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राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल, हाउसकीपिंग कर्मचारियों से कराई जाती थी कैश काउंटिंग

राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कर्मचारियों की भर्ती और सत्यापन प्रक्रिया पर सवाल उठे हैं. आरोप है कि हाउसकीपिंग स्टाफ से नकदी गिनने का काम कराया गया. मामले में SBI और आउटसोर्सिंग एजेंसी की भूमिका भी जांच के दायरे में है.

राम मंदिर चढ़ावा चोरी विवाद: भर्ती प्रक्रिया पर उठे सवाल, हाउसकीपिंग कर्मचारियों से कराई जाती थी कैश काउंटिंग
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामला: बिना वेरिफिकेशन हुई कर्मचारियों की भर्ती? बैंक और एजेंसी की भूमिका पर उठे सवाल

अयोध्या राम मंदिर के चढ़ावे में कथित चोरी के मामले की जांच के बीच भर्ती प्रक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं. शुरुआती जानकारी के अनुसार चढ़ावे की गिनती और बैंक तक नकदी पहुंचाने की व्यवस्था एक निजी आउटसोर्सिंग एजेंसी के माध्यम से संचालित की जा रही थी. आरोप है कि जिन कर्मचारियों को हाउसकीपिंग कार्य के लिए नियुक्त किया गया था, उन्हें नकदी की गिनती जैसे संवेदनशील काम में लगाया गया. वहीं कर्मचारियों के सत्यापन और नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. मामले की जांच जारी है और कई पहलुओं की पड़ताल की जा रही है.

चढ़ावे की राशि बैंक तक पहुंचाने की जिम्मेदारी एजेंसी को

राम मंदिर में प्रतिदिन प्राप्त होने वाली चढ़ावे और दान की राशि अयोध्या के तुलसी नगर स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) शाखा में जमा कराई जाती है. इस नकदी की गिनती, छंटाई और सुरक्षित परिवहन के लिए बैंक ने वाराणसी की सैनिक सिक्योरिटी सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड नामक आउटसोर्सिंग एजेंसी से करार किया था. अब यही व्यवस्था जांच के दायरे में आ गई है.

हाउसकीपिंग कर्मचारियों से कराया गया कैश काउंटिंग का काम

जानकारी के मुताबिक एजेंसी ने बैंक को 22 कर्मचारी उपलब्ध कराए थे. एजेंसी का दावा है कि इन कर्मचारियों की नियुक्ति हाउसकीपिंग कार्यों के लिए की गई थी और भर्ती भी बैंक की सिफारिश पर हुई थी. हालांकि आरोप है कि बाद में इन्हीं कर्मचारियों को मंदिर में आने वाले चढ़ावे की छंटाई और नकदी गिनने जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में लगा दिया गया. इसी बिंदु को लेकर अब सवाल उठ रहे हैं कि क्या निर्धारित जिम्मेदारियों और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था.

भर्ती और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर सवाल

इस मामले में कर्मचारियों की नियुक्ति प्रक्रिया भी जांच के केंद्र में है. सवाल उठ रहे हैं कि नकदी से जुड़े संवेदनशील कार्यों में लगे कर्मचारियों का सत्यापन किस स्तर पर किया गया था. सूत्रों के अनुसार कुछ नियुक्तियां सिफारिश के आधार पर हुईं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि कर्मचारियों के चयन और तैनाती में तय प्रक्रिया का पालन हुआ या नहीं.

एजेंसी ने साधी चुप्पी

मामला सामने आने के बाद संबंधित एजेंसी की ओर से कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं आई है. एजेंसी न तो बैंक के साथ हुए अनुबंध की शर्तों पर खुलकर बोल रही है और न ही यह स्पष्ट कर रही है कि कर्मचारियों की भर्ती के लिए क्या मानदंड अपनाए गए थे. साथ ही, निर्धारित कार्यों से अलग जिम्मेदारी दिए जाने पर एजेंसी ने क्या कदम उठाए, इस पर भी कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई है.

जांच के बाद साफ होगी जिम्मेदारी

राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण अब केवल कथित धन गबन तक सीमित नहीं रह गया है. भर्ती प्रक्रिया, कर्मचारियों का सत्यापन, आउटसोर्सिंग व्यवस्था और जिम्मेदारियों के निर्धारण जैसे कई महत्वपूर्ण मुद्दे भी जांच के घेरे में हैं. जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि व्यवस्था में चूक कहां हुई और इसके लिए किस स्तर पर जवाबदेही तय होगी.

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