई होगी.
आदेश देने वाले जज का हो चुका है ट्रांसफर
पिछले हफ्ते ही इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश पर पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश देने वाले सीजेएम विभांशु सुधीर का तबादला सुल्तानपुर किया गया है. वहीं, सीजेएम कोर्ट अब भी पुलिसकर्मियों के खिलाफ FIR दर्ज न होने पर कड़ा रुख अपना रही है. कोर्ट ने संबंधित थाने से 2 फरवरी तक जवाब मांगा है कि अब तक मुकदमा दर्ज क्यों नहीं किया गया.
फिलहाल अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में सरकार की तरफ से सीजेएम कोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई होने के बाद ये साफ होगा कि अनुज चौधरी समेत अन्य पुलिसकर्मियों को कोई रहता मिलेगी या नहीं.
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